हरियाणा के अंबाला में लगातार हो रही बारिश और बदलते मौसम के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ गया है। बारिश के बाद वातावरण में नमी का स्तर बढ़ गया है और कई जगहों पर जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई है। दूषित पानी के संपर्क में आने से संक्रामक रोग फैल रहे हैं। अंबाला जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में हर दिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक भीड़ सामान्य ओपीडी और त्वचा रोग विभाग में देखी जा रही है, जहां मरीज खांसी, जुकाम, बुखार, गले के संक्रमण, चर्म रोग और आंखों से संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए आ रहे हैं।
वायरल बुखार और सांस से जुड़ी तकलीफों में इजाफा
अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने बताया कि मौसम में आए इस अचानक बदलाव की वजह से वायरल संक्रमण के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में खांसी, बहती नाक और तेज बुखार के लक्षण मुख्य रूप से देखे जा रहे हैं। डॉ. रजिता का कहना है कि बदलते मौसम में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर पड़ता है, जिससे संक्रामक वायरस आसानी से लोगों को शिकार बना लेते हैं। इस समय थोड़ी सी असावधानी भी किसी को बीमार कर सकती है।
सुरक्षित खानपान और उबले पानी के सेवन की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मौसम में अपनी जीवनशैली और खानपान की आदतों में बदलाव करने की सख्त जरूरत जताई है। डॉ. रजिता के अनुसार, पीने के पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बारिश के दिनों में जल आपूर्ति स्रोतों में गंदगी मिलने की संभावना रहती है, इसलिए पानी को अच्छी तरह उबालकर ठंडा करके पीना ही सबसे सुरक्षित उपाय है। इसके अलावा, हाथों को बार-बार साबुन और पानी से साफ करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बारिश में भीग जाता है, तो उसे ज्यादा देर तक गीले कपड़ों में नहीं रहना चाहिए और तुरंत सूखे कपड़े पहनने चाहिए।
सड़क किनारे के खाने और तली-भुनी चीजों से बनाएं दूरी
बारिश के मौसम में पेट और गले के संक्रमण का जोखिम बहुत ज्यादा होता है। चिकित्सक ने साफ तौर पर हिदायत दी है कि बाहर के खाद्य पदार्थों और अत्यधिक तली-भुनी चीजों के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए। खुले में बिकने वाले भोजन पर मक्खियों और बैक्टीरिया का जमावड़ा होता है, जो पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। संतुलित, सुपाच्य और ताजा बना भोजन ही इस मौसम में शरीर को स्वस्थ रख सकता है।
बच्चों में बैक्टीरिया और बड़ों में फंगल इंफेक्शन का खतरा
त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी इस मानसून में तेजी से फैली हैं। डॉ. रजिता ने स्पष्ट किया कि बच्चों और वयस्कों में त्वचा संक्रमण के रूप अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं। बच्चों में मुख्य रूप से बैक्टीरिया से होने वाले त्वचा रोग देखने को मिल रहे हैं, जबकि वयस्कों में फंगल इंफेक्शन के मामले ज्यादा आ रहे हैं। हवा में अत्यधिक नमी, अधिक पसीना आना, लंबे समय तक पसीने या बारिश से गीले कपड़े पहने रहना और त्वचा की सही सफाई न करना इसके मुख्य कारण हैं। इससे बचने के लिए सूती और ढीले कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। साथ ही शरीर को हमेशा साफ और सूखा रखना जरूरी है। व्यक्तिगत इस्तेमाल की चीजें जैसे तौलिया, रुमाल और कपड़े एक-दूसरे से साझा नहीं करने चाहिए।
गले की खराश के उपाय और घरेलू नुस्खे
यदि किसी व्यक्ति को गले में हल्की खराश या खिचखिच महसूस हो रही है, तो वह गुनगुने पानी में थोड़ा नमक मिलाकर गरारे कर सकता है। शरीर में पानी की कमी न होने दें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें। सामान्य सर्दी और जुकाम से राहत पाने के लिए अदरक, तुलसी और काली मिर्च से तैयार गर्म पेय का सेवन किया जा सकता है। रात को सोने से पहले गुनगुना हल्दी वाला दूध पीना भी लाभकारी माना जाता है।
खुद से दवा लेने से बचें, 5 रुपये में पाएं डॉक्टर का परामर्श
डॉ. रजिता ने चेतावनी दी है कि घरेलू नुस्खों को बीमारी का स्थायी इलाज नहीं मानना चाहिए। यदि मरीज को तेज बुखार है, सांस लेने में परेशानी हो रही है, लगातार खांसी आ रही है या त्वचा का संक्रमण बढ़ रहा है, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। खुद से मेडिकल स्टोर से दवाएं लेकर खाना खतरनाक साबित हो सकता है। अंबाला नागरिक अस्पताल में मरीज मात्र 5 रुपये की पर्ची बनवाकर अनुभवी डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं। डॉक्टर की सलाह, साफ-सफाई और सही खानपान ही इस मौसम में बीमारियों से बचाव का सबसे कारगर तरीका है।



















