करेला एक ऐसी सब्जी है जिसे अपनी कड़वाहट के कारण हर कोई पसंद नहीं करता, लेकिन अगर इसे सही तरीके से बनाया जाए, तो यह एक बेहद स्वादिष्ट और चटपटा व्यंजन बन सकता है। यदि आप पूरे साल इस अनोखी सब्जी का स्वाद लेना चाहते हैं, तो घर पर करेले का मसालेदार अचार बनाना सबसे बेहतरीन तरीका है। सितंबर के महीने में इस अचार को तैयार करने के कई खास फायदे होते हैं। इस मौसम में बनाया गया अचार न केवल स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि पूरे सालभर खराब भी नहीं होता है। बदलते मौसम की परिस्थितियां इस अचार के लिए एक प्राकृतिक रक्षक का काम करती हैं, जिससे आप बेहद आसान विधि से रसोई में एक बेहतरीन अचार तैयार कर सकते हैं।
सितंबर का महीना अचार बनाने के लिए क्यों है सबसे उत्तम
सितंबर के दौरान मौसम में होने वाला बदलाव सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सबसे अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करता है। वर्ष के इस समय हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी का स्तर कम होने लगता है। अचार बनाने के लिए यह बेहद फायदेमंद है क्योंकि नमी ही अचार के खराब होने और उसमें फफूंदी लगने का सबसे बड़ा कारण होती है। इस महीने में अचार डालने से फफूंदी या फंगस लगने की आशंका लगभग खत्म हो जाती है, जिससे अचार सुरक्षित तरीके से पकता है। इसके अलावा, इस सीजन में बाजार में साफ-सुथरे और ताजे करेले बहुत ही सस्ते दामों पर मिल जाते हैं। इसका मतलब है कि आप बिना ज्यादा पैसे खर्च किए बेहतरीन गुणवत्ता वाले करेलों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस समय का हल्का तापमान मसालों को करेले के अंदर तक समाने में मदद करता है, जिससे इसका स्वाद बढ़ जाता है।
करेले को तैयार करने के दो पारंपरिक तरीके
अचार बनाने की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले आपको बाजार से अच्छी गुणवत्ता वाले, साफ और कड़े करेले खरीदने चाहिए। करेलों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि उन पर लगी मिट्टी या गंदगी पूरी तरह साफ हो जाए। इसके बाद इन्हें छोटे और एक समान टुकड़ों में काट लें। करेले का अचार बनाने के लिए आप दो पारंपरिक तरीकों में से किसी भी एक को चुन सकते हैं। पहला तरीका यह है कि आप करेले के टुकड़ों को बिना उबाले सीधे ही मसालों के साथ मिक्स कर सकते हैं, जिससे अचार में करेले का प्राकृतिक कुरकुरापन बना रहता है। दूसरा तरीका यह है कि आप कटे हुए टुकड़ों को पानी में हल्का सा उबाल यानी बॉइल कर लें। उबालने से करेले की अधिकांश कड़वाहट पानी के साथ बाहर निकल जाती है, जिससे तैयार अचार बहुत अधिक कड़वा नहीं लगता और जो लोग कम कड़वा खाना पसंद करते हैं, उनके लिए यह बेहतरीन विकल्प बन जाता है।
बिना उबाले कड़वाहट दूर करने की खास तकनीक
यदि आप करेले को बिना उबाले सीधे ही अचार बनाना चाहते हैं, तो इसकी कड़वाहट को दूर करने के लिए आपको एक बेहद आसान और आजमाया हुआ तरीका अपनाना होगा। सबसे पहले करेले को छोटे टुकड़ों में काटने के बाद उसके अंदर मौजूद सभी बीजों को पूरी तरह से निकाल दें। बीजों को हटाने के बाद करेले के टुकड़ों को एक बड़े बर्तन में रखें और उसमें अच्छी मात्रा में नमक और हल्दी पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब इस मिश्रण को लगभग दो घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें। इस दौरान नमक के प्रभाव से करेले के अंदर का कड़वा पानी बाहर निकल जाता है। यह प्रक्रिया बेहद जरूरी है क्योंकि इससे अचार का कड़वापन तो कम होता ही है, साथ ही इसकी शेल्फ लाइफ भी बढ़ जाती है। इसके बाद करेले के टुकड़े मसालों और सरसों के तेल को आसानी से अपने अंदर सोख लेते हैं।
मसालों का अनोखा और खुशबूदार मिश्रण
किसी भी पारंपरिक भारतीय अचार की असली ताकत उसके मसालों के मेल में होती है। इस अचार को तैयार करने के लिए आपको पिसा हुआ धनिया, पिसी हुई सौंफ, पिसी हुई सरसों, राई, मेथी दाना और थोड़ी सी हींग की आवश्यकता होगी। इन सभी मसालों को मिक्सी में डालकर दरदरा पीस लें, क्योंकि दरदरे मसालों का स्वाद अचार में सबसे बेहतर आता है। इसके अलावा आपको स्वादानुसार सादा नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, थोड़ी सी पिसी हुई काली मिर्च, खटास के लिए अमचूर पाउडर, कलौंजी और थोड़ा सा काला नमक चाहिए होगा। इस अचार को सुरक्षित रखने के लिए पीली सरसों के तेल का उपयोग किया जाता है। तेल को इस्तेमाल करने से पहले कढ़ाई में तब तक अच्छी तरह गर्म करें जब तक कि उसमें से धुआं न निकलने लगे, और फिर उसे पूरी तरह से ठंडा होने के लिए रख दें।
अचार को मिलाने और तैयार करने की विधि
जब नमक और हल्दी लगाकर रखे गए करेले के टुकड़ों को दो घंटे हो जाएं, तो उनका सारा कड़वा पानी छानकर अलग कर दें और टुकड़ों को थोड़ा सुखा लें। अब इन तैयार करेले के टुकड़ों को एक साफ और सूखे बर्तन में निकाल लें। इसके बाद इसमें पहले से गर्म करके ठंडा किया गया पीली सरसों का तेल डालें। अब मिक्सी में पीसे गए दरदरे मसालों के साथ-साथ बाकी के सूखे मसाले जैसे लाल मिर्च, हल्दी, नमक, अमचूर और कलौंजी भी इसमें डाल दें। एक साफ और सूखे चम्मच की मदद से सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें ताकि करेले के हर एक टुकड़े पर मसालों और सरसों के तेल की एक समान परत चढ़ जाए।
धूप का महत्व और लंबे समय तक सुरक्षित रखने का तरीका
करेले के कड़वाहट को पूरी तरह खत्म करने और इसके स्वाद को दोगुना करने के लिए आप इसमें थोड़ा सा ताजा नींबू का रस भी मिला सकते हैं। नींबू की हल्की खटास करेले के स्वाद को बहुत ही संतुलित और चटपटा बना देती है। अच्छी तरह मिलाने के बाद इस अचार को एक साफ, सूखे और एयरटाइट कांच या चीनी मिट्टी के जार में भर लें। अचार को जल्दी पकाने और खाने योग्य बनाने के लिए इस जार को रोजाना कुछ घंटों के लिए सीधी धूप में रखें। धूप में रखने से यह अचार मात्र दो से तीन दिन में पूरी तरह तैयार हो जाता है और इसका स्वाद भी बेहतरीन आता है। हालांकि, अगर आपके घर में धूप नहीं आती है, तो आप इसे बिना धूप के भी रख सकते हैं, लेकिन तब इसे पूरी तरह पकने में लगभग 15 से 20 दिन का समय लगेगा। धूप न केवल अचार को जल्दी पकाती है बल्कि फफूंदी से भी बचाती है, जिससे अचार सालभर सुरक्षित रहता है।
मधुमेह रोगियों के लिए एक सेहतमंद विकल्प
स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ यह करेले का अचार सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। करेले को अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से यह रक्त शर्करा यानी ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक होता है। यही कारण है कि डॉक्टर भी शुगर के मरीजों को अपनी डाइट में करेला शामिल करने की सलाह देते हैं। यदि आप इस अचार को घर पर शुद्ध मसालों और सरसों के तेल के साथ बनाते हैं, तो यह बाजार के प्रिजर्वेटिव वाले अचार की तुलना में काफी सेहतमंद होता है। इस आसान रेसिपी से बनाया गया अचार आपके भोजन का स्वाद तो बढ़ाएगा ही, साथ ही शुगर के मरीजों के लिए एक पौष्टिक और सुरक्षित विकल्प भी साबित होगा।



















