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गोरखपुर के जिला महिला अस्पताल में एआई मशीन से रक्त और पेशाब की जांच शुरू, निजी लैब का खर्च बचेगास्वास्थ्य
28 अग॰ 2026, 4:22 pm (60 दिन पहले)· 3

गोरखपुर के जिला महिला अस्पताल में एआई मशीन से रक्त और पेशाब की जांच शुरू, निजी लैब का खर्च बचेगा

गोरखपुर के जिला महिला अस्पताल में 38 लाख रुपये की आधुनिक एआई मशीन लगाई गई है, जिससे ब्लड और यूरिन जांच की रिपोर्ट अब बेहद कम समय में मिल सकेगी।

गोरखपुर के जिला महिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अस्पताल में बीमारियों का समय पर और सटीक इलाज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वचालित पैथोलॉजी जांच प्रणाली की शुरुआत की गई है। इस नई तकनीक के आने से मरीजों को अब गंभीर बीमारियों से जुड़ी जांचों के लिए निजी पैथोलॉजी सेंटरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और न ही भारी भरकम फीस चुकानी पड़ेगी।

सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में तकनीकी बदलाव के तहत जिला महिला अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में सिक्सटपल एआई-100 नाम का अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किया गया है। आमतौर पर जिन जटिल और महत्वपूर्ण रक्त तथा मूत्र संबंधी जांचों के लिए सामान्य नागरिकों को निजी जांच केंद्रों पर 500 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ता था, वे तमाम जांच सुविधाएं अब इस सरकारी अस्पताल में बेहद सुलभ तरीके से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को सीधी वित्तीय राहत मिल रही है।

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स्वचालित माइक्रोस्कोपिक जांच से घटेगा रिपोर्ट का इंतजार

अस्पताल परिसर के पैथोलॉजी कक्ष में लगाई गई यह आधुनिक मशीन रक्त और यूरिन के नमूनों की माइक्रोस्कोपिक जांच पूरी तरह से स्वचालित मोड में करती है। जब प्रयोगशाला तकनीशियन सैंपल की स्लाइड को मशीन के अंदर रखते हैं, तो यह आधुनिक सेंसर की मदद से उसकी बेहद उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल इमेज तैयार कर लेती है। इसके बाद जांच से संबंधित संपूर्ण विश्लेषणात्मक डेटा और तस्वीरें बिना किसी विलंब के संबंधित पैथॉजिस्ट के मोबाइल फोन पर तुरंत ट्रांसफर कर दी जाती हैं।

अस्पताल के एसआईसी डॉ. अनिल झा के अनुसार, इस एआई संचालित उपकरण के जरिए एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी की अलग-अलग श्रेणियों और स्टेजों की जांच के साथ-साथ कई अन्य आवश्यक पैथोलॉजिकल पैरामीटर्स का सटीक आकलन किया जा रहा है। इस नई प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि डॉक्टरों और तकनीशियनों को माइक्रोस्कोप के सामने बैठकर घंटों तक स्लाइड का अध्ययन नहीं करना पड़ता। पुरानी पारंपरिक व्यवस्था में जहां मरीज को जांच रिपोर्ट हासिल करने के लिए कई घंटे या कभी-कभी पूरे 24 घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी, वहीं अब इस प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी घट गया है। आपातकालीन स्थिति में आने वाले गंभीर मरीजों के लिए महज एक घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट तैयार कर उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।

38 लाख की लागत और 11 अन्य केंद्रों पर विस्तार की योजना

स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस आधुनिक मशीन को स्थापित करने में लगभग 38 लाख रुपये की राशि खर्च की गई है। फिलहाल इसे एक शुरुआती मॉडल के रूप में जिला महिला अस्पताल में चालू किया गया है, ताकि इसके व्यावहारिक परिणामों और उपयोगिता का मूल्यांकन किया जा सके। शुरुआती परीक्षण अवधि के दौरान इसके सकारात्मक रिस्पॉन्स को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग भविष्य में ऐसी 11 और एआई मशीनें खरीदने की तैयारी में है। इन नई मशीनों को जिले तथा आसपास के विभिन्न प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थापित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और दूर-दराज के मरीजों को भी इस सुविधा का लाभ मिल सके।

अस्पताल में स्थापित इस नई तकनीक के कामकाज और गुणवत्ता का जमीनी स्तर पर जायजा लेने के लिए खुद डीएम दीपक मीणा ने पैथोलॉजी विभाग का दौरा किया। उन्होंने मशीन के संचालन की गति, रिपोर्ट की सटीकता और स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वर्तमान में प्रशासनिक स्तर पर इस मशीन से रोजाना होने वाली जांचों की नियमित रूप से निगरानी की जा रही है। शुरुआती दौर में इस मशीन के माध्यम से प्रतिदिन 15 से 20 सैंपल की जांच की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे इस तकनीक का दायरा बढ़ेगा, वैसे-वैसे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गति और विश्वसनीयता में बहुत बड़ा सुधार आएगा।

सवाल-जवाब

गोरखपुर जिला महिला अस्पताल में कौन सी नई मशीन लगाई गई है?
अस्पताल में 'सिक्सटपल एआई-100' नाम की आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पैथोलॉजी मशीन लगाई गई है।
इस नई एआई मशीन से मरीजों को कितना आर्थिक फायदा होगा?
निजी पैथोलॉजी सेंटरों में जिन जांचों के लिए 500 रुपये से 3,000 रुपये तक खर्च होते थे, वे अब सरकारी अस्पताल में उपलब्ध होने से मरीजों का यह खर्च बचेगा।
आपातकालीन स्थिति में जांच रिपोर्ट कितने समय में मिल जाएगी?
इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को महज एक घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
एआई मशीन से जांच की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
मशीन सैंपल स्लाइड की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल इमेज तैयार करती है और पूरी जानकारी पैथॉजिस्ट के मोबाइल पर तुरंत भेज देती है, जिससे समय बचता है।
इस एआई मशीन को लगाने में कितनी लागत आई है और आगे क्या योजना है?
इस मशीन की लागत करीब 38 लाख रुपये है और शुरुआती परिणाम देखकर स्वास्थ्य विभाग की योजना 11 और ऐसी मशीनें अन्य सेंटरों पर लगाने की है।
फिलहाल इस मशीन से रोजाना कितनी जांच की जा रही हैं?
शुरुआत में रोजाना 15 से 20 सैंपल की जांच की जा रही है और प्रशासन द्वारा रोजाना इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है।
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