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राजस्थान के धौलपुर का पारंपरिक व्यंजन चदिया जो गर्मियों में शरीर को रखेगा ठंडा और फास्ट फूड का स्वाद भी भुला देगाखानपान
27 जून 2026, 10:43 am (45 दिन पहले)· 4

राजस्थान के धौलपुर का पारंपरिक व्यंजन चदिया जो गर्मियों में शरीर को रखेगा ठंडा और फास्ट फूड का स्वाद भी भुला देगा

राजस्थान के धौलपुर में गर्मी के मौसम में धोआ उड़द की दाल से बनने वाला चदिया बेहद लोकप्रिय है, जिसे हींग और पुदीने के ठंडे पानी के साथ खाया और पिया जाता है।

राजस्थान के धौलपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में आज के इस आधुनिक दौर में भी पारंपरिक खानपान की समृद्ध विरासत पूरी तरह से जीवंत है। गर्मियों के तपते मौसम में यहां धोआ उड़द की दाल से तैयार होने वाला एक बेहद खास और पारंपरिक व्यंजन ‘चदिया’ स्थानीय लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। गांव के बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक, हर उम्र के लोग इस पारंपरिक व्यंजन को बहुत ही चाव और उत्साह के साथ खाते हैं। इस डिश की सबसे अनोखी विशेषता इसका परोसने का तरीका है। इसे केवल एक ठोस भोजन की तरह खाया ही नहीं जाता, बल्कि हींग और हरी पुदीना के ठंडे पानी के साथ पेय के रूप में पिया भी जाता है। यही कारण है कि कड़कती गर्मी के दिनों में यह व्यंजन शरीर को अंदरूनी ठंडक प्रदान करने के साथ-साथ स्वाद का एक बेहतरीन और लाजवाब अनुभव भी कराता है।

घर की आसान सामग्रियों से तैयार होने वाली आसान रेसिपी

इस पारंपरिक डिश को बनाने की पूरी विधि साझा करते हुए स्थानीय गृहिणी प्रभा शर्मा बताती हैं कि चदिया बनाना बेहद सरल है। इसे तैयार करने के लिए जिन सामग्रियों की आवश्यकता होती है, वे सभी रसोई घर में बहुत ही आसानी से मिल जाती हैं। इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनाने की शुरुआत एक रात पहले ही हो जाती है, जब धोआ उड़द की दाल को पानी में अच्छी तरह से भिगोकर रख दिया जाता है। अगली सुबह जब दाल अच्छी तरह फूल जाती है, तो उसे मिक्सी में डालकर एकदम बारीक और चिकना पीस लिया जाता है। इसके बाद एक अलग बर्तन में खुशबूदार हींग का पानी तैयार किया जाता है। अब पिसी हुई उड़द दाल के पेस्ट से छोटी-छोटी चदिया बनाई जाती हैं। इन तैयार चदिया के दोनों तरफ हींग का पानी हल्के हाथों से लगाया जाता है। इसके बाद कड़ाही में शुद्ध सरसों का तेल अच्छी तरह गर्म किया जाता है और इन चदिया को उसमें डाल दिया जाता है। इन्हें तब तक तला जाता है जब तक कि इनका रंग सुंदर और सुनहरा न हो जाए। जब ये चदिया अंदर से पूरी तरह पक जाती हैं, तो इन्हें सावधानीपूर्वक तेल से बाहर निकाल लिया जाता है।

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ठंडे और खुशबूदार पानी से बढ़ता है इसका असली स्वाद

चदिया के फ्राई होने के बाद इस पारंपरिक रेसिपी का सबसे मुख्य और दिलचस्प चरण शुरू होता है। इसके लिए एक बड़े बर्तन में हींग, ताजी हरी पुदीना की पत्तियां और स्वादानुसार नमक मिलाकर ठंडा पानी तैयार किया जाता है। इसके बाद, कड़ाही से निकाली गई तली हुई गर्मागर्म चदिया को इस तैयार ठंडे पानी में डुबो दिया जाता है। इस पूरे मिश्रण को कुछ समय के लिए फ्रिज में रख दिया जाता है ताकि यह अच्छी तरह से ठंडा हो जाए। फ्रिज में ठंडा होने के बाद इस व्यंजन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि चदिया उस खुशबूदार पानी को पूरी तरह सोख लेती हैं और बेहद जूसी व स्वादिष्ट हो जाती हैं।

फास्ट फूड के मुकाबले क्यों इस देसी डिश को पसंद करते हैं लोग

गृहिणी प्रभा शर्मा का मानना है कि हींग और पुदीने का यह पानी चदिया को न केवल असाधारण रूप से स्वादिष्ट बनाता है, बल्कि गर्मियों के मौसम में लू और गर्मी से बचाने में भी मदद करता है। यही मुख्य वजह है कि आज के समय में भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बाजार में मिलने वाले फास्ट फूड और डिब्बाबंद खानपान की तुलना में इस पारंपरिक व्यंजन को खाना ज्यादा पसंद करते हैं। धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में चदिया सिर्फ एक साधारण डिश नहीं है, बल्कि यह वहां की स्थानीय संस्कृति, खानपान और पीढ़ियों पुरानी परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दशकों से चली आ रही यह स्वादिष्ट डिश आज भी लोगों की थाली की शोभा बढ़ा रही है और गर्मियों के दिनों में ग्रामीण जीवन की एक खास पहचान बनी हुई है।

सवाल-जवाब

चदिया किस दाल से बनाया जाता है?
चदिया को मुख्य रूप से धोआ उड़द की दाल का उपयोग करके बनाया जाता है।
चदिया को परोसने का पारंपरिक तरीका क्या है?
इसे तलने के बाद हींग, ताजा पुदीना और नमक से बने ठंडे पानी में भिगोकर परोसा जाता है।
इस व्यंजन का संबंध मुख्य रूप से किस क्षेत्र से है?
यह व्यंजन मुख्य रूप से राजस्थान के धौलपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय है।
गर्मियों में चदिया खाने के क्या फायदे हैं?
इसमें इस्तेमाल होने वाले हींग और पुदीने का ठंडा पानी शरीर को अंदरूनी ठंडक पहुंचाता है और पाचन में मदद करता है।
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