बरसात का मौसम जैसे-जैसे अपने अंतिम चरण में पहुंचता है, हवा में नमी और आद्रता का स्तर काफी बढ़ जाता है। भीषण गर्मी से तो राहत मिल जाती है, लेकिन वातावरण का यह बदलाव बालों और त्वचा के लिए कई नई समस्याएं लेकर आता है। इस मौसम में पसीने और नमी के मिश्रण से सिर में अत्यधिक चिपचिपापन, रूसी यानी डैंड्रफ, तेज खुजली और बाल टूटने की रफ्तार काफी तेज हो जाती है। इसके साथ ही चेहरे और त्वचा पर भी तेल जमा होने, छोटे-छोटे दाने निकलने और फंगल इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है। इन मौसमी परेशानियों से निपटने के लिए अक्सर लोग प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों का रुख करते हैं। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में गुड़हल यानी हिबिस्कस के फूल और पत्तियों का इस्तेमाल त्वचा व बालों की विभिन्न समस्याओं को दूर करने के लिए सदियों से किया जाता रहा है।
मॉनसून में बालों की समस्याएं और गुड़हल के फायदे
बरसात के दिनों में बाल झड़ने की समस्या अचानक से तीव्र हो जाती है। इसके पीछे मुख्य कारण लगातार बना रहने वाला पसीना, वातावरण की नमी, स्कैल्प में जमा होने वाली गंदगी और डैंड्रफ का संक्रमण होता है। अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल के आयुर्वेदिक डॉक्टर जितेंद्र वर्मा के अनुसार, गुड़हल के ताजे फूलों और हरी पत्तियों को पीसकर बनाया गया लेप पारंपरिक रूप से बालों की जड़ों को पोषण देने के लिए उपयोग किया जाता है। जब इस लेप को स्कैल्प पर लगाया जाता है और हल्की मालिश की जाती है, तो इससे सिर की त्वचा में रक्त का संचार बेहतर होता है। इससे बालों की जड़ों को मजबूती मिलती है और बाल टूटने की समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो सकती है। हालांकि, डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि गुड़हल लगाने से पूरी तरह उड़ चुके बाल वापस उग आएंगे, ऐसा कोई वैज्ञानिक या पक्का दावा नहीं किया जा सकता। बरसात में सबसे पहली प्राथमिकता स्कैल्प की स्वच्छता बनाए रखना होना चाहिए।
डैंड्रफ और खुजली से राहत पाने का पारंपरिक तरीका
बरसात के दिनों में स्कैल्प पर अत्यधिक पसीना रुकने और नमी बने रहने के कारण मृत त्वचा की सफेद परतें जमने लगती हैं, जिसे डैंड्रफ कहा जाता है। इसके कारण सिर में लगातार चिपचिपापन और असहनीय खुजली की शिकायत बनी रहती है। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, गुड़हल में प्राकृतिक सफाई और शीतलता प्रदान करने वाले गुण मौजूद होते हैं। इसके फूल और पत्तियों का पेस्ट स्कैल्प की अशुद्धियों को साफ करने में मदद करता है। डॉक्टर जितेंद्र वर्मा का कहना है कि यह नुस्खा सामान्य डैंड्रफ और स्कैल्प केयर के लिए बेहद उपयोगी है। लेकिन यदि स्कैल्प पर गंभीर संक्रमण हो, लगातार अत्यधिक खुजली हो रही हो या घाव बन गए हों, तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय किसी योग्य डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी होता है।
प्राकृतिक कंडीशनर के रूप में गुड़हल का प्रयोग
मॉनसून के दौरान बालों में अजीब सी अनपेक्षित रूखापन और उलझन देखने को मिलती है। चिपचिपाहट से छुटकारा पाने के चक्कर में कई लोग बार-बार शैंपू से सिर धोते हैं, जिससे बालों की प्राकृतिक नमी और तेल समाप्त हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि बाल और अधिक बेजान तथा रूखे हो जाते हैं। ऐसे में गुड़हल के पत्तों और फूलों का पेस्ट एक बेहतरीन प्राकृतिक कंडीशनर की तरह काम करता है। ताजे फूलों व पत्तियों को पीसकर बालों की पूरी लंबाई पर अच्छी तरह लगाया जाता है और कुछ समय बाद साधारण साफ पानी से धो दिया जाता है। डॉक्टर जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि इस प्रक्रिया से बालों में प्राकृतिक कोमलता और चमक लौट आती है। हालांकि, यदि कोई पहली बार इस नुस्खे को आजमा रहा है, तो उसे पहले कम मात्रा में इस्तेमाल करके सावधानी बरतनी चाहिए।
क्या गुड़हल सफेद बालों को फिर से काला कर सकता है?
आजकल कम उम्र में ही बाल सफेद होना एक आम समस्या बन चुका है और लोग इसके उपचार के लिए भी कई तरह के घरेलू नुस्खे खोजते रहते हैं। पारंपरिक चर्चाओं में यह बात अक्सर कही जाती है कि गुड़हल लगाने से बाल काले होते हैं। इस विषय पर डॉक्टर जितेंद्र वर्मा का कहना है कि समय से पहले बाल सफेद होने के पीछे कई जटिल कारण हो सकते हैं। इनमें आनुवंशिकी यानी जेनेटिक्स, शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी, अत्यधिक मानसिक तनाव और अन्य शारीरिक बीमारियां शामिल हैं। इसलिए यह मान लेना कि केवल गुड़हल का लेप लगाने से सफेद हो चुके बाल फिर से पूरी तरह काले हो जाएंगे, सही नहीं है। गुड़हल बालों की सामान्य देखभाल, पोषण और मजबूती के लिए तो अच्छा है, लेकिन सफेद बालों की गंभीर समस्या में चिकित्सीय जांच कराना आवश्यक होता है।
त्वचा की देखभाल के लिए गुड़हल का इस्तेमाल
गुड़हल का औषधीय उपयोग केवल बालों तक ही सीमित नहीं है। त्वचा की रंगत सुधारने और निखार लाने के लिए भी इसके फूलों का इस्तेमाल फेस पैक के रूप में किया जाता है। बरसात के दिनों में त्वचा पर अत्यधिक तेल का स्राव होता है, जिससे बंद छिद्रों में छोटे दाने और चिपचिपाहट होने लगती है। जब गुड़हल के फूलों को पीसकर त्वचा पर लगाया जाता है, तो उसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट यौगिक त्वचा को गहराई से ठंडक और ताजगी प्रदान करते हैं। यह ऑयलीनेस को संतुलित करने में भी मदद करता है। डॉक्टर वर्मा सलाह देते हैं कि जिन लोगों की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है, उन्हें किसी भी फेस पैक का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर कर लेना चाहिए।
घर पर गुड़हल का औषधीय तेल बनाने की विधि
बालों की नियमित मालिश और डीप कंडीशनिंग के लिए गुड़हल का तेल भी घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले गुड़हल के फूलों को धूप में अच्छी तरह सुखा लिया जाता है। इसके बाद एक बर्तन में सरसों का तेल गर्म किया जाता है। इस गर्म तेल में सूखे हुए गुड़हल के फूल, मेथी दाना, कटा हुआ प्याज, शिकाकाई, आंवला, कलौंजी और रतनजोत जैसी पारंपरिक आयुर्वेदिक सामग्रियां मिलाई जाती हैं। इस पूरे मिश्रण को धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक कि जड़ी-बूटियों के गुण तेल में न समा जाएं। पकने के बाद तेल को ठंडा करके छान लिया जाता है। डॉक्टर जितेंद्र वर्मा के अनुसार, इस तेल से हफ्ते में एक या दो बार सिर की हल्की मालिश करने से स्कैल्प को गहरा पोषण मिलता है। यदि तेल के इस्तेमाल से किसी प्रकार की जलन, खुजली या एलर्जी महसूस हो, तो इसका उपयोग तुरंत रोक देना चाहिए।



















