वजन घटाने की बात आते ही ज़्यादातर लोग डाइटिंग, जिम, घंटों की कसरत या फास्टिंग की सलाह देने लगते हैं, लेकिन आदतों में बदलाव की बात शायद ही कोई करता है। हकीकत यह है कि आपकी कुछ छोटी-छोटी गलत आदतें ही चुपचाप मोटापे की असली वजह बन जाती हैं। फिटनेस ट्रेनर शिखा सुराना ने इंस्टाग्राम पर अपनी वेट लॉस जर्नी साझा करते हुए यही बात समझाई। कभी 72 किलो की रहीं शिखा अब 49 किलो की हैं, यानी पूरे 23 किलो कम। खास बात यह कि इसके लिए उन्होंने कोई नया नुस्खा नहीं आज़माया, बस उन आदतों को छोड़ दिया जो अनजाने में उनके वजन घटाने के रास्ते में अड़चन बनी हुई थीं।
शिखा ने ऐसी आठ आदतें गिनाईं, जिन्हें बदलकर उन्होंने न सिर्फ अपनी लाइफस्टाइल सुधारी बल्कि वजन भी घटाया। इस पूरे सफर में न कोई क्रैश डाइट थी, न डिटॉक्स टी और न ही कोई शॉर्टकट। उन्होंने वही तरीका चुना जो लंबे समय तक उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बना रह सके।
वो आठ आदतें जिन्होंने पूरा खेल बदल दिया
नाश्ता गोल करना छोड़ा: सबसे पहले शिखा ने सुबह का नाश्ता छोड़ने की आदत बंद की। नाश्ता न करने से दिन में आगे चलकर ज़बरदस्त भूख लगती है। पहले वो खुद को भूखा रखती थीं, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता और फिर रात को सब कुछ एक साथ खा लेती थीं। अब उन्होंने रात का खाना छोड़ना भी बंद कर दिया और सुबह उठने के एक घंटे के भीतर खाना शुरू कर दिया।
कैलोरी वाले ड्रिंक्स को अलविदा: दूसरा बदलाव उन्होंने पीने की आदतों में किया। जूस, चीनी वाली चाय और कोल्ड कॉफी पूरी तरह बंद कर दी, क्योंकि ये शरीर में बेवजह की कैलोरी भर देती हैं। इनकी जगह अब वो पानी, ब्लैक कॉफी और सादी चाय लेती हैं।
हेल्दी चीज़ें भी नाप-तौलकर: शिखा को एहसास हुआ कि अगर मात्रा का ध्यान न रखा जाए तो हेल्दी चीज़ें भी मुसीबत बन सकती हैं। मखाना, सूखे मेवे और पीनट बटर उनकी रोज़ की दिनचर्या में थे, लेकिन ज़्यादा मात्रा में खाने से ये भी कैलोरी बढ़ाते हैं। इसलिए यह सोच छोड़नी ज़रूरी है कि हेल्दी है तो कितना भी खा लो।
सिर्फ कार्डियो, वेट ट्रेनिंग बिल्कुल नहीं: लंबे समय तक कार्डियो ही उनकी फिटनेस का मुख्य हिस्सा रहा। शिखा बताती हैं कि वो ट्रेडमिल पर घंटों बिताती थीं, लेकिन असली बदलाव तब दिखा जब उन्होंने वेट लिफ्टिंग शुरू की।
कम नींद, ज़्यादा तनाव: नींद की कमी भी एक बड़ी समस्या थी जिसे उन्होंने सुधारा। शिखा के मुताबिक देर रात तक जागने से तनाव बढ़ता था, कोर्टिसोल का स्तर ऊपर चढ़ जाता और खाने की तेज़ इच्छा होने लगती। अब वो हर हाल में 7 से 8 घंटे की नींद ज़रूर लेती हैं।
बाहर का खाना बंद: होटल और रेस्टोरेंट में खाने की आदत भी छूट गई। भले ही आप हेल्दी या कम खाएं, बाहर के खाने में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो अनजाने में एक्स्ट्रा कैलोरी दे देते हैं। अब शिखा ज़्यादातर घर का बना खाना ही खाती हैं।
हर चीज़ सीमित मात्रा में: शिखा को लगता था कि एक दिन जमकर खा लेने से कुछ नहीं बिगड़ता, लेकिन एक बार की मौज-मस्ती पूरे दिन की मेहनत पर पानी फेर सकती है। इसलिए अगर बाहर का या कुछ अनहेल्दी खा भी रहे हैं तो मात्रा पर नज़र रखना ज़रूरी है। सीमित मात्रा में खाना उतना नुकसान नहीं करता जितना एक दिन भरपेट खा लेना। यानी सब खाइए, बस मात्रा का ध्यान रखिए।
खुद को प्रेरित और सकारात्मक रखना: वजन घटाना एक दिन का काम नहीं है, इसमें लगातार और लंबी मेहनत लगती है। इसलिए किसी 'सही दिन' का इंतज़ार करने के बजाय रोज़ सकारात्मक ऊर्जा से भरे रहें और अनुशासन के साथ खुद को मोटिवेट करते रहें। ध्यान केंद्रित रखें और खुश रहना सीखें।
शिखा की यह कहानी साफ बताती है कि बदलाव किसी जादुई फॉर्मूले से नहीं, बल्कि रोज़ की आदतों को धीरे-धीरे सुधारने से आता है, और यही बदलाव टिकाऊ भी होता है।













