स्मार्ट चश्मों और पहनने योग्य डिस्प्ले तकनीक का दायरा अब तेजी से बदल रहा है। लंबे समय तक भारी, गर्म और असुविधाजनक हेडसेट्स तक सीमित रही मिक्स्ड रियलिटी तकनीक अब काफी पतले और हल्के फ्रेम में समाने लगी है। इस सेगमेंट में मेटा के नए वीआर ग्लासेज और एक्सरियल के ऑरा मॉडल के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। दोनों ही गैजेट्स उन चिंताओं के बीच सामने आए हैं जो स्मार्ट चश्मों से जुड़े प्राइवेसी मुद्दों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार रिकॉर्डिंग को लेकर अक्सर जताई जाती हैं। इसके बावजूद, इन नए उपकरणों की विजुअल क्वालिटी और पहनने में आसानी इस तकनीक को एक नया मोड़ देती नजर आ रही है।
मेटा और एक्सरियल के बीच कीमत और उपलब्धता का मुकाबला
वर्चुअल डिस्प्ले तकनीक के लिए पहचानी जाने वाली कंपनी एक्सरियल ने गूगल के साथ मिलकर एंड्रॉइड एक्सआर प्लेटफॉर्म पर आधारित अपने मिक्स्ड रियलिटी स्मार्ट ग्लासेज एक्सरियल ऑरा तैयार किए हैं। एक्सरियल ने इस डिवाइस की शुरुआती आधिकारिक कीमत 1,279 डॉलर तय की है, जो मेटा के वीआर ग्लासेज की तुलना में ठीक 20 डॉलर सस्ती है। रिलीज टाइमलाइन के मामले में भी दोनों में अंतर है। एक्सरियल ऑरा इसी साल बाजार में आ रहे हैं, जबकि मेटा के ग्लासेज अगले साल की शुरुआत में पेश किए जाएंगे।
वर्तमान में ऑरा ग्लासेज का प्री-ऑर्डर केवल उन्हीं ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराया गया है जिन्होंने पहले से पेड रिजर्वेशन कराया हुआ था। आम लोगों के लिए प्री-ऑर्डर प्रक्रिया आने वाले हफ्तों में शुरू की जाएगी। 1,279 डॉलर की यह बेस कीमत 12 जीबी रैम और 256 जीबी इंटरनल स्टोरेज वाले मॉडल की है। शुरुआत में एक्सरियल इन चश्मों की शिपिंग अमेरिका, कनाडा, जापान और दक्षिण कोरिया में करेगी, जबकि अन्य वैश्विक क्षेत्रों में इन्हें साल 2027 में लॉन्च किया जाएगा। मेटा ने अपने वीआर ग्लासेज की घोषणा सितंबर में आयोजित कनेक्ट इवेंट के दौरान की थी, जिसके ठीक अगले दिन ऑरा का प्रदर्शन भी सामने आया।
स्मार्ट चश्मों के प्रकार और मिक्स्ड रियलिटी का फर्क
बाजार में उपलब्ध स्मार्ट चश्मों को कई श्रेणियों में बांटा जा सकता है। सबसे बुनियादी मॉडल वे होते हैं जो फोन या लैपटॉप से कनेक्ट होकर केवल एक पोर्टेबल मॉनिटर की तरह स्क्रीन सामने प्रोजेक्ट करते हैं, जिससे यूजर को स्क्रीन की ओर गर्दन झुकाने की जरूरत नहीं पड़ती। दूसरी श्रेणी में रे-बैन मेटा जैसे उत्पाद आते हैं, जिनमें फोटो और वीडियो कैप्चर करने के लिए कैमरा और बातचीत के लिए एआई असिस्टेंट दिया गया होता है। इसके अलावा गूगल और सैमसंग की तरफ से डिस्प्ले वाले मॉडल भी सामने आ रहे हैं, जो बातचीत के दौरान रियल-टाइम कैप्शन, अनुवाद और नेविगेशन निर्देश स्क्रीन पर दिखाते हैं।
मिक्स्ड रियलिटी चश्मे इन सबसे एक कदम आगे बढ़कर वर्चुअल और ऑगमेंटेड दुनिया को आपस में जोड़ते हैं। यह अनुभव काफी हद तक एप्पल विज़न प्रो या मेटा क्वेस्ट जैसे बड़े हेडसेट्स जैसा होता है, लेकिन एक बेहद हल्के और स्लिम डिजाइन में। इसी श्रेणी में स्नैप ने भी स्पेक्स नाम से अपने चश्मे पेश किए हैं, जिनकी कीमत 2,195 डॉलर है और इनकी शिपिंग भी इसी साल बाद में शुरू होने वाली है।
हार्डवेयर डिजाइन, कंप्यूट पक और डिस्प्ले क्षमता
डिजाइन के लिहाज से न तो मेटा और न ही एक्सरियल के फ्रेम को सामान्य धूप के चश्मे जैसा माना जा सकता है। मेटा का फ्रेम देखने में किसी वीआर हेडसेट के सामने वाले हिस्से जैसा प्रतीत होता है। दूसरी ओर, एक्सरियल ऑरा का डिजाइन चश्मे के पारंपरिक स्वरूप के ज्यादा करीब है। हालांकि यह थोड़ा भारी-भरकम है, लेकिन स्नैप स्पेक्स जितना मोटा नहीं है। दोनों ही उपकरणों में एक अलग वायर्ड कंप्यूट पक दिया गया है, जिसे यूजर को अपनी जेब में रखना होता है। इसी कॉम्पैक्ट पक के भीतर डिवाइस का प्रोसेसर, मेमोरी और जरूरी कंप्यूटिंग हार्डवेयर मौजूद रहता है।
मेटा वीआर ग्लासेज में 5के माइक्रो-ओएलईडी स्क्रीन का इस्तेमाल किया गया है, जो बेहद शानदार और स्पष्ट विजुअल प्रदान करती है। यह डिवाइस उन सभी सेवाओं और ऐप्स को चलाने में सक्षम है जो पहले से मेटा के क्वेस्ट प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं। इसके अलावा इसमें अतिरिक्त कैमरे दिए गए हैं, जिनमें से दो कैमरे सीधे यूजर की गोद की तरफ नीचे की ओर देखते हैं। इन कैमरों की मदद से इसका हैंड-ट्रैकिंग फीचर बेहद सटीक तरीके से काम करता है। वर्चुअल कीबोर्ड पर टाइपिंग का अनुभव इसमें काफी सहज रहता है, जबकि एक्सरियल ऑरा पर टाइप करते समय एक-एक अक्षर ढूंढकर प्रेस करने जैसा अहसास होता है।
सॉफ्टवेयर तालमेल और दुनिया को देखने का नजरिया
एक्सरियल ऑरा एंड्रॉइड के आधार पर बने किसी भी ऐप को चलाने की क्षमता रखता है। हालांकि विशाल एंड्रॉइड इकोसिस्टम के कारण सभी ऐप्स मिक्स्ड रियलिटी इंटरफेस के साथ सही तरीके से सिंक नहीं हो पाते, जिससे कुछ मौकों पर ऐप तालमेल में कमियां दिखाई देती हैं। फिनिशिंग और पॉलिश के मामले में भी मेटा का सिस्टम ज्यादा सुव्यवस्थित महसूस होता है।
इसके बावजूद, एक्सरियल ऑरा का सबसे मजबूत पहलू चलते-फिरते इसका इस्तेमाल करना है। ऑरा में रियल-वर्ल्ड पासथ्रू लेंस दिए गए हैं। इसका मतलब यह है कि जब स्क्रीन बंद होती है, तो यूजर बिल्कुल सामान्य चश्मे की तरह सामने की असली दुनिया को देख सकता है। इसके विपरीत, मेटा वीआर ग्लासेज में वीडियो पासथ्रू तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसके कारण कभी-कभी बाहरी दृश्य थोड़ा धुंधला दिखाई दे सकता है। बैठकर कंटेंट देखने, मल्टी-मॉनिटर वर्कस्पेस प्रोजेक्ट करने या काम करने के लिए मेटा वीआर ग्लासेज अधिक उपयुक्त लगते हैं, जबकि चलते-फिरते आसपास के माहौल पर नजर रखने के मामले में एक्सरियल ऑरा बेहतर साबित होता है।



















