अंबाला में आजकल बच्चे खेलकूद के मैदानों की बजाय मोबाइल फोन की स्क्रीन्स पर अपनी फिटनेस और शरीर के हिसाब-किताब में जुटे नजर आते हैं। किस खाद्य पदार्थ में कितना प्रोटीन है, दिनभर में कितने ग्राम प्रोटीन का सेवन किया गया और मसल्स मजबूत बनाने के लिए क्या खाना चाहिए, इन तमाम सवालों के जवाब बच्चे विभिन्न मोबाइल एप्लीकेशंस और इंटरनेट पर तलाश रहे हैं। स्वास्थ्य और सेहत को लेकर समाज में बढ़ रही यह जागरूकता अपने आप में अच्छी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर की प्रोटीन की मांग को पूरा करने के लिए बाजार में बिकने वाले हर तरह के प्रोटीन ड्रिंक या कृत्रिम सप्लीमेंट्स का आंख मूंदकर इस्तेमाल करना किसी भी लिहाज से सही नहीं है।
युवाओं और बच्चों में तेजी से बढ़ा फिटनेस का क्रेज
बदलती जीवनशैली के इस दौर में बच्चों से लेकर किशोरों और युवाओं तक में फिटनेस को लेकर एक नया और तीव्र क्रेज देखने को मिल रहा है। नियमित रूप से जिम जाने वाले युवाओं के अलावा अब स्कूली उम्र के बच्चे भी अपनी खानपान की आदतों को लेकर काफी सतर्क और गंभीर हो गए हैं। इस बढ़ते रुझान को भुनाने के लिए बाजार में अनगिनत किस्म के प्रोटीन ड्रिंक और अन्य उत्पाद धड़ल्ले से उपलब्ध हैं, जिन्हें शरीर में प्रोटीन की कमी दूर करने के बड़े-बड़े दावों के साथ बेचा जाता है। इस बीच, अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक ओपीडी में आने वाले रोगियों और युवाओं को डॉक्टर महंगे बाजारू उत्पादों के बजाय घर की सामान्य और पारंपरिक चीजों से ही प्रोटीन की जरूरतें पूरी करने की व्यावहारिक सलाह दे रहे हैं।
मोबाइल ऐप्स से डाइट का हिसाब रख रही नई पीढ़ी
अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहीं होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि आजकल के बच्चों में एक नया चलन तेजी से पनपा है, जहां वे दिनभर में ली जाने वाली प्रोटीन की मात्रा का बारीकी से हिसाब रखते हैं। कई बच्चे अपने स्मार्टफोन में मौजूद अलग-अलग तरह की फिटनेस ऐप्स के माध्यम से अपनी रोजाना की डाइट और कैलोरी का रिकॉर्ड मेंटेन करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शरीर के समुचित विकास और कामकाज के लिए प्रोटीन बेहद आवश्यक पोषक तत्व है, लेकिन इसकी आपूर्ति के लिए हर समय बाजार पर निर्भर रहना या मिलने वाले हर नए उत्पाद को आजमाना बिल्कुल भी उचित कदम नहीं है।
बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के प्रोटीन ड्रिंक का सेवन खतरनाक
डॉ. रजिता का कहना है कि बाजार में मिलने वाले कई प्रोटीन ड्रिंक्स में तमाम तरह के अन्य केमिकल और कृत्रिम पदार्थ मिलाए जाते हैं, जिनका हर व्यक्ति के शरीर पर असर अलग-अलग हो सकता है। शुरुआती दौर में इन उत्पादों के सेवन से शरीर या मसल्स में कुछ त्वरित बदलाव या निखार तो नजर आ सकता है, लेकिन किसी पेशेवर या विशेषज्ञ की सलाह के बिना लंबे समय तक ऐसे सप्लीमेंट्स का उपयोग करना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी साझा किया कि कई लोग जिम जाना बंद करने या अचानक प्रोटीन ड्रिंक छोड़ देने के बाद शरीर में अत्यधिक कमजोरी और सुस्ती जैसी समस्याओं की शिकायत लेकर अस्पताल की ओपीडी में सलाह लेने पहुंच रहे हैं।
पनीर और सोयाबीन से आसानी से पूरी होगी प्रोटीन की कमी
चिकित्सक ने स्पष्ट किया कि शरीर की प्रोटीन संबंधी अधिकांश जरूरतों को घर की रसोई में पहले से मौजूद साधारण खाद्य पदार्थों के जरिए बहुत आसानी से पूरा किया जा सकता है। विशेष रूप से शाकाहारी खानपान अपनाने वाले लोगों के लिए पनीर और सोयाबीन प्रोटीन के बेहद उत्कृष्ट और समृद्ध स्रोत माने जाते हैं। इसके अलावा शुद्ध दूध और दूध से बनने वाली अन्य चीजों को भी अपनी नियमित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। इसके साथ ही, हरी पत्तेदार सब्जियां शरीर को अन्य कई जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स जैसे पोषक तत्व उपलब्ध कराने में बेहद मददगार साबित होती हैं।
सुबह की डाइट में शामिल करें भीगे हुए चने और सलाद
डॉक्टर ने सुझाव दिया कि रोजाना के भोजन में लगभग 100 ग्राम पनीर को शामिल किया जा सकता है, जो पोषण के लिहाज से बहुत फायदेमंद है। यदि किसी को पनीर का स्वाद या रूप पसंद नहीं है तो वे इसके एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सोयाबीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा रात के समय पानी में भिगोकर रखे गए काले चनों को अगली सुबह खाने की आदत डालना सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी हो सकता है। भीगे हुए चने के साथ थोड़ा सा ताजा सलाद मिलाकर सुबह के वक्त एक बेहद पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर ब्रेकफास्ट तैयार किया जा सकता है।
पारंपरिक और प्राकृतिक डाइट से मिलता है भरपूर पोषण
डॉ. रजिता ने पुराने दौर का जिक्र करते हुए कहा कि पहले के समय में लोग रोजाना चने जैसी आम और सुलभ चीजों का नियमित सेवन करते थे और उनकी जीवनशैली व खानपान काफी हद तक पूरी तरह प्राकृतिक हुआ करता था। आज के समय में भी यदि बच्चे अपनी रोजमर्रा की डाइट में एक कटोरी चने को जगह दें और संतुलित भोजन करें तो उन्हें बिना किसी बाहरी सप्लीमेंट के भरपूर पोषण मिल सकता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर इंसान के शरीर की प्रोटीन की आवश्यकता उसकी उम्र, वजन, शारीरिक सक्रियता और स्वास्थ्य की स्थिति के आधार पर अलग-अलग होती है।
संतुलित भोजन और डॉक्टर की सलाह है सबसे बेहतर
यही वजह है कि किसी भी प्रकार का कृत्रिम प्रोटीन सप्लीमेंट या हाई-प्रोटीन डाइट शुरू करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा सबसे समझदारी भरा कदम होता है। संक्षेप में कहें तो मोबाइल एप्लीकेशंस के जरिए प्रोटीन का सटीक हिसाब-किताब लगाने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण यह है कि आपकी थाली में रखा हुआ खाना पौष्टिक हो, संतुलित हो और शरीर की वास्तविक जरूरतों के बिल्कुल अनुकूल हो।



















