अपना आशियाना बनाने का ख्वाब हर आम इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है। इसके लिए लोग अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा वर्षों तक जोड़ते हैं और पाई-पाई निवेश करते हैं। मगर कई बार घर बुक कराने या खरीदने के बाद भी बिल्डर तय समयसीमा के भीतर फ्लैट का कब्जा नहीं सौंपते हैं, जिसके चलते खरीदारों को अनिश्चितकाल तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में खरीदारों के मन में कई गंभीर सवाल उठते हैं कि यदि समय पर पजेशन न मिले तो मुआवजे का दावा कैसे किया जाए, क्या पैसे पूरी तरह रिफंड मिल सकते हैं और सबसे अहम बात यह है कि आखिर इस मनमानी के खिलाफ शिकायत कहां दर्ज कराई जाए। इसके अलावा रेरा में जाने से पहले किन कागजातों की जरूरत पड़ती है और प्रॉपर्टी खरीदने से पूर्व किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, इन सभी कानूनी पहलुओं को समझना बहुत जरूरी है।
कब्जा न मिलने पर कहां करें शिकायत
यदि कोई बिल्डर वादा करने के बावजूद तय समय पर फ्लैट या मकान का पजेशन देने में असफल रहता है, तो प्रभावित खरीदार के पास न्याय पाने के लिए कंज्यूमर कोर्ट यानी उपभोक्ता अदालत और रेरा यानी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का दरवाजा खटखटाने का विकल्प होता है। फरीदाबाद के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के एडवोकेट पुरुषोत्तम भारद्वाज बताते हैं कि पजेशन मिलने में देरी होने पर या फिर संपत्ति से जुड़ी किसी अन्य गड़बड़ी की स्थिति में खरीदार कानूनी मंच का सहारा ले सकते हैं। रेरा से जुड़े मामलों की सुनवाई या कार्रवाई के लिए कई बार पंचकूला तक जाना पड़ सकता है, जबकि कंज्यूमर कोर्ट देश के हर जिले में उपलब्ध होता है और फरीदाबाद में भी इसकी पूरी सुविधा स्थानीय स्तर पर मिल जाती है।
रिफंड और मुआवजे के क्या हैं नियम
यदि हालात ऐसे बन जाएं कि बिल्डर किसी भी सूरत में खरीदार को फ्लैट का कब्जा सौंपने की स्थिति में नहीं है, तो ऐसी दशा में पैसे वापस मिलने की पूरी संभावना बनती है। एडवोकेट पुरुषोत्तम भारद्वाज के अनुसार ऐसी विकट परिस्थिति में खरीदार को जमा की गई पूरी रकम ब्याज समेत वापस मिल सकती है। इस राहत को पाने के लिए पीड़ित खरीदार को तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अपनी शिकायत दर्ज करवानी होती है। बिल्डर की इस प्रकार की लापरवाही के खिलाफ रेरा में औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जहां कानून खरीदार के हितों की रक्षा का प्रावधान करता है।
रेरा में शिकायत के लिए जरूरी दस्तावेज
रेरा के मंच पर अपनी शिकायत को मजबूती से रखने के लिए खरीदार के पास संपत्ति से जुड़े तमाम पुख्ता कागजात होने अनिवार्य हैं। पुरुषोत्तम भारद्वाज का कहना है कि बिल्डर और खरीदार के बीच हुआ मुख्य एग्रीमेंट सबसे अहम दस्तावेजों की सूची में सबसे ऊपर आता है। इसके अलावा फ्लैट, प्लॉट या कमर्शियल यूनिट खरीदने से जुड़े अन्य सभी लेनदेन और रसीदें भी आपके पास होनी चाहिए। इसलिए संपत्ति खरीदते समय मिलने वाले हर एक कागज को सुरक्षित संभालकर रखना चाहिए। फ्लैट खरीदने की शुरुआत करने से पहले ही यह बेहद जरूरी है कि खरीदार संबंधित बिल्डर के रेरा रजिस्ट्रेशन की सत्यता की पूरी जांच कर ले। पुरुषोत्तम भारद्वाज बताते हैं कि रेरा का मूल उद्देश्य ही फ्लैट खरीदारों को किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या मनमानी से महफूज रखना है, इसलिए जमीन के मालिकाना हक और उससे जुड़े अन्य कागजातों की बारीकी से पड़ताल करना समझदारी है।
बड़ी रकम लगाने से पहले कानूनी सलाह
आज के दौर में फरीदाबाद जैसे शहरों में अचल संपत्ति यानी प्रॉपर्टी खरीदना कोई छोटा सौदा नहीं बल्कि जीवनभर की बड़ी पूंजी का निवेश होता है। लोग इसमें अपनी मेहनत की कमाई के लाखों और करोड़ों रुपये झोंक देते हैं। ऐसे में अपनी पूंजी को जोखिम में डालने से पहले एक-एक दस्तावेज की कानूनी रूप से जांच परख कर लेना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। एडवोकेट पुरुषोत्तम भारद्वाज की स्पष्ट सलाह है कि किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने से पहले किसी अनुभवी वकील से कानूनी राय जरूर लेनी चाहिए। ऐसा करने से भविष्य में आने वाली किसी भी प्रकार की कानूनी उलझन, धोखेबाजी या मानसिक परेशानी से बचने में काफी मदद मिल सकती है और खरीदार की गाढ़ी कमाई सुरक्षित रह सकती है।






















