समोसे, कचौड़ी या रोज की रोटी के साथ परोसी जाने वाली वही पुरानी टमाटर की लाल चटनी या इमली की खट्टी-मीठी चटनी अगर आपको बोर करने लगी है, तो खानपान के शौकीनों के लिए एक नया विकल्प सामने आया है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अंतर्गत आने वाले लवकुश नगर स्थित प्रेम पैलेस होटल एवं बब्बी रेस्टोरेंट में खाने के शौकीनों को लुभाने के लिए एक बेहद अनोखा प्रयोग किया गया है। यहाँ पारंपरिक चटनियों को पीछे छोड़ते हुए हरे पालक और अमरूद के मेल से एक खास चटनी तैयार की गई है, जिसका चटपटा स्वाद स्थानीय लोगों को खूब भा रहा है। इस चटनी की खासियत यह भी है कि इसकी सामग्री बेहद सामान्य है और इसे घर की रसोई में भी बड़ी आसानी से तैयार किया जा सकता है।
पारंपरिक मेन्यू से हटकर कुछ अलग करने की सोच
प्रेम पैलेस होटल एवं रेस्टोरेंट का संचालन करने वाले बब्बी चौरसिया बताते हैं कि उनके प्रतिष्ठान में लंबे समय से आम दुकानों की तरह केवल टमाटर वाली तीखी चटनी और पारंपरिक खट्टी-मीठी चटनी ही ग्राहकों को परोसी जाती रही थी। समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि नियमित आने वाले ग्राहकों को जायके में कुछ नयापन चाहिए। पालक अमूमन हर घर में सब्जी या साग के रूप में खाया जाता है, लेकिन इसके पत्तों का इस्तेमाल चटपटी चटनी में मुख्य सामग्री के रूप में करने की योजना बनाई गई। इसी सोच के तहत रेस्टोरेंट में पहली बार पालक आधारित इस खास चटनी को पेश किया गया, जिसे ग्राहकों ने हाथों-हाथ लिया।
हलवाई अरविंद का नया प्रयोग
बब्बी चौरसिया के रेस्टोरेंट में नाश्ते के तौर पर समोसे, कचौरी, मंगोड़ी और गर्मागर्म आलू बड़ा तैयार किए जाते हैं। इन तले हुए पारंपरिक स्नैक्स के स्वाद को दोगुना करने के मकसद से हलवाई अरविंद ने यह खास नुस्खा ईजाद किया। उन्होंने पालक के साथ अमरूद का संतुलित मेल बिठाकर एक नई रेसिपी गढ़ी। हालांकि, इस स्वादिष्ट चटनी की शुरुआत कराने के बाद हलवाई अरविंद फिलहाल पितृ श्राद्ध के सिलसिले में अवकाश पर गए हुए हैं, लेकिन उनकी बनाई रेसिपी की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।
सिलबट्टे पर पिसती है यह खास पालक चटनी
इस चटनी को बनाने का तरीका भी काफी पारंपरिक और सीधा है। इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले पालक के एकदम ताजे हरे पत्तों को साफ करके सिलबट्टे पर बारीक पीसा जाता है। इसके बाद इसमें अमरूद के टुकड़े, ताजा अदरक और लहसुन की कलियां मिलाई जाती हैं। अदरक और लहसुन का अनुपात बहुत सधा हुआ रखा जाता है, ताकि उनका तीखापन पालक और अमरूद के प्राकृतिक स्वाद को दबा न दे। इसके बाद मिश्रण में स्वादानुसार सादा नमक, हरी मिर्च और कटा हुआ हरा धनिया मिलाया जाता है। स्वाद को अधिक समृद्ध और मलाईदार बनाने के लिए इसमें थोड़ा कद्दूकस किया हुआ पनीर भी डाला जा सकता है। यदि पीसते समय चटनी अधिक गाढ़ी हो जाए, तो जरूरत के मुताबिक थोड़ा सा पानी मिलाकर इसकी सही बनावट हासिल की जाती है।
नाश्ते के साथ-साथ भोजन की थाली में भी बनी पसंद
आमतौर पर भारतीय घरों और दुकानों में चटनी को सिर्फ सुबह या शाम के नाश्ते और तले हुए स्नैक्स के साथ ही सीमित रखा जाता है। लेकिन बब्बी चौरसिया का कहना है कि यह नई पालक-अमरूद चटनी सिर्फ समोसे, कचौड़ी, मंगोड़ी या आलू बड़े तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे सादी रोटी या पराठे के साथ भी बड़े चाव से खाया जा सकता है। छतरपुर के लवकुश नगर में अब तक लोग सिर्फ टमाटर और मीठी चटनी का ही जायका लेते थे, लेकिन इस नए और सेहतमंद प्रयोग के बाद यह अनोखी चटनी नाश्ते से लेकर खाने की थाली तक स्थानीय लोगों की पहली पसंद बन चुकी है।



















