ग्वालियर में त्योहारी सीजन के चलते इन दिनों घरों में दीवाली की व्यापक साफ-सफाई चल रही है, जिसके चलते हवा में धूल और बारीक कणों की मात्रा काफी बढ़ गई है। वातावरण में मौजूद यही धूल सीधे तौर पर लोगों के श्वसन तंत्र पर असर डाल रही है और कई तरह की एलर्जी संबंधी दिक्कतों को न्योता दे रही है। घर की झाड़-पोंछ करते समय चेहरे पर मास्क लगाना बेहद उपयोगी साबित होता है, क्योंकि यह धूल भरे कणों को सांस के रास्ते शरीर के भीतर प्रवेश करने से रोकने का मजबूत सुरक्षा कवच बनता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. संतोष शर्मा के अनुसार, मौसम में आ रहे बदलाव के कारण इन दिनों वायरल बुखार के मामले लगातार देखने को मिल रहे हैं। इसके साथ ही नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ रहा है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। ऐसे मौसमी बदलाव के दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही पूरे परिवार के स्वास्थ्य को संकट में डाल सकती है।
तीन से चार दिनों का बुखार नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
अगर किसी व्यक्ति को लगातार तीन से चार दिन तक बुखार बना रहता है, तो उसे कतई सामान्य मौसमी बुखार समझकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। डॉ. संतोष शर्मा का कहना है कि ऐसी स्थिति बनते ही तुरंत जरूरी चिकित्सकीय जांच कराई जानी चाहिए। डेंगू जैसी गंभीर बीमारी में शरीर में प्लेटलेट्स का स्तर तेजी से नीचे गिर सकता है, जिससे मरीज को अत्यधिक कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ता है। लिहाजा, सही समय पर रोग की पहचान और उचित चिकित्सकीय उपचार ही मरीज को गंभीर स्थिति में जाने से बचा सकता है।
वायरल के साथ टाइफाइड और डेंगू के मामले भी सामने आए
वर्तमान स्वास्थ्य परिदृश्य की जानकारी देते हुए डॉ. संतोष शर्मा ने स्पष्ट किया कि वायरल बुखार की चपेट में आने वाले मरीजों के अलावा अब टाइफाइड के मामले भी नियमित रूप से अस्पतालों और क्लीनिकों में आ रहे हैं। हालांकि मलेरिया के मामले तुलनात्मक रूप से काफी कम देखने को मिल रहे हैं, लेकिन डेंगू के मरीजों की संख्या में निश्चित तौर पर इजाफा हो रहा है। इस तरह के दोहरे संक्रमण के खतरे को देखते हुए हर नागरिक को अपनी दिनचर्या और खान-पान में विशेष सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है।
मच्छरों की रोकथाम के लिए घर और आसपास जमा पानी हटाएं
मच्छरों के फैलाव को रोकने के लिए डॉ. शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि घरों के भीतर या आसपास किसी भी स्थान पर पानी को ठहरने न दिया जाए। चाहे पानी साफ हो या गंदा, किसी भी प्रकार का ठहरा हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए मुफीद वातावरण तैयार करता है। पानी की टंकियों, एयर कूलर, गमलों और उन सभी कोनों की नियमित रूप से सफाई की जानी चाहिए जहां जलभराव की थोड़ी सी भी गुंजाइश हो।
इसके साथ ही परिवार के छोटे बच्चों में स्वच्छता की आदतें विकसित करना बेहद जरूरी है। बच्चों को भोजन करने से पहले और शौचालय जाने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। बच्चों को अस्वच्छ या गंदे हाथों से खाद्य और पेय पदार्थों को छूने से रोकना चाहिए, क्योंकि यह आदत सीधे पेट के संक्रमण और टाइफाइड जैसी बीमारियों को दावत देती है।
बिना डॉक्टरी सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने का जोखिम
स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर सबसे अहम हिदायत देते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि कई लोग अस्वस्थ होने पर सीधे मेडिकल स्टोर जाकर खुद ही दवाइयां खरीदकर खाने लगते हैं। कई मौकों पर मेडिकल स्टोर संचालक भी बिना किसी औपचारिक चिकित्सकीय जांच के दवाइयां थमा देते हैं, जो शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है।
बुखार महसूस होने पर खुद डॉक्टर बनने या मनमर्जी से दवाएं लेने के बजाय सीधे योग्य चिकित्सक से जांच कराकर ही इलाज शुरू करना चाहिए। गलत दवा का सेवन या अधूरा इलाज बीमारी को दबाने के बजाय उसे और अधिक उलझा सकता है, जिससे सही मर्ज की समय पर पहचान करने में भी बेवजह की देरी हो जाती है।
सफाई अभियान के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण सावधानियां
दीवाली की सफाई करते समय नागरिकों को कई जरूरी व्यवहारिक बातों का खास ख्याल रखना चाहिए
- सफाई कार्य करते समय नाक और मुंह पर अच्छी गुणवत्ता का मास्क अनिवार्य रूप से लगाएं।
- धूल को वातावरण में उड़ने से रोकने के लिए सूखे झाड़ू के बजाय हमेशा गीले कपड़े या पोछे का उपयोग करें।
- घर की खिड़कियां और दरवाजे खुले रखकर ताजी हवा के आने-जाने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।
- घर के भीतर, बालकनी या आसपास किसी भी पात्र में पानी जमा न होने दें।
- बच्चों को दिनभर में बार-बार और नियमित रूप से हाथ धोने का अभ्यास कराएं।
- लगातार बुखार बने रहने, शरीर टूटने या असामान्य कमजोरी की स्थिति में फौरन चिकित्सक से मिलें।
- डॉक्टर की लिखित सलाह के बिना अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक या अन्य कोई दवा कभी न लें।
सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार
डॉ. संतोष शर्मा ने त्योहार की तैयारियों में जुटे सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि दीवाली के उल्लास और खरीदारी की आपाधापी में अपनी और अपने परिजनों की सेहत को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। पर्यावरण और घर की सफाई के साथ स्वास्थ्य संबंधी सभी जरूरी एहतियात बरतें, मच्छरों के डंक से बचाव के उपाय अपनाएं और किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। त्योहार का वास्तविक आनंद तभी संभव है, जब पूरा परिवार पूरी तरह स्वस्थ, ऊर्जावान और सुरक्षित रहे।


















