हार्ट अटैक या हृदय संबंधी समस्याओं को आमतौर पर पुरुषों की स्वास्थ्य समस्या मान लिया जाता है, लेकिन महिलाएं भी इस गंभीर खतरे की चपेट में उतनी ही आसानी से आ सकती हैं। अक्सर महिलाओं में दिल के दौरे के दौरान वह पारंपरिक सीने का तेज दर्द महसूस नहीं होता जिसे आमतौर पर इस आपात स्थिति से जोड़कर देखा जाता है।
इस गंभीर विषय पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से गुवाहाटी के पियरलैस हॉस्पिटल ने महिलाओं से आग्रह किया है कि वे दिल की बीमारी के उन लक्षणों को समय रहते पहचानें जो आमतौर पर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। विशेष रूप से मेनोपॉज के दौरान और उसके बाद महिलाओं को अपने कार्डियोवैस्कुलर जोखिमों को बहुत गंभीरता से समझना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
असामान्य थकान और अन्य छिपे हुए लक्षण
पियरलैस हॉस्पिटल गुवाहाटी की कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. चंद्रामा दास ने बताया कि महिलाओं में दिल की बीमारी के लक्षण कई बार बहुत सामान्य और अलग तरह के होते हैं। उन्होंने कहा कि असामान्य थकान, सांस लेने में तकलीफ, पीठ, कंधे, गर्दन या जबड़े में असहजता, एसिडिटी, सीने में जलन, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, हल्कापन महसूस होना, मितली, पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे संकेत कभी-कभी हृदय संबंधी समस्याओं का परिणाम हो सकते हैं और इन्हें कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
डॉ. चंद्रामा का यह भी मानना है कि यूं तो महिलाओं को अपने पूरे जीवन में हृदय के स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन मेनोपॉज का चरण इन जोखिमों का दोबारा आकलन करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य छिपे हुए जोखिम कारकों का भी जिक्र किया जिन्हें अक्सर लोग भूल जाते हैं।
गर्भावस्था से जुड़े और अन्य छिपे जोखिम
चिकित्सक के अनुसार पीसीओएस, 40 वर्ष की आयु से पहले मेनोपॉज होना, प्री-एक्लेमप्सिया, गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, जेस्टेशनल डायबिटीज, समय से पहले प्रसव, धूम्रपान और थायराइड की बीमारी जैसे कई कारक दिल के खतरे को बढ़ा सकते हैं। डॉ. चंद्रामा ने विशेष तौर पर जोर देते हुए कहा कि प्री-एक्लेमप्सिया, जेस्टेशनल हाइपरटेंशन और जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं को बच्चा होने के बाद भूल नहीं जाना चाहिए। ये समस्याएं भविष्य में हृदय रोगों के बड़े संकेत बन सकती हैं और लंबे समय तक स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा रहनी चाहिए।
हृदय की धमनियों में हमेशा बड़ा ब्लॉकेज होना ही दिल की बीमारी का एकमात्र कारण नहीं होता है। कोरोनरी माइक्रोवास्कुलर डिसफंक्शन, वैसोस्पैस्टिक एनजाइना और स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन यानी एससीएडी जैसी स्थितियां भी बिना किसी पारंपरिक धमनी रुकावट के दिल के लक्षण पैदा कर सकती हैं।
जागरूकता और शुरुआती निदान की जरूरत
पियरलैस हॉस्पिटल गुवाहाटी के सीईओ डॉ. गौतम कुमार दास ने महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं जोखिम वाले कारकों और चेतावनी भरे संकेतों के प्रति जागरूक रहें, तो बीमारी का शुरुआती दौर में ही पता लगाकर समय पर सही इलाज शुरू किया जा सकता है।
डॉ. गौतम दास ने आगे कहा कि दुनिया की कुल आबादी का लगभग आधा हिस्सा महिलाओं का है, फिर भी उनके हृदय स्वास्थ्य पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता जितना मिलना चाहिए। दिल की बीमारी केवल पुरुषों की समस्या नहीं है और महिलाओं में इसके खतरों व लक्षणों की जानकारी होना बेहद जरूरी है ताकि कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम किया जा सके।
गुवाहाटी का पियरलैस हॉस्पिटल हृदय देखभाल की व्यापक सुविधाएं प्रदान करता है। इसमें इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, कोरोनरी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी, इकोकार्डियोग्राफी, हार्ट फेलियर और एरिथमिया का प्रबंधन, पेसमेकर और एआईसीडी इम्प्लांटेशन के साथ-साथ क्रिटिकल और आपातकालीन कार्डियक केयर भी शामिल है।



















