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उदयपुर के 80 वार्डों में त्रिकोणीय संग्राम, निर्दलीयों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की नींद उड़ाईराजस्थान
6 सित॰ 2026, 1:33 pm (22 मिनट पहले)· 2

उदयपुर के 80 वार्डों में त्रिकोणीय संग्राम, निर्दलीयों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की नींद उड़ाई

उदयपुर नगर निगम की 80 वार्ड सीटों पर भाजपा, कांग्रेस और मजबूत निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बनता दिख रहा है, जिसमें भाजपा के लगातार सातवें बोर्ड पर सवाल खड़े हो गए हैं।

उदयपुर की सड़कों पर इन दिनों चुनावी पोस्टर, नारे और जनसंपर्क अभियान हर वार्ड में नजर आ रहे हैं। नगर निगम की 80 सीटों के लिए भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार पूरी ताकत से मैदान में उतर चुके हैं, और शहर के सियासी तापमान ने पिछले कई चुनावों से ज्यादा गर्मी पकड़ ली है। दोनों प्रमुख दलों के कई पुराने और जाने-पहचाने चेहरे इस बार आमने-सामने हैं, और हर वार्ड में हार-जीत का दावा दोनों तरफ से किया जा रहा है।

छह बार की भाजपा सत्ता को चुनौती

पिछले छह बोर्ड से उदयपुर नगर निगम पर भाजपा का कब्जा रहा है, लेकिन सातवें बोर्ड के लिए हो रहे इस मुकाबले में सियासी समीकरण पहले जैसे सीधे नजर नहीं आ रहे। शहर में बदलाव की बात जोर पकड़ रही है, और कई वार्डों में मुकाबला इतना करीबी हो गया है कि किसी एक पार्टी की जीत को लेकर पहले से कुछ भी कहना मुश्किल है। उम्मीदवार घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं और विकास के नाम पर समर्थन जुटाने में जुटे हैं। साथ ही स्थानीय मुद्दों को भी प्रचार का बड़ा हिस्सा बनाया जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में चुनावी शोर और तेज होने की संभावना है।

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स्मार्ट सिटी के काम पर उठे सवाल बनेंगे मुद्दा

उदयपुर में बीते कुछ वर्षों में स्मार्ट सिटी योजना के तहत हुए विकास कार्य इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। शहरवासियों का कहना है कि इस योजना के तहत कई जरूरी काम हुए हैं, लेकिन कुछ इलाकों में काम की गुणवत्ता, यातायात व्यवस्था, सड़क निर्माण, पार्किंग की सुविधा और ड्रेनेज सिस्टम को लेकर लोगों में नाराजगी भी है। लोग चाहते हैं कि जो भी बोर्ड बने, वह उदयपुर की खूबसूरती और उसकी सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाए बिना विकास कार्यों को आगे बढ़ाए। झीलों, महलों और ऐतिहासिक इमारतों के लिए दुनियाभर में पहचाने जाने वाले इस शहर में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार भी नए बोर्ड के सामने एक बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

17 वार्डों में निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं समीकरण

इस बार के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाजपा और कांग्रेस, दोनों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 17 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी मजबूत स्थिति में बताए जा रहे हैं, और इनमें से कई का अपने-अपने वार्ड में व्यक्तिगत प्रभाव और जनता से सीधा जुड़ाव है। इसी वजह से इन वार्डों में मुकाबला दो के बजाय तीन तरफा होता दिख रहा है, जिससे नतीजों का अनुमान लगाना दोनों बड़े दलों के लिए भी मुश्किल हो गया है।

अब जनता के फैसले पर टिकी हैं सबकी निगाहें

भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों ने अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए बड़े नेताओं और स्थानीय पदाधिकारियों को प्रचार में उतार दिया है। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी भी मतदाताओं के बीच खुद को दोनों पार्टियों से अलग एक ठोस विकल्प के तौर पर पेश करने में जुटे हैं। सवाल यह है कि क्या भाजपा लगातार सातवीं बार अपना बोर्ड बनाने में कामयाब होगी, या कांग्रेस बदलाव की चर्चा को वोटों में तब्दील कर पाएगी। यह भी देखना दिलचस्प होगा कि मजबूत निर्दलीय उम्मीदवार कितने वार्डों में उलटफेर करते हैं। इन तमाम सवालों के जवाब चुनाव नतीजे आने के बाद ही साफ होंगे, लेकिन फिलहाल उदयपुर के 80 वार्डों की सियासी लड़ाई बेहद दिलचस्प और कांटे की बनी हुई है।

सवाल-जवाब

उदयपुर नगर निगम में कुल कितने वार्ड हैं?
उदयपुर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं।
भाजपा कितने बोर्ड से उदयपुर नगर निगम में सत्ता में है?
पिछले छह बोर्ड से भाजपा का उदयपुर नगर निगम पर दबदबा रहा है, और यह चुनाव सातवें बोर्ड के लिए हो रहा है।
कितने वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार मजबूत माने जा रहे हैं?
करीब 17 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी मजबूत स्थिति में बताए जा रहे हैं।
इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा क्या बन रहा है?
स्मार्ट सिटी योजना के तहत हुए काम की गुणवत्ता, यातायात व्यवस्था, सड़क निर्माण, पार्किंग और ड्रेनेज जैसी समस्याएं बड़ा मुद्दा हैं।
उदयपुर किसके लिए मशहूर है और इसका चुनाव से क्या संबंध है?
उदयपुर अपनी झीलों, महलों और ऐतिहासिक धरोहर के लिए मशहूर है, और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार नए बोर्ड के सामने एक बड़ी चुनौती होगी।
चुनाव नतीजे कब साफ होंगे?
लेख में नतीजे की सटीक तारीख नहीं बताई गई है, यह चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ही साफ होगा।
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