राजस्थान के जोधपुर शहर में स्थित प्रसिद्ध मसूरिया बाबा मंदिर में वार्षिक भादवा मेले के औपचारिक उद्घाटन से पहले ही भक्तों का जनसैलाब उमड़ना शुरू हो गया है। हालांकि मेला आधिकारिक रूप से 13 सितंबर को बाबा की बीज के पावन अवसर पर शुरू हो रहा है, लेकिन देश के अनेक राज्यों से श्रद्धालुओं की आवाजाही कई दिन पहले ही तेज हो गई है। श्रद्धालु लोक देवता बाबा रामदेवजी के गुरु बालीनाथ जी की पावन समाधि स्थल के दर्शन करने बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं। मंदिर प्रशासन का अनुमान है कि इस पूरे आयोजन के समापन तक यहाँ दर्शन करने वालों का आंकड़ा 25 लाख से 30 लाख के पार जा सकता है।
सुरक्षा कारणों से मंदिर परिसर में कुछ वस्तुओं के प्रवेश पर पाबंदी
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति ने इस बार कुछ महत्वपूर्ण कड़े नियम लागू किए हैं। मंदिर के मुख्य प्रांगण में बड़े आकार के कपड़े से बने घोड़े और अत्यधिक ऊँचे ध्वज या झंडे ले जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। जो जातरू या श्रद्धालुओं के संघ अपने साथ विशालकाय ध्वज या लोहे व बाँस के लंबे डंडों पर लगे झंडे ला रहे हैं, उन्हें मंदिर के मुख्य द्वार पर ही रोक दिया जा रहा है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र राखेचा ने बताया कि मंदिर परिसर के भीतर विद्युत व्यवस्था के लिए कई तरह की रंग-बिरंगी लाइटिंग और बिजली की खुली वायर बिछाई गई हैं। ऐसे में ऊँचे झंडों या लंबे डंडों के इन तारों के संपर्क में आने से दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। इसी संभावित खतरे को टालने और दर्शनार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। ट्रस्ट ने सभी पदयात्रियों से अपील की है कि वे इन नियमों का पालन करें और व्यवस्था बनाए रखने में अपना योगदान दें।
ट्रस्ट पदाधिकारियों का सहयोग का संदेश
मंदिर व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने आने वाले सभी भक्तों से नियमों में पूर्ण सहयोग देने की गुजारिश की है। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष शिवजी दैया तथा कोषाध्यक्ष पुरुषोत्तम राखेचा ने संयुक्त रूप से कहा कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सुरक्षित और सुगम दर्शन कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भक्तों से अनुरोध किया है कि वे विशाल ध्वज या बड़े घोड़े परिसर में न लाएँ ताकि कतारों में किसी प्रकार की बाधा पैदा न हो और हर व्यक्ति बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सके।
सुबह चार बजे से देर रात तक लग रही लंबी कतारें
मसूरिया क्षेत्र में बाबा की बीज से लगभग एक सप्ताह पूर्व ही मेले जैसा जीवंत वातावरण निर्मित हो चुका है। मुख्य मार्गों पर पदयात्रियों के जत्थे बाबा के जयकारे लगाते हुए लगातार आगे बढ़ रहे हैं। मंदिर के कपाट प्रतिदिन तड़के 4 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं, जिसके बाद मध्यरात्रि 12 बजे तक अनवरत दर्शन का दौर चलता रहता है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय श्रद्धालुओं का दबाव बहुत अधिक रहता है। यहाँ गुरु बालीनाथ की समाधि पर ढोक लगाने के पश्चात् अधिकांश भक्त मुख्य तीर्थ स्थल रामदेवरा के लिए प्रस्थान कर देते हैं।
पदयात्रियों के लिए मार्ग में विभिन्न सेवा स्थलों का संचालन
जोधपुर से रामदेवरा जाने वाले समस्त पैदल मार्ग पर जातरुओं की सुविधा के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। लंबी यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं के आराम, भोजन और प्राथमिक चिकित्सा के लिए जगह-जगह भंडारे और विश्राम स्थल बनाए गए हैं।
इन सेवा शिविरों में पदयात्रियों के लिए ठंडा पीने का पानी, कूलर और भरपेट भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है। लगातार पैदल चलने के कारण कई यात्रियों के पैरों में छाले और अत्यधिक थकान हो जाती है। इसके समाधान के लिए चिकित्सा शिविरों में पैरामेडिकल स्टाफ दवाइयां, मरहम और अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। इसके साथ ही, रात्रि विश्राम के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की तरफ से ठहरने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि जातरू अपनी यात्रा बिना किसी कठिनाई के पूरी कर सकें।




















