झारखंड के ग्रामीण इलाकों में जब भी घर पर मेहमान या कुटुंब आते हैं, तो उनके आतिथ्य के लिए काजू बर्फी जैसी महंगी मिठाइयों के बजाय स्थानीय व्यंजनों को प्राथमिकता दी जाती है। इन खास पकवानों की खूबी यह है कि ये बेहद स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आम आदमी की जेब पर भी भारी नहीं पड़ते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मेहमाननवाजी की यह अनोखी संस्कृति पीढ़ियों से चली आ रही है और यहां के खान-पान की अपनी एक अलग पहचान है।
विभिन्न प्रकार के नमकीन और पकौड़े
स्थानीय दुकान संचालक मीरा गोराई के मुताबिक, उनकी दुकान पर ग्राहकों के लिए ब्रेड चाप, आलू चाप, समोसा, अंडा चाप, प्याजी और मसाला चना जैसे तमाम नमकीन विकल्प उपलब्ध रहते हैं। इसके अलावा यहां नीम की पत्तियों और प्याज से तैयार किए जाने वाले पकौड़े भी लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। ग्रामीण अंचल के लोगों को इन सभी चीजों का ठेठ और पारंपरिक स्वाद बेहद पसंद आता है, जो रोजमर्रा की भागदौड़ में आसानी से मिल जाता है।
महज 20 रुपए में भरपेट नाश्ता
इस खान-पान की सबसे बड़ी खूबी इसका किफायती होना है। यहां महज 20 रुपए में तीन पीस तक नाश्ता आसानी से मिल जाता है, जिससे आम लोग कम खर्च में अपनी मनपसंद चीजें खरीद सकते हैं। इसके साथ ही पारंपरिक मिठाइयों के शौकीनों के लिए लौंग लता, बालूशाही, शकरपाला और मीठी नमकीन जैसे व्यंजन भी काउंटर पर हर वक्त सजाए जाते हैं।
कम बजट में शानदार मेहमाननवाजी
मीरा गोराई बताती हैं कि घर में मेहमानों के आने पर लोग इन्हीं व्यंजनों को खरीदकर ले जाते हैं ताकि उनका स्वागत बेहतरीन तरीके से हो सके। अगर किसी घर में 10 से 12 मेहमान आ जाएं, तो लगभग 200 रुपए के मामूली खर्च में पूरे परिवार और मेहमानों के लिए नाश्ते का इंतजाम हो जाता है। इससे कम बजट में भी मेहमाननवाजी में कोई कमी नहीं खलती और यह परंपरा साबित करती है कि आत्मीयता और अपनापन ही सबसे बड़ा सत्कार है।


















