फिरोजाबाद में मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही मौसमी बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। इस समय शहर में वायरल फीवर का जबरदस्त प्रकोप देखने को मिल रहा है, जिसकी चपेट में आकर बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ रहे हैं। हर तरफ लोग सर्दी, जुकाम, बदन दर्द और गले की समस्याओं से जूझते नजर आ रहे हैं। इस बढ़ते संक्रमण के चलते स्थानीय अस्पतालों में मरीजों का तांता लगा हुआ है। हालात यह हैं कि सरकारी अस्पतालों में हर रोज सैकड़ों की संख्या में लोग इस वायरल फीवर की परेशानी से राहत पाने के लिए दवा लेने पहुंच रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा विशेषज्ञों ने लोगों को एहतियात बरतने की विशेष सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही इस संक्रमण के शुरुआती लक्षण महसूस हों, बिना किसी देरी के डॉक्टर से परामर्श लेकर दवा शुरू कर देनी चाहिए। इस वायरल से सुरक्षित रहने के लिए कई अन्य जरूरी बचाव के तरीके भी सुझाए गए हैं, जिनका पालन करके इस बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार सर्दी, बुखार और गले में तकलीफ जैसी दिक्कतें महसूस हो रही हैं, तो इसे सामान्य मौसमी समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह उसी वायरल का रूप हो सकता है जो इन दिनों पैर पसार रहा है।
संक्रमण से बचाव और उचित दूरी ही है इसका सबसे बड़ा इलाज
फिरोजाबाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. मनोज कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरा मौसम वायरल फीवर के अनुकूल होता है और इस दौरान वायरस बहुत तेजी से फैलता है। यह संक्रामक बीमारी एक व्यक्ति से बहुत आसानी से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाती है। इस मौसमी संक्रमण की शुरुआत मुख्य रूप से सर्दी और तेज बुखार के साथ होती है। यदि परिवार के किसी भी सदस्य को जुकाम या सर्दी की शिकायत है, तो उससे उचित दूरी बनाकर रखना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, दिनभर में किसी भी चीज को छूने के बाद अपने हाथों को साबुन या सैनिटाइज़र से अच्छी तरह साफ करना चाहिए। अगर शरीर में लगातार दर्द बना हुआ है या कमजोरी महसूस हो रही है, तो तुरंत किसी योग्य चिकित्सक के पास जाकर जांच करानी चाहिए।
यह वायरस आपसी संपर्क से काफी तेजी से फैलता है, जैसे कि किसी संक्रमित व्यक्ति के गले मिलने से, हाथ मिलाने से या फिर उसके आस-पास के वातावरण में ज्यादा देर तक रहने से भी यह दूसरों को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। यही वजह है कि शरीर में किसी भी प्रकार की अस्वस्थता महसूस होते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। डॉ. मनोज कुमार ने यह भी बताया कि इस वायरल फीवर में मरीजों को तेज बुखार का सामना करना पड़ता है और यह बुखार आमतौर पर करीब सात से आठ दिनों तक शरीर में बना रहता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति इस संक्रमण की चपेट में आ जाता है, तो उसे पूरी कोशिश करनी चाहिए कि वह खुद को दूसरों के संपर्क से दूर रखे। इस बीमारी का असर धीरे-धीरे ही कम होता है, इसलिए संयम बरतना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बहुत आवश्यक है।
प्लेटलेट्स गिरने का खतरा और अस्पतालों में बढ़ती भीड़
वरिष्ठ फिजीशियन ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि इस समय वायरल फीवर का संक्रमण बहुत आक्रामक तरीके से फैल रहा है और फिरोजाबाद में अधिकांश लोग इसी से प्रभावित हो रहे हैं। लगातार कई दिनों तक बुखार बने रहने के कारण मरीजों के शरीर में प्लेटलेट्स कम होने का बड़ा खतरा रहता है। कई बार लोग बुखार आते ही खुद से ही प्लेटलेट्स बढ़ाने वाली दवाइयां या नुस्खे आजमाने लगते हैं, जो बिना डॉक्टर की सलाह और मेडिकल जांच के काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इस वायरल फीवर की वजह से शरीर के अंदर अत्यधिक कमजोरी भी आ जाती है, जिससे उबरने में समय लगता है।
वर्तमान स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले सरकारी अस्पताल में रोजाना करीब 400 मरीजों की ओपीडी दर्ज की जा रही है। शहर के साथ-साथ दूर-दराज के इलाकों से भी मरीज वायरल फीवर की गंभीर समस्या लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसलिए चाहे आप अपने घर पर हों या फिर अपने दफ्तर या कार्यस्थल पर, इस खतरनाक वायरस की चपेट में आने से बचना बहुत जरूरी है। अपने आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी या बुखार होने की स्थिति में कभी भी खुद से अपना इलाज न करें, बल्कि हमेशा पेशेवर चिकित्सा सहायता लें।



















