त्योहारों की रौनक के बीच भारतीय रसोई में कई पारंपरिक पकवान विशेष महत्व रखते हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे इलाकों में दीपावली के अवसर पर सूरन यानी जिमिकंद पकाने का खास चलन है। यह कंद न केवल स्वाद में अनोखा और लाजवाब होता है, बल्कि बदलती ऋतु में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को संतुलित रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। शरद ऋतु की शुरुआत में वात और पित्त के प्रभाव से बचने तथा प्रचुर फाइबर प्राप्त करने के लिए इसे आहार में शामिल करना बहुत लाभदायक माना गया है।
हाथों में खुजली रोके बिना जिमिकंद काटने का सही तरीका
सूरन को काटते समय अक्सर त्वचा पर तेज झनझनाहट और खुजली की शिकायत देखने को मिलती है। इससे बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि चाकू चलाने से पहले हथेलियों पर अच्छी तरह थोड़ा तेल चुपड़ लें। यदि त्वचा पर चिकनाई की परत नहीं होगी, तो इसके रस से खुजली होने की पूरी संभावना रहती है। छिलका पूरी तरह हटाने के बाद कंद को कुछ देर साफ पानी में डुबोकर रखें। इसके बाद अपनी पसंद अनुसार मध्यम आकार के चौकोर टुकड़े काट लें। इन टुकड़ों को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय या तो हल्का उबाल लें या फिर धीमी आंच पर तेल में तल लें। सरसों के तेल में डीप फ्राई करने से इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। कड़ाही में सरसों का तेल तेज गर्म करके कटे हुए टुकड़े छोड़ें और सुनहरा होने पर अलग बर्तन में निकाल लें।
खड़े मसालों और पेस्ट से तैयार करें गाढ़ी ग्रेवी
इस व्यंजन की जान इसका विशेष मसाला है, जिसके लिए दो अलग-अलग मिश्रण पीसने होते हैं। पहले जार में लहसुन की कलियां, अदरक का टुकड़ा और हरी मिर्च पीसकर दरदरा पेस्ट तैयार करें, जबकि दूसरे जार में टमाटर की ताजी प्यूरी बना लें। अब कड़ाही में तलने के बाद बचे हुए तेल के साथ एक बड़ा चम्मच ताजा तेल और डालकर गर्म करें। तड़के के लिए इसमें तेजपत्ता, दो बड़ी काली इलायची, दालचीनी की छाल और साबुत जीरा डालकर चटकाएं। इसके तुरंत बाद अदरक, हरी मिर्च और लहसुन का कुटा हुआ पेस्ट डालकर महक आने तक भूनें। इसके बाद बारीक कटा प्याज शामिल करें। इस पकवान में प्याज की मात्रा और भूनने की कला ग्रेवी की मिठास और गाढ़ेपन को सबसे बेहतरीन बनाती है।
मसालों का सटीक संतुलन और भूनने का नियम
जैसे ही प्याज का रंग हल्का बादामी होने लगे, उसमें पिसे हुए टमाटर की प्यूरी उड़ेल दें। अब सूखे मसालों की बारी आती है, जिसमें एक छोटी चम्मच धनिया का सूखा पाउडर, आधा छोटा चम्मच पिसा जीरा, आधा छोटा चम्मच कुटी काली मिर्च और रंगत निखारने के लिए एक बड़ा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च डालें। इसके साथ ही एक चम्मच तीखा लाल मिर्च पाउडर, एक चम्मच हल्दी और एक चम्मच गरम मसाला मिला दें। सभी पिसे मसालों को मध्यम आंच पर चलाएं और बर्तन को ढक्कन से 2 से 3 मिनट के लिए ढक दें, जिससे भाप में मसाले तेल छोड़ने लगें। जब मसाला पूरी तरह पककर खुशबू देने लगे, तब पहले से तले हुए सूरन के टुकड़े इसमें शामिल करें।
धीमी आंच पर पकाएं और गले की खराश दूर करें
मसाले में जिमिकंद डालने के बाद स्वादानुसार एक चम्मच नमक बुरकें और हल्के हाथों से चलाएं ताकि हर टुकड़े पर मसाले का लेप चढ़ जाए। बर्तन को ढककर 2 से 3 मिनट मंद आंच पर छोड़ें जिससे सूरन मसालों का अर्क सोख ले। इसके बाद जितनी गाढ़ी तरी चाहिए, उस हिसाब से आवश्यकतानुसार पानी मिलाएं और 2 से 3 मिनट तक तरी में उबाल आने दें। सब्जी को उतारने से ठीक पहले इसमें आधा चम्मच ताजे नींबू का रस जरूर निचोड़ें। नींबू में मौजूद खटास सूरन के तीखेपन और गले में होने वाली संभावित खुजली को पूरी तरह शांत कर देती है। सबसे अंत में बारीक कटा हरा धनिया ऊपर से छिड़कें। इस प्रकार गरमागरम, खुशबूदार और लजीज सूरन की तरीदार सब्जी परोसने के लिए तैयार हो जाती है।



















