गंभीर बीमारियों से बचाव और लंबे समय तक निरोगी रहने के लिए किसी एक उपाय या नुस्खे पर निर्भर रहना काफी नहीं होता है। संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक व्यायाम, पूरी नींद और तंबाकू या शराब से परहेज जैसी आदतें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती हैं। आज के समय में लोग अपनी रोजाना की खुराक में ऐसे प्राकृतिक तत्वों को शामिल करने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और सक्रिय बायोएक्टिव घटक पाए जाते हैं। ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार ने इस बात पर जोर दिया है कि रसोई में आसानी से मिलने वाले मसाले और जड़ी-बूटियां शरीर की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में अहम योगदान देते हैं।
रसोई के पारंपरिक मसाले और उनकी अहमियत
भारतीय घरों में हल्दी, अंबा हल्दी, अदरक, लहसुन, नीम, तुलसी और दालचीनी का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। यह केवल स्वाद बढ़ाने वाले मसाले नहीं हैं, बल्कि इनके औषधीय गुणों पर विभिन्न वैज्ञानिक अनुसंधान भी किए गए हैं। हल्दी में करक्यूमिन नाम का प्रमुख सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जिसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर दुनिया भर में व्यापक परीक्षण हुए हैं। प्रयोगशालाओं में किए गए अध्ययनों से यह सामने आया है कि करक्यूमिन में सूजन घटाने और कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने वाले शक्तिशाली गुण होते हैं, जिससे यह सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी बन जाता है।
अंबा हल्दी और अदरक के औषधीय गुण
डॉ. राजकुमार के अनुसार अंबा हल्दी का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में खास तौर पर किया जाता रहा है। इसमें मौजूद प्राकृतिक सक्रिय घटक एंटीऑक्सीडेंट क्षमता को बढ़ाते हैं, जिससे शरीर के ऊतकों को नुकसान से बचाया जा सकता है। इसी तरह अदरक भी हर घर में चाय, सब्जी और काढ़े के माध्यम से इस्तेमाल किया जाता है। अदरक के अंदर जिंजरोल नामक सक्रिय यौगिक मौजूद रहता है। विभिन्न वैज्ञानिक शोधों में यह पुष्टि हुई है कि जिंजरोल शरीर की पुरानी सूजन को कम करने में असरदार है। इसके अतिरिक्त, कुछ प्रयोगशाला परीक्षणों में अदरक के इन यौगिकों ने कैंसर की अवांछित कोशिकाओं के विकास पर भी रोकथाम का प्रभाव दर्शाया है।
लहसुन, नीम और तुलसी का सुरक्षा कवच
लहसुन में पाए जाने वाले गंधक यानी सल्फर यौगिक स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद असरदार माने जाते हैं। इनमें सबसे मुख्य यौगिक एलिसिन है, जिसकी क्रियाशीलता पर वैज्ञानिकों ने कई बार शोध किए हैं। अनेक अध्ययनों में लहसुन के नियमित सेवन और कुछ विशिष्ट प्रकार के कैंसर के जोखिम में कमी के बीच संबंध दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में नीम और तुलसी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इन दोनों औषधीय पौधों में अनेक जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की विभिन्न प्रणालियों को शुद्ध और सुरक्षित रखने में कारगर साबित होते हैं।



















