हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल व्यासपुर में इन दिनों एक अनूठी शैक्षणिक मिसाल देखने को मिल रही है। स्कूल परिसर में पेड़-पौधों की देखभाल करने वाले माली तरुण इंदौरा अब 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को कैमिस्ट्री की बारीकियाँ समझा रहे हैं। जब स्कूल में विज्ञान संकाय के बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर संकट खड़ा हुआ, तब तरुण ने खुद आगे आकर ब्लैकबोर्ड की कमान संभाली। वह प्रतिदिन सुबह अपने निर्धारित समय पर स्कूल के बगीचों में माली का काम पूरा करते हैं और उसके बाद चॉक उठाकर सीधे कक्षाओं में रसायन विज्ञान पढ़ाने पहुँच जाते हैं।
शिक्षक के तबादले से खड़ा हुआ था संकट
स्कूल में विज्ञान संकाय शुरू किए जाने के बाद विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कैमिस्ट्री लेक्चरर की तैनाती की गई थी। कुछ समय बाद उस शिक्षक को पंचकूला के एक अन्य स्कूल में डेपुटेशन पर भेज दिया गया। अचानक विषय विशेषज्ञ के चले जाने से कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों के सामने बड़ा गतिरोध पैदा हो गया। बोर्ड कक्षाओं की तैयारी और आगामी परीक्षाओं को लेकर छात्र और उनके अभिभावक परेशान होने लगे। शिक्षक के अभाव में पढ़ाई का नुकसान रोकने के लिए स्कूल प्रशासन को तत्काल किसी वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता महसूस हो रही थी।
उच्च योग्यता और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ
तरुण इंदौरा केवल एक साधारण कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि उनके पास शिक्षण की उच्च योग्यताएँ मौजूद हैं। उन्होंने नॉन मेडिकल स्ट्रीम से पढ़ाई की है और उनके पास एमए तथा बीएड की डिग्री है। इसके अलावा उन्होंने सीटीईटी और टीजीटी स्तर की एचटीईटी परीक्षा पास की है, साथ ही वह दो बार यूजीसी नेट भी क्वालीफाई कर चुके हैं। तरुण का सपना हमेशा से शिक्षक बनने का रहा था और उन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के तुरंत बाद ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था। उनके पिता सेना में सेवा दे चुके हैं और परिवार में सबसे बड़ा बेटा होने के कारण उन्होंने घर की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। सरकारी नौकरी के तौर पर माली का पद मिलने के बावजूद उनके भीतर का शिक्षक हमेशा जीवित रहा। इससे पहले वह आरएस बाल मंदिर इसराना में भी अध्यापन का कार्य कर चुके थे।
आंकलन के बाद मिली कक्षा की कमान
जुलाई 2026 में स्कूल की प्रिंसिपल मीना कुमारी ने परिसर में उपलब्ध कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यताओं और उनकी विषयगत दक्षता का मूल्यांकन किया। इस आंतरिक समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि माली पद पर कार्यरत तरुण इंदौरा कैमिस्ट्री पढ़ाने के लिए पूरी तरह योग्य और अनुभवी हैं। इसके बाद तरुण से विद्यार्थियों की एक ट्रायल क्लास लेने को कहा गया। उन्होंने कठिन वैज्ञानिक सूत्रों और रासायनिक प्रतिक्रियाओं को अत्यंत सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। विद्यार्थियों से मिले सकारात्मक फीडबैक के बाद प्रशासन ने उन्हें नियमित रूप से पढ़ाने की अनुमति दे दी। वर्तमान में वह लगभग तीन दर्जन विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान का अध्ययन करा रहे हैं। सितंबर की आंतरिक परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लगभग 20 प्रतिशत पाठ्यक्रम सफलता से पूरा भी करा दिया है।
विद्यार्थियों और प्रशासन ने की सराहना
कक्षा की छात्रा वंशिका ने बताया कि तरुण सर कठिन से कठिन टॉपिक को भी आसान भाषा और दैनिक जीवन के उदाहरणों से समझाते हैं। पाठ पूरा कराने के बाद वह नियमित अंतराल पर टेस्ट भी आयोजित करते हैं जिससे हमारी तैयारी मजबूत हो रही है। उनके आने के बाद से हमारी पढ़ाई की सारी रुकावटें पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। स्कूल के वाइस प्रिंसिपल लवनेश ने पुष्टि की कि तरुण विद्यालय में माली के पद पर नियुक्त हैं, लेकिन उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड पूरी तरह नॉन मेडिकल का है। वह प्रशिक्षित शिक्षक हैं और बगीचे की देखभाल से लेकर क्लासरूम की पढ़ाई तक दोनों दायित्वों को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं।






















