अगर आप गाजियाबाद में रहते हैं और बेहतरीन स्वाद के शौकीन हैं, तो राजनगर इलाके की एक खास दुकान का जायका आपको जरूर पसंद आएगा। यहां सुनील कुमार पिछले 15 साल से छोले-कुलचे की दुकान चला रहे हैं, जो शहर के खाने-पीने के शौकीनों के बीच काफी मशहूर है। इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ग्राहक सुबह दुकान के खुलने का इंतजार करते हुए पहले से ही वहां इकट्ठा होने लगते हैं। आईएमटी कॉलेज के बिल्कुल सामने स्थित इस छोटी सी दुकान पर मिलने वाले स्वाद ने दूर-दूर के लोगों को अपना दीवाना बना दिया है।
बटर और खास मसालों का मेल
सुनील कुमार छोले तैयार करने के पारंपरिक तरीकों से थोड़ा हटकर काम करते हैं। छोले को सिर्फ उबालकर प्लेट में परोसने के बजाय उन्हें अमूल बटर में प्याज और टमाटर के साथ अच्छी तरह से भुना जाता है। इसके बाद इसमें गर्म मसालों के साथ एक खास दक्षिण भारतीय मसाले का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसके स्वाद और महक को पूरी तरह से बदल देता है। इस अनोखी रेसिपी की वजह से छोलों का जायका बेहद अलग और मसालेदार हो जाता है, जिसे खाने के लिए लोग घंटों इंतजार करने को तैयार रहते हैं।
पनीर कुलचे और प्लेट की खासियत
छोले के साथ परोसे जाने वाले कुलचे भी अपनी खास वैरायटी के लिए जाने जाते हैं। इन कुलचों को भी मक्खन में अच्छी तरह सेंका जाता है, जिसमें पनीर वाले कुलचे लोगों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। कुलचे पर विशेष चटनी लगाने के बाद इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। ग्राहकों को परोसी जाने वाली एक प्लेट में छोले के साथ तीन पनीर कुलचे, ताजा सलाद, कटी हुई प्याज, मिर्च का अचार और चटनी दी जाती है। इस भरपूर और स्वादिष्ट प्लेट की कीमत मात्र 90 रुपये रखी गई है, जबकि ग्राहकों के लिए आटे वाले कुलचे और अन्य विकल्प भी उपलब्ध रहते हैं।
दूर-दूर से पहुंचते हैं जायके के दीवाने
इस दुकान की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां सिर्फ गाजियाबाद के स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पड़ोसी इलाकों जैसे नोएडा और दिल्ली से भी लोग स्वाद चखने आते हैं। कई ग्राहक ऐसे हैं जो पिछले कई सालों से नियमित रूप से यहां आ रहे हैं। दुकान के बाहर खड़ी गाड़ियां और ग्राहकों की भारी भीड़ इसकी सफलता की गवाही देती है। यदि आप भी इस प्रसिद्ध स्वाद का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो आप गाजियाबाद के राजनगर में आईएमटी कॉलेज के सामने इस दुकान पर जा सकते हैं।



















