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बिल्डर फ्लैट देने में करे देरी तो कहां और कैसे करें शिकायत, जानिए खरीदारों के कानूनी अधिकारहरियाणा
17 सित॰ 2026, 12:06 pm (9 घंटे पहले)· 1

बिल्डर फ्लैट देने में करे देरी तो कहां और कैसे करें शिकायत, जानिए खरीदारों के कानूनी अधिकार

फरीदाबाद में बिल्डर द्वारा फ्लैट का कब्जा समय पर न मिलने या देरी होने पर खरीदार कंज्यूमर कोर्ट और रेरा का रुख कर सकते हैं। प्रॉपर्टी खरीदने से पहले रेरा रजिस्ट्रेशन और जरूरी दस्तावेजों की जांच करना बेहद आवश्यक है।

अपना आशियाना बनाने का ख्वाब हर आम इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है। इसके लिए लोग अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा वर्षों तक जोड़ते हैं और पाई-पाई निवेश करते हैं। मगर कई बार घर बुक कराने या खरीदने के बाद भी बिल्डर तय समयसीमा के भीतर फ्लैट का कब्जा नहीं सौंपते हैं, जिसके चलते खरीदारों को अनिश्चितकाल तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में खरीदारों के मन में कई गंभीर सवाल उठते हैं कि यदि समय पर पजेशन न मिले तो मुआवजे का दावा कैसे किया जाए, क्या पैसे पूरी तरह रिफंड मिल सकते हैं और सबसे अहम बात यह है कि आखिर इस मनमानी के खिलाफ शिकायत कहां दर्ज कराई जाए। इसके अलावा रेरा में जाने से पहले किन कागजातों की जरूरत पड़ती है और प्रॉपर्टी खरीदने से पूर्व किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, इन सभी कानूनी पहलुओं को समझना बहुत जरूरी है।

कब्जा न मिलने पर कहां करें शिकायत

यदि कोई बिल्डर वादा करने के बावजूद तय समय पर फ्लैट या मकान का पजेशन देने में असफल रहता है, तो प्रभावित खरीदार के पास न्याय पाने के लिए कंज्यूमर कोर्ट यानी उपभोक्ता अदालत और रेरा यानी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का दरवाजा खटखटाने का विकल्प होता है। फरीदाबाद के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के एडवोकेट पुरुषोत्तम भारद्वाज बताते हैं कि पजेशन मिलने में देरी होने पर या फिर संपत्ति से जुड़ी किसी अन्य गड़बड़ी की स्थिति में खरीदार कानूनी मंच का सहारा ले सकते हैं। रेरा से जुड़े मामलों की सुनवाई या कार्रवाई के लिए कई बार पंचकूला तक जाना पड़ सकता है, जबकि कंज्यूमर कोर्ट देश के हर जिले में उपलब्ध होता है और फरीदाबाद में भी इसकी पूरी सुविधा स्थानीय स्तर पर मिल जाती है।

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रिफंड और मुआवजे के क्या हैं नियम

यदि हालात ऐसे बन जाएं कि बिल्डर किसी भी सूरत में खरीदार को फ्लैट का कब्जा सौंपने की स्थिति में नहीं है, तो ऐसी दशा में पैसे वापस मिलने की पूरी संभावना बनती है। एडवोकेट पुरुषोत्तम भारद्वाज के अनुसार ऐसी विकट परिस्थिति में खरीदार को जमा की गई पूरी रकम ब्याज समेत वापस मिल सकती है। इस राहत को पाने के लिए पीड़ित खरीदार को तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अपनी शिकायत दर्ज करवानी होती है। बिल्डर की इस प्रकार की लापरवाही के खिलाफ रेरा में औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जहां कानून खरीदार के हितों की रक्षा का प्रावधान करता है।

रेरा में शिकायत के लिए जरूरी दस्तावेज

रेरा के मंच पर अपनी शिकायत को मजबूती से रखने के लिए खरीदार के पास संपत्ति से जुड़े तमाम पुख्ता कागजात होने अनिवार्य हैं। पुरुषोत्तम भारद्वाज का कहना है कि बिल्डर और खरीदार के बीच हुआ मुख्य एग्रीमेंट सबसे अहम दस्तावेजों की सूची में सबसे ऊपर आता है। इसके अलावा फ्लैट, प्लॉट या कमर्शियल यूनिट खरीदने से जुड़े अन्य सभी लेनदेन और रसीदें भी आपके पास होनी चाहिए। इसलिए संपत्ति खरीदते समय मिलने वाले हर एक कागज को सुरक्षित संभालकर रखना चाहिए। फ्लैट खरीदने की शुरुआत करने से पहले ही यह बेहद जरूरी है कि खरीदार संबंधित बिल्डर के रेरा रजिस्ट्रेशन की सत्यता की पूरी जांच कर ले। पुरुषोत्तम भारद्वाज बताते हैं कि रेरा का मूल उद्देश्य ही फ्लैट खरीदारों को किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या मनमानी से महफूज रखना है, इसलिए जमीन के मालिकाना हक और उससे जुड़े अन्य कागजातों की बारीकी से पड़ताल करना समझदारी है।

बड़ी रकम लगाने से पहले कानूनी सलाह

आज के दौर में फरीदाबाद जैसे शहरों में अचल संपत्ति यानी प्रॉपर्टी खरीदना कोई छोटा सौदा नहीं बल्कि जीवनभर की बड़ी पूंजी का निवेश होता है। लोग इसमें अपनी मेहनत की कमाई के लाखों और करोड़ों रुपये झोंक देते हैं। ऐसे में अपनी पूंजी को जोखिम में डालने से पहले एक-एक दस्तावेज की कानूनी रूप से जांच परख कर लेना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। एडवोकेट पुरुषोत्तम भारद्वाज की स्पष्ट सलाह है कि किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने से पहले किसी अनुभवी वकील से कानूनी राय जरूर लेनी चाहिए। ऐसा करने से भविष्य में आने वाली किसी भी प्रकार की कानूनी उलझन, धोखेबाजी या मानसिक परेशानी से बचने में काफी मदद मिल सकती है और खरीदार की गाढ़ी कमाई सुरक्षित रह सकती है।

सवाल-जवाब

बिल्डर द्वारा फ्लैट का कब्जा देने में देरी होने पर खरीदार कहां शिकायत कर सकता है?
खरीदार कंज्यूमर कोर्ट या रेरा में बिल्डर के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है।
क्या कब्जा न मिलने की स्थिति में पैसे वापस मिल सकते हैं?
हाँ, यदि बिल्डर फ्लैट देने में असमर्थ रहता है तो खरीदार को ब्याज के साथ पूरी रकम रिफंड मिलने की संभावना होती है।
रेरा में शिकायत दर्ज कराने के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज कौन सा है?
बिल्डर और खरीदार के बीच निष्पादित किया गया एग्रीमेंट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
फरीदाबाद में कंज्यूमर कोर्ट की सुविधा कहां उपलब्ध है?
कंज्यूमर कोर्ट की सुविधा हर जिले में उपलब्ध होती है और फरीदाबाद में भी इसका स्थानीय कार्यालय मौजूद है।
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले किस बात की मुख्य रूप से जांच करनी चाहिए?
खरीदार को बिल्डर के रेरा रजिस्ट्रेशन और जमीन से जुड़े सभी कानूनी दस्तावेजों की पूरी जांच करनी चाहिए।
रेरा से जुड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए फरीदाबाद के लोगों को कहाँ जाना पड़ सकता है?
रेरा से जुड़ी औपचारिक कार्रवाई के सिलसिले में पंचकूला जाना पड़ सकता है।
प्रॉपर्टी में लाखों-करोड़ों रुपये लगाने से पहले किसकी सलाह लेना उचित है?
बड़ी रकम निवेश करने से पहले किसी अनुभवी वकील से कानूनी सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·7 घंटे पहले

रियल एस्टेट क्षेत्र में डिलीवरी में देरी न केवल घर खरीदारों की जीवनभर की बचत को अनिश्चितता में डालती है, बल्कि क्षेत्र में खुदरा निवेश के प्रवाह को भी प्रभावित करती है। यद्यपि रेरा और उपभोक्ता अदालतें वित्तीय रिफंड और ब्याज का स्पष्ट कानूनी अधिकार देती हैं, फिर भी जिला और राज्य स्तर पर न्यायिक प्रक्रियाओं में लगने वाला समय खरीदारों की पूंजी को लंबे समय तक लॉक रखता है। रियल एस्टेट बाजार में निवेशकों और खरीदारों का भरोसा मजबूत बनाए रखने के लिए सख्त जवाबदेही और तय समय सीमा के भीतर कानूनी फैसलों का क्रियान्वयन बेहद जरूरी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 घंटे पहले

रेरा जैसे कानूनों का मुख्य उद्देश्य लोक नीति और शासन के स्तर पर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना था। हालांकि, नीतिगत उद्देश्यों और धरातलीय क्रियान्वयन के बीच का यह अंतर प्रशासनिक तंत्र की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। जब तक राज्य सरकारें अर्ध-न्यायिक निकायों (जैसे रेरा और उपभोक्ता फोरम) के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत कर समयबद्ध न्याय सुनिश्चित नहीं करतीं, तब तक इस तरह के विधायी सुधारों का पूर्ण लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुंच पाएगा। बेहतर शहरी शासन और संस्थागत विश्वास बनाए रखने के लिए कठोर नीतिगत अमल अनिवार्य है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 घंटे पहले

बिल्डर द्वारा पजेशन में देरी केवल नागरिक अनुबंध का उल्लंघन नहीं है, बल्कि कई मामलों में यह धोखाधड़ी और अमानत में खयानत जैसी स्थिति पैदा करती है। रेरा और उपभोक्ता अदालतें राहत तो प्रदान करती हैं, लेकिन न्यायिक प्रक्रियाओं में होने वाला विलंब खरीदारों की मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना बढ़ा देता है। कानूनी लड़ाई में जीत के लिए शुरुआती स्तर पर दस्तावेजी साक्ष्यों की मजबूती ही खरीदार का सबसे बड़ा हथियार बनती है। ऐसे मामलों में सिविल उपायों के साथ-साथ गंभीर अनियमितताओं पर सख्त कानूनी जवाबदेही तय होना आवश्यक है ताकि रियल एस्टेट क्षेत्र में जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास बना रहे।

Rohan Verma@rohan-verma·8 घंटे पहले

करण की बात बिल्कुल सटीक है। ज़मीनी स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई और प्रोजेक्ट निगरानी की कमी के कारण खरीदारों को वर्षों तक कानूनी चक्कर काटने पड़ते हैं। रेरा और उपभोक्ता अदालतों का ढांचा तब सक्रिय होता है जब नुकसान हो चुका होता है। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय प्राधिकरण और टाउन प्लानिंग विभाग निर्माण की प्रगति की अग्रिम निगरानी करें। यदि परियोजनाओं की वित्तीय और भौतिक समीक्षा समय पर हो, तो बिल्डरों की इस मनमानी पर शुरुआती चरण में ही रोक लगाई जा सकती है, जिससे आम नागरिक अपनी जमा-पूंजी गंवाने से बच सकेंगे।

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