अक्सर ढलती शाम के पहर चाय की चुस्कियों के साथ मन किसी बेहद जायकेदार और करारे नाश्ते की मांग करने लगता है। ऐसे में बाजार के तले-भुने पकवानों में इस्तेमाल होने वाले मैदे को लेकर मन में संकोच रहता है। यदि आप भी स्वाद से समझौता किए बिना अपनी रसोई में उपलब्ध सामान्य चीजों से कुछ खास बनाना चाहते हैं, तो साबुत गेहूं के आटे से तैयार की जाने वाली खस्ता आलू कचौरी सबसे मुफीद चयन साबित होती है। इसकी बाहरी परत बेहद कुरकुरी बनती है जबकि इसके भीतर भरा गया चटपटा भरावन हर निवाले को खास बना देता है।
कचौरी तैयार करने के लिए जरूरी सामान
इस नमकीन व्यंजन को तैयार करने के लिए रसोई में मिलने वाले बुनियादी मसालों और सामग्रियों की ही दरकार होती है। कचौरी की बाहरी परत और अंदरूनी भरावन के लिए आपको निम्नलिखित चीजें चाहिए
- गेहूं का आटा: दो कप
- बारीक सूजी: दो बड़े चम्मच, जो परत को अतिरिक्त कुरकुरापन देती है
- मोयन हेतु तेल अथवा शुद्ध घी: चार बड़े चम्मच
- अजवाइन: आधा छोटा चम्मच
- उबले आलू: तीन मध्यम आकार के
- बारीक कतरी हरी मिर्च: दो नग
- अदरक व लहसुन का तैयार पेस्ट: एक छोटा चम्मच
- पिसा धनिया: एक चम्मच
- पिसी लाल मिर्च: आधा छोटा चम्मच
- पिसा गरम मसाला: आधा छोटा चम्मच
- खटाई हेतु अमचूर चूर्ण अथवा चाट मसाला: एक छोटा चम्मच
- कसूरी मेथी: एक छोटा चम्मच
- बारीक कटा ताजा हरा धनिया: इच्छानुसार
- नमक: स्वादानुसार
- तलने और भरावन पकाने के लिए तेल: जरूरत के मुताबिक
परत के लिए सख्त आटा गूंथना
सबसे पहले किसी फैले हुए गहरे बर्तन में दो कप गेहूं का आटा निकालें। इसमें दो बड़े चम्मच सूजी, आधी छोटी चम्मच अजवाइन को हथेलियों से रगड़कर और स्वादानुसार नमक डाल दें। अब इसमें चार बड़े चम्मच गर्म तेल अथवा घी का मोयन डालकर दोनों हाथों से अच्छी तरह मिलाते हुए मसलें। मिश्रण को तब तक मिलाएं जब तक कि मुट्ठी बांधने पर आटा बंधने न लगे। इसके उपरांत थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी छिड़कते हुए पूरी की तरह कड़ा आटा तैयार कर लें। इस गूंथे हुए आटे को कपड़े अथवा ढक्कन से ढंककर लगभग पंद्रह मिनट के लिए एक तरफ रख दें ताकि सूजी फूलकर आटे में पूरी तरह सेट हो जाए।
मसालेदार आलू का भरावन बनाना
जब तक आटा आराम कर रहा है, कचौरी के भीतर भरने के लिए आलू का तीखा मसाला तैयार करें। एक कड़ाही अथवा पैन में एक छोटा चम्मच तेल डालकर हल्का गर्म करें। तेल में अदरक-लहसुन का पिसा पेस्ट और बारीक कतरी हरी मिर्च डालकर धीमी आंच पर कुछ पल चलाएं। अब इसमें पिसा धनिया, लाल मिर्च, गरम मसाला और अमचूर पाउडर डालें और धीमी आंच पर चंद सेकेंड भूनें ताकि मसाले जलें नहीं। इसके बाद तीनों उबले आलुओं को हाथ से अच्छी तरह मसलकर कड़ाही में डाल दें, साथ ही कसूरी मेथी और स्वादानुसार नमक मिला लें। दो से तीन मिनट तक इस मिश्रण को चलाते हुए अच्छी तरह भूनें। अंत में बारीक कटा हरा धनिया डालकर आंच बंद कर दें और इस मसाले को किसी प्लेट में निकालकर ठंडा होने दें।
कचौरी को भरना और तलने की कला
तैयार आटे को एक बार पुनः मसल लें और उससे छोटी-छोटी लोइयां काट लें। एक लोई उठाकर हथेली के सहारे किनारों से दबाते हुए बीच में गड्ढा करके एक कटोरीनुमा आकार दें। अब तैयार आलू के मिश्रण से छोटी सी गोली बनाकर इस कटोरी के केंद्र में रखें। किनारों को ऊपर की ओर खींचते हुए आपस में मजबूती से जोड़कर सील कर दें ताकि तलते समय मसाला बाहर न निकले। अब इसे अपनी दोनों हथेलियों के बीच रखकर हल्के हाथ से चपटा कर लें। ध्यान रखें कि बेलन का अधिक जोर न लगाएं अन्यथा कचौरी फट सकती है।
धीमी आंच पर तलकर परोसना
कड़ाही में पर्याप्त मात्रा में तेल डालकर मध्यम आंच पर रखें। ध्यान रहे कि तेल अत्यधिक खौलता हुआ नहीं होना चाहिए, बल्कि मध्यम गर्म ही रहे। अब धीमी आंच पर कचौरी को तेल में डालें। इसे तुरंत पलटने की जल्दबाजी न करें; जब कचौरी तैरकर ऊपर आने लगे, तब हल्के हाथ से उलटें-पलटें। धीमी आंच पर दोनों तरफ से तब तक सेंकें जब तक कि उसका रंग खूबसूरत सुनहरा और परत पूरी तरह खस्ता न हो जाए। तैयार गरमा-गरम कचौरी को पुदीना-धनिया की तीखी चटनी, इमली की सोंठ और अदरक वाली चाय के साथ परोसें।


















