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साधारण चपाती को कहें अलविदा: घर पर इस आसान तरीके से तैयार करें पारंपरिक राजस्थानी चुटकी रोटीखानपान
26 जुल॰ 2026, 1:02 pm (22 दिन पहले)· 0

साधारण चपाती को कहें अलविदा: घर पर इस आसान तरीके से तैयार करें पारंपरिक राजस्थानी चुटकी रोटी

यदि आप रोजाना साधारण रोटी खाकर बोर हो चुके हैं, तो पारंपरिक राजस्थानी चुटकी रोटी आजमाएं, जिसे अपनी कुरकुरी परत और देसी घी की सोंधी महक के लिए जाना जाता है।

घर के भोजन में अक्सर एक ही तरह की सादी रोटियां खाते-खाते परिवार के सदस्य उब जाते हैं। ऐसे में अगर आप कुछ नया और बेहद स्वादिष्ट बनाने की सोच रहे हैं, तो पश्चिमी भारत के पारंपरिक रसोई घरों से आने वाली राजस्थानी चुटकी रोटी आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकती है। अपने अनोखे स्वाद और खास बनावट के कारण प्रसिद्ध यह पारंपरिक रोटी बाहर से बेहद करारी और कुरकुरी होती है, जबकि इसके भीतर की परतें अत्यंत मुलायम और मुंह में घुल जाने वाली होती हैं। शुद्ध देसी घी की लाजवाब महक और चुनिंदा मसालों के मेल से तैयार होने वाली इस रोटी को राजस्थान के कई हिस्सों में खोबा रोटी के नाम से भी जाना जाता है।

राजस्थानी चुटकी रोटी का सांस्कृतिक महत्व और इतिहास

राजस्थान की पारंपरिक रसोई हमेशा से ही अपनी सादगी और स्थानीय सामग्रियों से अद्भुत स्वाद तैयार करने की कला के लिए जानी जाती रही है। दाल-बाटी, गट्टे की सब्जी, केर-सांगरी और बाजरे की रोटी जैसे व्यंजनों ने दुनिया भर के भोजन प्रेमियों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। इसी समृद्ध विरासत का एक हिस्सा चुटकी रोटी भी है। पुराने समय में इस विशिष्ट रोटी को किसी खास त्योहार, उत्सव या घर आए विशेष मेहमानों के आदर-सत्कार के लिए ही तैयार किया जाता था। हालांकि, समय के साथ इसकी लोकप्रियता देश के कोने-कोने में फैल चुकी है और लोग इसके अनूठे स्वाद के मुरीद हो रहे हैं। इस रोटी की सबसे बड़ी विशेषता इसके ऊपर बनाए जाने वाले छोटे-छोटे चुटकी के निशान हैं। यह कलात्मक डिजाइन केवल देखने में ही सुंदर नहीं लगता, बल्कि रोटी सेकते समय इसमें डाले जाने वाले देसी घी और मसालों को अपने अंदर अच्छी तरह सोख लेता है, जिससे रोटी का हर निवाला स्वाद से भरपूर हो जाता है।

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चुटकी रोटी बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियां

इस स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजन को अपने घर पर तैयार करने के लिए आपको किसी विशेष सामग्री को बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं है। यह रसोई में हमेशा मौजूद रहने वाले साधारण सामान से ही तैयार हो जाती है। इसके लिए निम्नलिखित सामग्रियां एकत्रित करें

  • गेहूं का आटा
  • स्वादानुसार नमक
  • एक चुटकी हींग
  • देसी घी (मोयन लगाने और सेकने के लिए)
  • जीरा
  • 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच बारीक कटी हरी मिर्च
  • आधा छोटा चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक
  • गूंथने के लिए आवश्यकतानुसार पानी

इस रेसिपी की असली जान शुद्ध देसी घी में छिपी है। देसी घी के उपयोग से इस रोटी को वह पारंपरिक भीनी-भीनी सुगंध और कुरकुरापन मिलता है जो इसे खास बनाता है। इसके अलावा, हींग, अदरक और हरी मिर्च का संयोजन न केवल इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है, बल्कि इस भारी रोटी को पचाने में भी मदद करता है।

बनाने की संपूर्ण चरणबद्ध विधि

पहला चरण: आटा गूंथना और उसे विश्राम देना

सबसे पहले एक बड़ा बर्तन या पारंपरिक परात लें। इसमें गेहूं का आटा डालें और फिर स्वादानुसार नमक, एक चुटकी हींग और कद्दूकस किया हुआ अदरक मिला दें। अब इसमें एक छोटा चम्मच देसी घी मोयन के रूप में डालें। मोयन डालने से रोटी अंदर से बेहद खस्ता बनती है। अपनी उंगलियों की मदद से इन सभी सूखी सामग्रियों को आपस में अच्छी तरह मिला लें ताकि मोयन पूरे आटे में समा जाए। इसके बाद, थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए आटे को गूंथना शुरू करें। ध्यान रहे कि आटा न तो बहुत अधिक कड़ा होना चाहिए और न ही बहुत ज्यादा गीला। इसे एक चिकना और मुलायम आटा गूंथकर तैयार कर लें। अब आटे को एक साफ, गीले सूती कपड़े या ढक्कन से ढककर ठीक 10 मिनट के लिए रख दें। इस समय में आटे में मौजूद ग्लूटेन सक्रिय हो जाता है, जिससे रोटी को बेलना बेहद आसान हो जाता है।

दूसरा चरण: मसालेदार और परतदार बेस तैयार करना

10 मिनट बीतने के बाद, ढक्कन हटाकर आटे को एक बार फिर से हल्के हाथों से गूंथ लें ताकि वह पूरी तरह से एकसार हो जाए। अब इस आटे से बड़ी और मोटी लोइयां बना लें। ध्यान रखें कि ये लोइयां रोज बनने वाली साधारण रोटियों की तुलना में काफी बड़ी और भारी होनी चाहिए। एक लोई लेकर चकला-बेलन की मदद से उसे मोटी गोल रोटी के आकार में बेल लें। अब इस बेली हुई रोटी की ऊपरी सतह पर अच्छी तरह से देसी घी की एक परत लगाएं। इसके ऊपर जीरा, लाल मिर्च पाउडर और बारीक कटी हरी मिर्च को समान रूप से चारों तरफ फैला दें। अब रोटी को एक किनारे से धीरे-धीरे मोड़ते हुए यानी रोल करते हुए एक लंबा बेलनाकार रोल बना लें। इस तैयार रोल को जलेबी की तरह गोल घुमाते हुए एक चक्राकार लोई का रूप दें और ऊपर से हथेली से दबा दें। अब इसे बेलन की सहायता से हल्के हाथों से दोबारा थोड़ा मोटा बेल लें ताकि इसके अंदर की मसालेदार परतें आपस में चिपके नहीं और सुरक्षित रहें।

तीसरा चरण: पारंपरिक चुटकी कला और सेकने की विधि

अब गैस पर एक भारी तले का लोहे का तवा मध्यम आंच पर गर्म होने के लिए रखें। तवा गर्म होने पर बेली हुई मसालेदार रोटी को सावधानी से उस पर डालें। जब रोटी नीचे से हल्की सी पक जाए, तब उसे पलट दें। अब रोटी की ऊपर की सतह पर अपनी उंगलियों या अंगूठे की सहायता से चुटकी काटते हुए छोटे-छोटे सुंदर निशान बनाएं। इन निशानों को रोटी के बाहरी किनारों से शुरू करते हुए केंद्र की ओर लाएं। यह चुटकी का निशान ही इस रोटी की असली पहचान है। अब तवे के किनारों पर और रोटी के ऊपर अच्छी मात्रा में देसी घी डालें। रोटी को दोनों तरफ से पलट-पलट कर मध्यम आंच पर तब तक सेकें जब तक कि बाहरी परत पूरी तरह से सुनहरी और कुरकुरी न हो जाए और इसके ऊपर सुंदर चित्तियां न आ जाएं। जब रोटी अंदर तक अच्छी तरह पक जाए और बाहर से लाजवाब खस्ता दिखने लगे, तब इसे तवे से उतार लें।

चुटकी रोटी के साथ परोसे जाने वाले सर्वोत्तम व्यंजन

वैसे तो मसालों और घी से भरपूर यह रोटी बिना किसी अतिरिक्त डिश के भी खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है, लेकिन इसका असली आनंद कुछ खास पारंपरिक चीजों के साथ आता है। इसे ताजी ठंडी दही या रायते के साथ परोसने पर मिर्च का तीखापन संतुलित हो जाता है। इसके अलावा, राजस्थानी शैली में भोजन का आनंद लेने के लिए इसे तीखी लहसुन की चटनी, धनिए-पुदीने की हरी चटनी या घर के बने आम के अचार के साथ परोसें। गर्मागर्म मसालेदार आलू की सूखी सब्जी या फिर पारंपरिक पीली दाल तड़का के साथ भी इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। वीकेंड पर परिवार के साथ एक विशेष लंच प्लान करना हो या मेहमानों को कुछ पारंपरिक और लजीज परोसना हो, यह चुटकी रोटी हमेशा तारीफ बटोरने का काम करेगी।

स्वाद और बनावट को बेहतरीन बनाने के लिए कुछ जरूरी टिप्स

यदि आप पहली बार घर पर चुटकी रोटी बनाने जा रहे हैं, तो इन महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखें

  • मोटाई का संतुलन: इस रोटी की असली खूबी इसकी मोटाई में छिपी है। यदि आप इसे सामान्य रोटी की तरह बहुत पतला बेल देंगे, तो सेकते समय यह कड़क और सूखी हो जाएगी और आपको वह पारंपरिक खस्ता बनावट नहीं मिल पाएगी।
  • आंच पर नियंत्रण: इसे हमेशा मध्यम या धीमी आंच पर ही सेकें। यदि आंच बहुत तेज होगी, तो रोटी ऊपर से तो जल्दी लाल या काली हो जाएगी लेकिन अंदर से पूरी तरह से कच्ची रह जाएगी।
  • घी का सही मात्रा में उपयोग: मोयन और सेकते समय घी का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे संतुलित रखें। अत्यधिक घी से आटा बेलने में मुश्किल हो सकती है और रोटी बहुत ज्यादा भारी हो सकती है, वहीं बहुत कम घी से परतों का कुरकुरापन कम हो जाएगा।

इन आसान चरणों और सुझावों का पालन करके आप भी अपने घर की रसोई में पारंपरिक राजस्थानी चुटकी रोटी का वही असली स्वाद ला सकते हैं। आज ही इस लाजवाब डिश को आजमाएं और अपने पूरे परिवार को एक शाही और स्वादिष्ट भोजन का आनंद कराएं।

सवाल-जवाब

चुटकी रोटी क्या है?
चुटकी रोटी, जिसे खोबा रोटी के नाम से भी जाना जाता है, एक पारंपरिक राजस्थानी रोटी है। यह अपनी मोटी बुनावट, कुरकुरी बाहरी परत और विशेष चुटकी के निशानों के लिए जानी जाती है जो घी और मसालों को सोख लेते हैं।
इसे चुटकी रोटी क्यों कहा जाता है?
इसका यह नाम पारंपरिक रूप से उंगलियों से दी जाने वाली चुटकी की तकनीक के कारण पड़ा है, जिससे पकाते समय रोटी की ऊपरी सतह पर छोटे-छोटे गड्ढे बनाए जाते हैं।
चुटकी रोटी बनाने के लिए कौन सी सामग्रियां चाहिए?
इसके लिए आपको गेहूं का आटा, नमक, हींग, कद्दूकस किया हुआ अदरक, जीरा, लाल मिर्च पाउडर, हरी मिर्च, पानी और देसी घी की आवश्यकता होती है।
बेलने से पहले आटे को कितनी देर तक रखना चाहिए?
आटे को बेलने से पहले ढककर ठीक 10 मिनट के लिए रख देना चाहिए ताकि उसकी बुनावट मुलायम और लचीली हो जाए।
इस रोटी को पकाने के लिए आंच कैसी होनी चाहिए?
इसे मध्यम आंच पर पकाना चाहिए ताकि यह मोटी रोटी बाहर से जले बिना अंदर की परतों तक अच्छी तरह से पक जाए।
चुटकी रोटी के साथ परोसने के लिए सबसे अच्छे व्यंजन कौन से हैं?
यह दही, तीखी लहसुन की चटनी, हरी चटनी, आम के अचार, मसालेदार आलू की सब्जी या गर्मागर्म दाल के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है।
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