अक्सर लोग सिर में होने वाले भारीपन या दर्द को दिनभर की भागदौड़ और सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब यह दर्द बार-बार उभरने लगे और दैनिक कामकाज में रुकावट पैदा करने लगे, तो इसे मामूली परेशानी समझना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉक्टर रजिता के अनुसार, लगातार बने रहने वाले सिरदर्द के मूल कारणों की पहचान करना बेहद आवश्यक है ताकि समय रहते सही उपचार किया जा सके।
माइग्रेन और गंभीर सिरदर्द की पहचान
सामान्य बोलचाल में माइग्रेन को अधकपारी भी कहा जाता है, जिसके दौरान मरीज को सिर के किसी एक हिस्से में अत्यधिक तीव्र दर्द की शिकायत होती है। कई मामलों में यह दर्द इतना असहनीय हो जाता है कि पीड़ित के लिए रोजमर्रा के सामान्य कार्य निपटाना भी दूभर हो जाता है। इस तरह के लंबे सिरदर्द के साथ अक्सर आंखों के भीतर तेज चुभन, धुंधला दिखाई देने की शिकायत और उल्टी या जी मिचलाने जैसे लक्षण भी जुड़ जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब सिरदर्द इन जटिल लक्षणों के साथ प्रकट हो, तो उसे सिर्फ थकान या सामान्य परेशानी मानकर टालने की भूल नहीं करनी चाहिए।
बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम और अनिद्रा की समस्या
चिकित्सकों ने विशेष रूप से बच्चों में सिरदर्द के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है। डॉक्टर रजिता ने बताया कि बच्चों की दिनचर्या में मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल और बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम इस परेशानी की एक प्रमुख वजह बनकर उभर रहा है। देर तक फोन अथवा डिजिटल स्क्रीन के सामने बैठे रहने से बच्चों के सोने का चक्र बुरी तरह प्रभावित होता है। जब पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो सिर में भारीपन और दर्द की समस्या बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, लगातार स्क्रीन देखने से आंखों के आसपास की मांसपेशियों में कमजोरी और तनाव उत्पन्न होता है, जो सिरदर्द को और ज्यादा गंभीर बना देता है। माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन देखने के समय को सीमित करने और उनके सोने-जागने के समय को नियमित करने पर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
बिना परामर्श पेनकिलर और डिस्प्रिन लेने से बचें
अक्सर देखा जाता है कि सिर में दर्द होते ही लोग खुद से दर्द निवारक गोलियां या डिस्प्रिन जैसी दवाएं खाने की आदत बना लेते हैं। चिकित्सक ने आगाह किया है कि बिना चिकित्सीय परामर्श के स्वयं दवा लेने की यह प्रवृत्ति गंभीर खतरे पैदा कर सकती है। कई मरीज पहले से अन्य बीमारियों की दवाइयां ले रहे होते हैं, जिनके साथ खून पतला करने वाली दवाओं का सेवन सुरक्षित नहीं होता। विशेष रूप से यदि किसी व्यक्ति को ब्लड प्रेशर की समस्या है या अन्य स्वास्थ्य संबंधी विकार हैं, तो उसे किसी भी प्रकार की दवा लेने से पूर्व योग्य डॉक्टर की सलाह अनिवार्य रूप से लेनी चाहिए।
तनाव नियंत्रण, पैरों की मालिश और दिनचर्या में सुधार
सिरदर्द से बचाव और राहत के लिए मानसिक तनाव को नियंत्रित करना और मन को शांत रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है। चिकित्सक का कहना है कि ध्यान लगाने और खुद को मानसिक रूप से तनावमुक्त रखने से तनाव जनित सिरदर्द में काफी कमी लाई जा सकती है। इसके अलावा, रात को सोने से पहले पैरों के तलवों पर सरसों के तेल की हल्की मालिश करने का घरेलू उपाय भी कुछ मरीजों को मांसपेशियों के तनाव से राहत दिला सकता है। नियमित जीवनशैली और समय पर विश्राम सिर के भारीपन को कम करने में मददगार साबित होते हैं।
खान-पान पर नियंत्रण और पानी का पर्याप्त सेवन
सिरदर्द की रोकथाम में सही खान-पान की भूमिका भी अहम होती है। तली-भुनी चीजों, जंक फूड और बाहर के अस्वस्थ भोजन से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है, क्योंकि शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी सिरदर्द और शारीरिक असहजता को तेजी से बढ़ा सकती है। एक संतुलित आहार और पर्याप्त जलयोजन सिरदर्द की पुनरावृत्ति को रोकने में सहायक होते हैं।
इन गंभीर लक्षणों के दिखने पर तुरंत लें डॉक्टरी जांच
यदि सिर के एक हिस्से में अत्यधिक तीव्र या धड़कन जैसा दर्द महसूस हो रहा हो, सिरदर्द कई दिनों तक लगातार बना रहे, आंखों में धुंधलापन या लगातार चुभन हो, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। सिरदर्द के साथ उल्टी आना अथवा शरीर के किसी अंग में सुन्नपन या असामान्य असहजता महसूस होना भी गंभीर संकेत हैं। इन लक्षणों की अनदेखी किए बिना तुरंत अस्पताल जाकर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में मरीजों के लिए पांच रुपये की पर्ची पर होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ चिकित्सीय परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध है।



















