शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द उठते ही बहुत से लोग तुरंत गर्म पानी की सिकाई करना शुरू कर देते हैं। यदि इस प्रक्रिया को सही तरीके से अंजाम दिया जाए, तो मांसपेशियों के खिंचाव और जकड़न में काफी राहत मिल सकती है। हालांकि, यह बात ध्यान रखनी आवश्यक है कि हर प्रकार के शारीरिक दर्द या चोट में गर्म सिकाई करना फायदेमंद नहीं होता। विशेष रूप से किसी भी नई चोट के मामले में गर्म पानी का सेक करने से सूजन और तकलीफ दोनों बढ़ सकती हैं। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि शरीर के किस दर्द में गर्म पानी की सिकाई करनी चाहिए और किन परिस्थितियों में इससे पूरी तरह बचना चाहिए।
पुराने दर्द में गर्म पानी से मिलता है आराम
फरीदाबाद स्थित सर्वोदय हेल्थकेयर में फिजियोथेरेपी और पुनर्वास विभाग की ग्रुप हेड डॉ. धीरजा बब्बर बताती हैं कि गर्म पानी की सिकाई उन समस्याओं में अत्यधिक लाभ पहुंचाती है जहां कमर दर्द या गर्दन का दर्द काफी लंबे समय से बना हुआ हो। पुराने दर्द की स्थिति में गर्म सिकाई करने से मांसपेशियों को सुकून मिलता है और दर्द कम होता है। इसके विपरीत, यदि किसी व्यक्ति को कोई नया दर्द महसूस हो रहा है या शरीर में ताजा चोट लगी है, तो उस अवस्था में भूलकर भी गर्म पानी की सिकाई नहीं करनी चाहिए।
ताजा चोट लगने पर गर्म सेक से करें परहेज
डॉ. धीरजा बब्बर के अनुसार यदि कोई व्यक्ति दुर्घटनावश गिर जाता है और उसे तुरंत ही चोट लग जाती है, तो उसे उस हिस्से पर फौरन गर्म पानी से सिकाई नहीं करनी चाहिए। इस प्रकार की नई चोट के भीतर अंदरूनी सूजन विकसित हो सकती है। ऐसे नाजुक समय में गर्म सिकाई करने से स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। यही वजह है कि हर चोट पर गर्म पानी का इस्तेमाल करना उचित नहीं माना जाता है। किसी भी ताजी चोट की स्थिति में पहले ठंडे सेक का उपयोग किया जाना चाहिए और बाद में डॉक्टर की सलाह या परिस्थिति के अनुसार ही गर्म सिकाई पर विचार करना चाहिए।
सिकाई का सही समय और तापमान
विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि गर्म पानी की सिकाई की अवधि 15 से 20 मिनट से अधिक लंबी नहीं होनी चाहिए। इससे ज्यादा देर तक गर्म सेक करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा, इस्तेमाल किए जाने वाले पानी का तापमान भी बहुत अधिक नहीं होना चाहिए। पानी केवल इतना गर्म होना चाहिए जिससे शरीर को राहत का अहसास हो और त्वचा को किसी तरह की तकलीफ या नुकसान न पहुंचे। जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है, उन्हें इस मामले में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि कई बार ऐसे रोगियों को अत्यधिक गर्म या ठंडे तापमान का सही एहसास नहीं हो पाता है।
फ्रैक्चर और ब्लीडिंग के मामलों में सख्त मनाही
डॉ. धीरजा बब्बर का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को हड्डी में फ्रैक्चर की समस्या है या शरीर के किसी हिस्से से खून बह रहा है, तो वहां कभी भी गर्म सिकाई नहीं करनी चाहिए। यदि चोट वाली जगह पर पहले से ही गर्मी महसूस हो रही है, वह हिस्सा लाल नजर आ रहा है या वहां सूजन उभर आई है, तब भी गर्म सेक देने से बचना चाहिए। ऐसी गंभीर अवस्था में किसी भी प्रकार की गर्माहट देने से सूजन में और ज्यादा इजाफा हो सकता है। यदि प्रभावित क्षेत्र में पहले से ही गर्माहट महसूस हो रही है, तो वहां हमेशा ठंडा सेक करना ही बेहतर विकल्प होता है।
फिटकरी के इस्तेमाल से पहले करें जांच
चोट लगने के बाद आमतौर पर लोगों में गर्म पानी में फिटकरी डालकर उससे सिकाई करने का पुराना चलन देखा जाता है। इस घरेलू उपाय को आजमाने से पहले यह जरूरी है कि चोट वाली जगह को हाथ लगाकर उसकी स्थिति की भली-भांति जांच कर ली जाए। यदि वह विशिष्ट हिस्सा शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक गर्म महसूस हो रहा है, उस पर लाचारी या लाली छाई हुई है, अथवा वहां सूजन दिखाई दे रही है, तो गर्म पानी से सिकाई बिल्कुल न करें। उस समयावधि में ठंडा सेक करना ही उचित रहता है। यदि चोट पुरानी प्रकृति की है और उस स्थान का तापमान बिल्कुल सामान्य है, तब गर्म पानी में फिटकरी मिलाकर सिकाई करने से निश्चित तौर पर काफी राहत मिल सकती है।



















