रोज़-रोज़ एक जैसी फिश करी या तली हुई मछली खाकर जिनका मन ऊब गया है, उनके लिए बिहार और पश्चिम बंगाल के घरों में बनने वाला माछेर झोल एक बेहतरीन बदलाव हो सकता है. हल्के मसालों और सरसों के हल्के तीखेपन से तैयार यह पारंपरिक डिश हर घर में बड़े चाव से बनाई जाती है और खासतौर पर गरमागरम चावल के साथ परोसे जाने पर इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है.
सरसों के तेल में छिपा है इसका असली स्वाद
माछेर झोल की पहचान इसकी हल्की मगर गहरे स्वाद वाली ग्रेवी से होती है, जो सरसों के तेल और चुनिंदा मसालों से तैयार होती है. इसमें भारी-भरकम मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता, फिर भी स्वाद में कोई कमी नहीं रहती. ताजी मछली, पीली सरसों, लहसुन और जीरे का मेल इस डिश को बाकी फिश करी से अलग बनाता है, और यही वजह है कि यह रेसिपी घर पर कुछ नया आजमाने वालों के लिए एक अच्छा विकल्प मानी जाती है.
मछली को मैरिनेट करने का सही तरीका
रेसिपी की शुरुआत मछली के टुकड़ों को अच्छी तरह धोने से होती है. इसके बाद टुकड़ों पर नमक, हल्दी और लाल मिर्च पाउडर लगाकर करीब 20 से 25 मिनट के लिए अलग रख दिया जाता है, ताकि मसाले मछली के अंदर तक अच्छी तरह समा जाएं. यह स्टेप डिश के स्वाद की नींव तैयार करता है, इसलिए इसे जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए.
कड़ाही में तड़का, पेस्ट और ग्रेवी की बारी
अब एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म किया जाता है. तेल गरम होने पर मैरिनेट की हुई मछली के टुकड़ों को सुनहरा होने तक हल्का तल लिया जाता है और फिर उन्हें निकालकर अलग रख दिया जाता है. इसी दौरान मिक्सर में पीली सरसों, लहसुन और जीरा डालकर एक बारीक पेस्ट तैयार कर लिया जाता है.
उसी कड़ाही में बचे हुए तेल में मेथी दाना, सूखी लाल मिर्च और तेज पत्ता डालकर तड़का लगाया जाता है. इसके बाद तैयार सरसों का पेस्ट डाला जाता है, साथ ही हल्दी, धनिया पाउडर और लाल मिर्च मिलाकर धीमी आंच पर मसालों को अच्छी तरह भूना जाता है, जब तक कि उनका कच्चापन पूरी तरह खत्म न हो जाए.
मसाले पकने के बाद इसमें कटे हुए टमाटर और स्वादानुसार नमक डाला जाता है और टमाटर के नरम होने तक इसे पकाया जाता है. इसके बाद जरूरत के मुताबिक पानी मिलाकर ग्रेवी तैयार की जाती है और उसमें एक-दो उबाल आने दिया जाता है.
इसके बाद पहले से तली हुई मछली को ग्रेवी में डालकर 5 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है, ताकि मछली के अंदर तक ग्रेवी का स्वाद अच्छी तरह समा जाए. आखिर में ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दी जाती है.
कैसे परोसें
इस तरह बिहारी-बंगाली स्टाइल माछेर झोल बनकर तैयार हो जाती है. इसे गरमागरम चावल या रोटी के साथ परोसा जा सकता है, और घर के रोज़मर्रा के खाने में एक पारंपरिक व अलग स्वाद का अनुभव लिया जा सकता है. कम मसालों के बावजूद इसका स्वाद भारी नहीं, बल्कि हल्का और संतुलित रहता है, जिस वजह से यह डिश परिवार के सभी सदस्यों को आसानी से पसंद आती है.




















