हरियाणा के नूंह जिले की एक विशेष अदालत ने 2019 के एक सनसनीखेज मामले में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में तेजी से इंसाफ दिलाने के मकसद से बनी फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट ने 17 साल के एक किशोर के साथ अप्राकृतिक यौन शोषण और उसकी हत्या के आरोप में दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 45 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
क्या था 2019 का मामला
31 अक्टूबर 2019 की रात गांव दिहाना का रहने वाला 17 वर्षीय एक किशोर अचानक अपने घर से गायब हो गया था। परिवार को देर रात तक उसका कोई सुराग नहीं मिला। अगली सुबह गांव में ही एक भूसे वाले घर में उसका शव फंदे से लटका मिला, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। किशोर के पिता इस्लाम ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि कुछ लोगों ने पहले उनके बेटे के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए और उसके बाद उसकी हत्या कर दी। आरोप है कि हत्या के बाद शव को फंदे से लटकाकर मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। पिता की शिकायत और शुरुआती जांच के आधार पर थाना सदर नूंह में 11 नवंबर 2019 को मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस जांच में मिले सबूत
मामला दर्ज होने के बाद नूंह पुलिस ने जांच शुरू की और पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वैज्ञानिक सबूत तथा अन्य जरूरी साक्ष्य जुटाए। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पॉक्सो एक्ट के साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 302, यानी हत्या, और धारा 201, यानी सबूत मिटाने की कोशिश, के तहत भी आरोपी के खिलाफ मामला बनता पाया गया। पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश किया, जिसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई।
अदालत ने सुनाई 20 साल कठोर कारावास की सजा
लंबी सुनवाई और तमाम गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने पाया कि पुलिस द्वारा जुटाए गए सबूत आरोपी के खिलाफ मामला साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास और 45 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर दोषी तय समय में जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना पड़ेगा। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, पॉक्सो, डॉ. आशु संजीव टिंजन की अदालत ने सुनाया।



















