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फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल की डॉक्टर की चेतावनी: दो हफ्ते से ज्यादा रहे आवाज में भारीपन तो हो जाएं सावधानस्वास्थ्य
2 घंटे पहले· 1

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल की डॉक्टर की चेतावनी: दो हफ्ते से ज्यादा रहे आवाज में भारीपन तो हो जाएं सावधान

अगर आपकी आवाज दो से तीन हफ्ते तक लगातार बैठी रहे, तो इसे मामूली जुकाम समझने की भूल न करें। यह गले के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत जांच आवश्यक है।

आवाज का बैठना या उसमें भारीपन आना एक बेहद सामान्य समस्या मानी जाती है। आमतौर पर लोग इसे केवल सर्दी-जुकाम, गले के सामान्य संक्रमण या फिर बहुत ज्यादा देर तक बात करने या चिल्लाने का ही परिणाम मान लेते हैं। अमूमन ऐसी परिस्थितियों में कुछ दिनों के भीतर ही आवाज अपने आप ठीक हो जाती है और किसी विशेष इलाज की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, यदि आपकी आवाज लगातार दो से तीन हफ्तों तक बैठी रहे और उसमें किसी भी प्रकार का सुधार देखने को न मिले, तो इसे साधारण समझकर टालना भारी पड़ सकता है। इस तरह की गंभीर स्थिति में बिना कोई देरी किए किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलकर गले की जांच कराना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि आवाज में लंबे समय तक बना रहने वाला यह बदलाव गले के कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। यदि इस खतरनाक बीमारी का सही समय पर पता चल जाए, तो इसका उपचार काफी आसान, सुरक्षित और अधिक प्रभावी हो जाता है।

आवाज में बदलाव होने पर तुरंत डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल की ENT विशेषज्ञ डॉ. अपर्णा महाजन के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की आवाज में दो से तीन हफ्तों से लगातार भारीपन या बदलाव बना हुआ है, तो उसे बिना किसी लापरवाही के डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। विशेष रूप से, यदि मरीज की उम्र 55 वर्ष से अधिक है, तो उन्हें अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। इसके अलावा, यदि आवाज बैठने के साथ-साथ गले में किसी प्रकार की गांठ या सूजन महसूस हो रही हो, भोजन या पानी निगलने में कठिनाई आ रही हो, अथवा ऐसा लग रहा हो कि खाना गले में ही अटक रहा है, तो जांच कराने में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए। धूम्रपान करने वाले और नियमित रूप से शराब का सेवन करने वाले लोगों को भी अपने शरीर में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि इनमें संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा अधिक होता है।

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कैसे की जाती है गले की आंतरिक जांच?

जब किसी मरीज की आवाज लंबे समय तक ठीक नहीं होती है, तो डॉक्टर सबसे पहले गले के अंदरूनी हिस्से की गहन जांच करते हैं। डॉ. अपर्णा महाजन बताती हैं कि इस जांच के लिए एक बेहद पतले और लचीले कैमरे को गले के भीतर डाला जाता है, जिससे वोकल कॉर्ड्स यानी आवाज की तारों की स्थिति को साफ तौर पर देखा जा सकता है। इस आधुनिक जांच प्रक्रिया से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि वोकल कॉर्ड्स पर किसी प्रकार की सूजन, पॉलिप, घाव या फिर कोई ट्यूमर तो विकसित नहीं हो रहा है। यदि जांच के दौरान किसी भी तरह की विसंगति या समस्या दिखाई देती है, तो उसके आधार पर आगे के आवश्यक टेस्ट किए जाते हैं और मरीज का उचित उपचार तुरंत शुरू किया जाता है ताकि समस्या गंभीर रूप न ले सके।

बिना किसी व्यसन के भी हो सकता है गले का कैंसर

आमतौर पर लोगों में यह धारणा होती है कि गले का कैंसर केवल उन लोगों को होता है जो तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। हालांकि यह पूरी तरह सच है कि धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने वालों में इस बीमारी का खतरा कई गुना अधिक होता है, लेकिन डॉ. अपर्णा महाजन स्पष्ट करती हैं कि बिना किसी भी प्रकार का नशा करने वाले लोग भी इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। विशेष रूप से 55 वर्ष से अधिक आयु के लोग, जिनके परिवार में पहले किसी को कैंसर की समस्या रही हो, अथवा जो लोग रासायनिक यानी केमिकल और खनन यानी माइनिंग जैसे उद्योगों में काम करते हैं, उन्हें बहुत अधिक सावधान रहने की जरूरत होती है। इन उद्योगों में उड़ने वाली धूल और जहरीले रसायन गले की परतों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे संवेदनशील लोगों को कोई भी असामान्य लक्षण महसूस होते ही तुरंत जांच करानी चाहिए।

इन गंभीर लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज

डॉ. अपर्णा महाजन के अनुसार, आवाज में बदलाव के साथ-साथ शरीर में दिखने वाले कुछ अन्य लक्षणों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यदि आपको गले में कोई गांठ महसूस हो रही हो, खाना निगलने में लगातार तकलीफ हो रही हो, या भोजन गले में फंसता हुआ प्रतीत होता हो, तो इसे हल्के में न लें। इसके अलावा, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन का तेजी से कम होना या भूख में अचानक भारी कमी आना भी इसके महत्वपूर्ण लक्षण हो सकते हैं। कई बार गले के कैंसर का एकमात्र और सबसे पहला लक्षण सिर्फ आवाज का बदलना ही होता है। इसलिए, यदि आपकी आवाज के स्वर या टोन में कोई भी लगातार बदलाव दिख रहा है, तो डॉक्टर से इसकी जांच अवश्य करानी चाहिए ताकि किसी भी बड़ी आशंका को समय रहते दूर किया जा सके।

बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी और आसान उपाय

गले के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रहने के लिए डॉ. अपर्णा महाजन कुछ बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव देती हैं। उनके अनुसार, इस बीमारी से बचने का सबसे पहला और मुख्य कदम धूम्रपान और हर तरह के तंबाकू उत्पादों से पूरी तरह दूरी बनाना है। यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान के साथ-साथ शराब का भी सेवन करता है, तो उसके लिए कैंसर का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, एसिडिटी यानी पेट में गैस और तेजाब बनने की समस्या को भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। बार-बार पेट का एसिड भोजन नली के माध्यम से गले तक पहुंचने से गले की बेहद संवेदनशील आंतरिक परत को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिससे वहां की कोशिकाएं प्रभावित हो सकती हैं। यदि आपकी आवाज लंबे समय से खराब है या ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी संकेत दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराना ही सबसे बुद्धिमानी भरा फैसला है।

सवाल-जवाब

आवाज कितने समय तक बैठी रहे तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
यदि आपकी आवाज लगातार दो से तीन हफ्ते तक बैठी रहे और उसमें कोई सुधार न हो, तो डॉक्टर को दिखाना बेहद जरूरी है।
क्या बिना नशा करने वाले लोगों को भी गले का कैंसर हो सकता है?
हाँ, बिना किसी नशे या व्यसन की आदत वाले लोगों को भी गले का कैंसर हो सकता है, विशेषकर यदि उनकी उम्र 55 वर्ष से अधिक हो या पारिवारिक इतिहास हो।
गले के कैंसर की जांच के लिए डॉक्टर कौन सा टेस्ट करते हैं?
गले की जांच के लिए डॉक्टर एक पतले कैमरे को गले में डालकर वोकल कॉर्ड्स का निरीक्षण करते हैं, जिससे सूजन या ट्यूमर का पता चलता है।
आवाज बदलने के अलावा गले के कैंसर के अन्य क्या लक्षण हैं?
अन्य प्रमुख लक्षणों में गले में गांठ होना, खाना निगलने में कठिनाई, खाना अटकना, बिना कारण वजन कम होना और भूख न लगना शामिल हैं।
एसिडिटी गले के कैंसर के खतरे को कैसे बढ़ा सकती है?
बार-बार एसिड गले तक पहुंचने से वहां की आंतरिक नाजुक परत को नुकसान पहुंचता है, जो लंबे समय में गंभीर समस्या का कारण बन सकता है।
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