ग्रामीण भारत के विकास की दिशा तब बदलती है जब जमीनी स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और आधुनिक तकनीक का सीधा तालमेल बैठता है. गांव के बच्चे को आधुनिक कक्षाओं में विज्ञान और गणित सीखने का अवसर मिले, होनहार छात्रों को इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी परीक्षाओं की तैयारी मुफ्त में मिले, ग्रामीण नौजवानों को उद्योग की मांग के अनुसार रोजगारपरक हुनर मिले और महिलाएं घर की दहलीज से निकलकर सफल कारोबारी बनें, इन्हीं प्राथमिकताओं को केंद्र में रखकर हिन्दुस्तान जिंक ने अपनी सामुदायिक विकास परियोजनाओं को जमीन पर उतारा है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इन समन्वित सामाजिक प्रयासों ने 4,100 से ज्यादा गांवों में रहने वाले 26 लाख से अधिक लोगों के दैनिक जीवन और आर्थिक संभावनाओं पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव डाला है. यह सीएसआर मॉडल केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित रहने के बजाय प्राथमिक शिक्षा, उन्नत तकनीकी शिक्षण, युवा कौशल, महिला आत्मनिर्भरता, प्राथमिक चिकित्सा, स्वच्छ पेयजल, खेलकूद और हरित ऊर्जा जैसे अनेक बुनियादी आयामों को एक साथ कवर करता है.
आंगनवाड़ियों का कायाकल्प और नंद घर के जरिए प्राथमिक संबल
सामुदायिक उत्थान की मजबूत नींव बच्चों के शुरुआती पोषण और महिलाओं की देखभाल से तैयार होती है. इस दिशा में नंद घर पहल के तहत पारंपरिक ग्रामीण आंगनवाड़ी केंद्रों को पूरी तरह से आधुनिक, सुरक्षित और बच्चों के अनुकूल परिसरों में बदला जा रहा है. इन सुसज्जित केंद्रों पर न केवल छोटे बच्चों की प्राथमिक अनौपचारिक शिक्षा पर ध्यान दिया जाता है, बल्कि पौष्टिक आहार और नियमित स्वास्थ्य निगरानी की पुख्ता व्यवस्था भी की जाती है. इसके साथ ही माताओं और ग्रामीण महिलाओं के लिए भी स्वास्थ्य परामर्श और सीखने के नए रास्ते खोले जाते हैं. इस सघन प्रयास के तहत अब तक 4,679 नंद घर तैयार किए जा चुके हैं, जो ग्रामीण अंचलों में प्रारंभिक बाल विकास और मातृत्व सहयोग के सशक्त केंद्र बनकर उभरे हैं.
सरकारी स्कूलों में आधुनिक तकनीक: एआई, एआर और वीआर से लैस लैब
शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण बदलाव लाने के उद्देश्य से शिक्षा संबल कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है, जिसका सीधा केंद्र बिंदु सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं हैं. अक्सर ग्रामीण स्कूलों में विज्ञान, अंग्रेजी और गणित जैसे विषयों को कठिन माना जाता है, इसलिए इस पहल में गतिविधि आधारित शिक्षण और व्यावहारिक प्रयोगों के माध्यम से इन विषयों की गहरी समझ विकसित की जाती है. शिक्षा को डिजिटल युग के अनुरूप बनाने के लिए सरकारी स्कूलों में 4 एआई सक्षम एसटीईएम लैब स्थापित की गई हैं, जिनमें ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी जैसे अत्याधुनिक टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में इस शिक्षा संबल अभियान से 76 से अधिक सरकारी स्कूलों के 13,000 से ज्यादा विद्यार्थियों को सीधा शैक्षणिक लाभ प्राप्त हुआ है.
ऊंची उड़ान: ग्रामीण प्रतिभाओं को आईआईटी की राह
आर्थिक तंगी के कारण अक्सर दूरदराज के प्रतिभाशाली छात्र देश की शीर्ष इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ रह जाते हैं. इसी खाई को पाटने के लिए ऊंची उड़ान कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है. इस पहल के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन करके उन्हें लंबी अवधि की गहन कोचिंग, व्यक्तिगत मेंटरिंग और आवासीय सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं. इस समर्पित मार्गदर्शन का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण और संसाधनविहीन क्षेत्रों के युवा भी आईआईटी और देश के अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों की प्रवेश परीक्षा में सफल होकर अपना भविष्य संवार सकें.
समाधान परियोजना: 33 हजार किसान परिवारों की खेती में नवाचार
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि और पशुपालन को मजबूती देने के लिए कंपनी द्वारा समाधान कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम के जरिए परंपरागत खेती के तौर-तरीकों को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों, जलवायु अनुकूल तकनीकों और उन्नत पशुपालन से जोड़ा जा रहा है. इसका उद्देश्य कम लागत में उत्पादन बढ़ाना और मिट्टी की उर्वरता को सुरक्षित रखना है. वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में 33,000 से अधिक किसान परिवारों को समाधान कार्यक्रम से सीधा लाभ मिला है और इसके दायरे में करीब 5,500 एकड़ कृषि भूमि को शामिल कर उन्नत खेती के तरीकों को लागू किया गया है.
जिंक कौशल: 10 हजार युवाओं को ट्रेनिंग और 83 फीसदी प्लेसमेंट
ग्रामीण युवाओं को बेरोजगारी के चक्र से बाहर निकालने के लिए जिंक कौशल परियोजना एक अहम माध्यम बनी है. इसके तहत युवाओं को स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप वोकेशनल, तकनीकी और प्रोफेशनल विधाओं में सघन प्रशिक्षण दिया जाता है. राजस्थान और उत्तराखंड राज्यों में अब तक 10,000 से अधिक युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षित किया जा चुका है. सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि प्रशिक्षित युवाओं में 83 प्रतिशत को सफलतापूर्वक नौकरियों और आजीविका के अवसरों से जोड़कर कार्यस्थलों पर प्लेसमेंट दिलाया गया है.
सखी अभियान: 25 हजार महिलाएं आत्मनिर्भर, करोड़ों का कारोबार
ग्रामीण समाज में वास्तविक बदलाव तब दिखता है जब महिलाएं वित्तीय निर्णयों में अग्रणी भूमिका निभाती हैं. सखी कार्यक्रम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं में बचत की आदत, आसान ऋण उपलब्धता, व्यावसायिक हुनर और नेतृत्व क्षमता का विकास किया गया है. इस मंच से 25,000 से अधिक महिलाएं जुड़कर सशक्त बनी हैं. संस्थागत वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए क्रेडिट लिंकेज के माध्यम से 2,000 सदस्यों के लिए लगभग 6 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई है. महिलाओं को केवल बुनियादी हुनर सिखाने तक सीमित न रखकर उन्हें सक्रिय व्यावसायिक उपक्रमों का मालिक बनाया गया है. इसके तहत 426 महिलाएं 18 सूक्ष्म उद्यमों और 5 किसान इनपुट दुकानों का सफल संचालन कर रही हैं, जिन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 11.34 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर ग्रामीण महिला उद्यमिता की नई मिसाल पेश की है.
गांव के मैदानों से राष्ट्रीय टीम तक: जिंक फुटबॉल एकेडमी की सफलता
खेलकूद और प्रतिभा निखारने के क्षेत्र में जिंक फुटबॉल एकेडमी ग्रामीण युवाओं के लिए एक सुनहरा मंच साबित हुई है. यह एकेडमी युवा फुटबॉल खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खेल प्रशिक्षण के साथ-साथ उत्कृष्ट औपचारिक शिक्षा और संपूर्ण व्यक्तिगत विकास की सुविधाएं प्रदान करती है. अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ यानी एआईएफएफ से थ्री स्टार मान्यता प्राप्त यह एकेडमी कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार कर चुकी है. इसी प्रशिक्षण व्यवस्था की बदौलत खिलाड़ी सोनम घोष का चयन भारत की अंडर-17 राष्ट्रीय टीम के लिए हुआ है. इसके अलावा, जमीनी स्तर पर ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देने वाले विभिन्न आयोजनों के माध्यम से वित्त वर्ष 2025-26 में 53,000 लोगों तक सीधी पहुंच बनाई गई है.
स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल और बुनियादी ढांचे का विस्तार
ग्रामीण जीवनस्तर को सुधारने के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता पर व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है. स्वास्थ्य सेवा पहल के अंतर्गत 5 मोबाइल हेल्थ वैन के जरिए 134 गांवों में 2,530 ओपीडी सत्र आयोजित किए गए, जिनका लाभ 72,628 ग्रामीण नागरिकों को मिला. इसके अलावा संचालित 6 अस्पतालों के माध्यम से 1.33 लाख लोगों को आवश्यक चिकित्सीय सेवाएं और उपचार उपलब्ध कराया गया. स्वच्छ पेयजल की समस्या से निपटने के लिए आरओ एटीएम और जल टैंकरों की व्यवस्था की गई. आरओ एटीएम के माध्यम से 11.13 मिलियन लीटर पीने योग्य शुद्ध पानी वितरित किया गया, जिससे 80 से अधिक गांवों के 58,000 से ज्यादा लोगों को जल सुरक्षा मिली. ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ करने के क्रम में 6 मॉडल स्कूल तैयार किए गए, 47 स्कूलों में जरूरी निर्माण और मरम्मत कार्य संपन्न हुए और 4 मॉडल गांव विकसित किए गए. साथ ही पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सुरक्षा अभियानों ने 6.1 लाख लोगों को जागरूक किया. पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण सड़कों पर 530 से अधिक सोलर स्ट्रीट और हाई मास्ट लाइटें तथा 1,340 से अधिक एलईडी लाइटें स्थापित की गई हैं.























