आजकल की तेज रफ्तार जिंदगी में सिरदर्द होना एक बेहद सामान्य बात लग सकती है, लेकिन जब दर्द असहनीय हो जाए और बार-बार परेशान करे, तो यह केवल सामान्य थकान नहीं होती. माइग्रेन शरीर के तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक बेहद जटिल समस्या है, जिसमें सिर के एक हिस्से या पूरे सिर में तेज टीस मारता हुआ दर्द होता है. इस स्थिति में व्यक्ति को जी मिचलाने, चक्कर आने, शरीर में कमजोरी महसूस होने और तेज रोशनी या आवाज से अत्यधिक परेशानी होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, माइग्रेन की समस्या केवल बाहरी कारणों से नहीं बल्कि हमारी दिनचर्या की कुछ आदतों से भी जुड़ी होती है. खान-पान में लापरवाही, नींद का अनिश्चित समय, मानसिक तनाव और शरीर में तरल पदार्थों की कमी जैसी आदतें इस दर्द को और ज्यादा गंभीर बना सकती हैं. अपनी दैनिक आदतों में थोड़ा सा सुधार करके माइग्रेन के हमलों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
1. शरीर में पानी की कमी होना
पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना माइग्रेन के दर्द को भड़काने वाले प्रमुख कारणों में से एक है. जब शरीर में पानी का स्तर गिरता है, तो कोशिकाओं के सही तरीके से काम करने की क्षमता प्रभावित होती है. इसके कारण मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्वों का प्रवाह धीमा हो सकता है, जिससे सिर में भारीपन, सुस्ती और चक्कर आने जैसी समस्या महसूस होती है. पानी हमारे शरीर के तापमान को संतुलित बनाए रखने और तंत्रिका तंत्र को सुचारू रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसलिए दिन भर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए. केवल सादा पानी ही नहीं, बल्कि नारियल पानी, सब्जियों का सूप और पानी से भरपूर ताजे फलों का सेवन भी शरीर में नमी बनाए रखने में काफी मददगार होता है.
2. नींद के समय में अनियमियतता और कम आराम
मस्तिष्क के स्वस्थ कामकाज और नींद के बीच बहुत गहरा संबंध माना जाता है. रोजाना अलग-अलग समय पर सोना या देर रात तक जागते रहना शरीर की जैविक घड़ी यानी प्राकृतिक चक्र को पूरी तरह बिगाड़ देता है. जब नींद पूरी नहीं होती या सोने का समय तय नहीं होता, तो तंत्रिका तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे माइग्रेन का ट्रिगर सक्रिय हो जाता है. मस्तिष्क और शरीर को पूरी तरह तनावमुक्त रखने के लिए एक निश्चित समय पर सोने और उठने की आदत डालना बेहद जरूरी है. वयस्क व्यक्तियों को रोजाना कम से कम 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेने की सलाह दी जाती है ताकि मस्तिष्क को पर्याप्त आराम मिल सके.
3. चाय, कॉफी और शराब का अत्यधिक सेवन
अक्सर लोग सिरदर्द से राहत पाने के लिए तुरंत चाय या कॉफी पीना पसंद करते हैं. हालांकि थोड़ी मात्रा में कैफीन कभी-कभी राहत दे सकता है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन माइग्रेन की स्थिति को और बिगाड़ सकता है. इसी तरह शराब का सेवन भी कई लोगों में माइग्रेन के दर्द को तुरंत बढ़ा देता है. कैफीन और शराब दोनों ही शरीर में निर्जलीकरण पैदा करते हैं, नींद की गुणवत्ता खराब करते हैं और तंत्रिका तंत्र पर नकारात्मक असर डालते हैं. हर व्यक्ति के शरीर पर इनका प्रभाव अलग हो सकता है, इसलिए यदि किसी खास पेय पदार्थ का सेवन करने के बाद सिरदर्द शुरू होता है, तो उससे दूरी बनाना ही समझदारी है.
4. लगातार डिजिटल स्क्रीन के सामने वक्त बिताना
आधुनिक दौर में मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर और टीवी का इस्तेमाल बहुत अधिक बढ़ गया है. घंटों तक बिना ब्रेक लिए स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियों और नसों पर अत्यधिक तनाव पड़ता है. स्क्रीन की तेज चमक और उससे निकलने वाली रोशनी माइग्रेन से पीड़ित लोगों के तंत्रिका तंत्र को तुरंत प्रभावित करती है. जब माइग्रेन का हमला होता है, तो स्क्रीन देखना लगभग असंभव सा लगने लगता है. इससे बचने के लिए अपने उपकरणों की ब्राइटनेस कम रखें, बीच-बीच में आंखों को बंद करके आराम दें और कुछ समय के लिए शांत व अंधेरे कमरे में विश्राम करें.
5. भोजन का समय छोड़ना और गलत खान-पान
माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए सही समय पर सही भोजन करना अत्यंत आवश्यक है. लंबे समय तक भूखे रहने या अचानक व्रत रखने से शरीर में ब्लड शुगर का स्तर तेजी से गिरता है, जिससे मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में खिंचाव आता है और दर्द शुरू हो जाता है. इसके अलावा बहुत ज्यादा तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार या प्रसंस्कृत भोजन भी शरीर में सूजन बढ़ाकर माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है. अपनी खुराक में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल करें. समय पर संतुलित आहार लेने से शरीर में ऊर्जा का स्तर बना रहता है और सिरदर्द का खतरा कम होता है.



















