सुबह की आपाधापी के दौरान अक्सर हर रसोई में ऐसा व्यंजन तलाशने की चुनौती होती है जो कम वक्त में पके और पूरे परिवार की पसंद पर खरा उतरे। पोहा या सादे पराठे से हटकर कुछ अलग आजमाना हो, तो हरी पत्तियों की ताजगी वाला नमकीन पैनकेक यानी पालक का चीला एक बेहतरीन उपाय साबित होता है। चने की दाल के महीन आटे और ताजी कटी हरी पत्तियों का यह मेल बाहर की परत को करारा बनाता है, जबकि अंदर का हिस्सा बेहद नरम रहता है। विभिन्न कटी हुई सब्जियों का मेल इसके हर कौर को अधिक स्वादिष्ट बना देता है।
रसोई में जरूरी सामग्री का सही माप
इस पौष्टिक पकवान की तैयारी में बहुत अधिक तामझाम नहीं करना पड़ता। इसके लिए साफ पानी से अच्छी तरह धुली हुई बारीक कतरी लगभग 1 कप पालक की पत्तियां लें। इसके साथ 1 कप बेसन की आवश्यकता होगी। स्वाद और रंगत निखारने के वास्ते एक छोटा बारीक कटा प्याज, एक छोटा टमाटर, कुछ कटी शिमला मिर्च तथा हरा धनिया जुटा लें।
मसालों के तौर पर लगभग आधी छोटी चम्मच अदरक व लहसुन का कुटा पेस्ट, एक चौथाई छोटी चम्मच हल्दी, एक चौथाई छोटी चम्मच अजवाइन और स्वादानुसार साधारण नमक रखें। गाढ़ा मिश्रण बनाने के लिए आवश्यकतानुसार सामान्य पानी और तवे पर चिकनाई लगाने के लिए थोड़ा कुकिंग ऑयल अलग रख लें।
घोल तैयार करने का सही तरीका
एक गहरे बर्तन में कटी हुई हरी पालक के पत्तों को निकालें। उसी कटोरे में बारीक कटा हुआ प्याज, लाल टमाटर, हरी शिमला मिर्च और ताजा धनिया पत्ती शामिल करें। इसके उपरांत पिसी हल्दी, अजवाइन के दाने, लहसुन-अदरक का तैयार पेस्ट तथा नमक डालकर समस्त सामग्रियों को आपस में भली-भांति मिला लें।
अब इस मिश्रण में बेसन डालें। एक साथ ढेर सारा पानी उंडेलने के बजाय धीरे-धीरे थोड़ा पानी डालते हुए चम्मच या कलछी से फेंटें। ध्यान रहे कि बेसन में सूखी गांठे न बनने पाएं। तैयार बैटर की सघनता मध्यम होनी चाहिए, ताकि यह न तो अत्यधिक गाढ़ा रहे और न ही पानी की तरह बहने लगे। ऐसा संतुलित घोल तवे की सतह पर डालते ही आसानी से गोल आकार में फैल जाता है।
तवे की आंच और पकाने की विधि
गैस चूल्हे पर तवा चढ़ाकर उसे भली प्रकार तपने दें। जब धातु की सतह समुचित गर्म हो जाए, तब उस पर थोड़ा सा तेल फैलाएं। एक बड़ा चमचा भरकर घोल तवे के मध्य में डालें और हल्के हाथों से गोल घुमाते हुए फैलाएं। इसे बहुत अधिक मोटा न रखें, क्योंकि अधिक मोटाई होने पर भीतर का हिस्सा कच्चा रह सकता है।
चीले को मध्यम आंच पर धीरे-धीरे सिकने दें। जैसे ही निचली सतह हल्की सुनहरी रंगत पकड़ने लगे और उसके किनारे तवे से खुद-ब-खुद छूटने लगें, तो पलटे की मदद से उसे सावधानीपूर्वक उलट दें। दूसरी तरफ भी मामूली तेल की बूंदें लगाकर पकने दें। दोनों ओर से सुनहरा और कुरकुरा सिक जाने के बाद इसे आंच से उतारकर थाली में रख लें।
चीले को अधिक कुरकुरा बनाने के खास नुस्खे
यदि आप अधिक खस्तापन चाहते हैं, तो कुछ बुनियादी बातों का खयाल रखना आवश्यक है। घोल में पानी की अधिकता न करें और न ही तवे पर मोटा चीला फैलाएं। मध्यम तापमान पर पकाने से भाप धीरे-धीरे निकलती है और बाहरी परत बहुत कुरकुरी बनती है। तवे पर जरूरत से ज्यादा तेल उड़ेलने से करारापन नहीं बढ़ता, बल्कि चीला अधिक तैलीय हो जाता है।
घोल में पत्तियां मिलाने से पूर्व उन्हें साफ पानी से धोना बहुत जरूरी है ताकि मिट्टी पूरी तरह निकल जाए। इसके अतिरिक्त, सब्जियों की मात्रा तय सीमा से अधिक न बढ़ाएं, अन्यथा घोल बंधने में परेशानी आ सकती है। शुरुआत करते समय सामग्री के दिए गए अनुपात का पालन करना ही सबसे सुरक्षित रहता है।
परोसने के तरीके और विकल्प
तवे से उतरा गरमागरम चीला ताजे गाढ़े दही, पुदीना-धनिया की हरी चटनी या किसी भी मनपसंद तीखी-मीठी सॉस के साथ बेहद लजीज लगता है। सुबह के नाश्ते के अलावा इसे शाम की हल्की भूख मिटाने के लिए भी झटपट बनाया जा सकता है। नन्हे बच्चों के लिए पकाते वक्त तीखे मसालों की मात्रा आवश्यकतानुसार घटाई जा सकती है।



















