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डेंगू में बुखार उतरते ही क्यों बढ़ जाता है बच्चों के लिए खतरा? जानिए फोर्टिस गुरुग्राम की डॉ. नेहा रस्तोगी की सलाहस्वास्थ्य
28 अग॰ 2026, 10:20 am (1 घंटे पहले)· 3

डेंगू में बुखार उतरते ही क्यों बढ़ जाता है बच्चों के लिए खतरा? जानिए फोर्टिस गुरुग्राम की डॉ. नेहा रस्तोगी की सलाह

डेंगू बुखार कम होने पर अक्सर माता-पिता राहत की सांस लेते हैं, लेकिन असली खतरा बुखार उतरने के 24 से 48 घंटों में होता है। फोर्टिस गुरुग्राम की डॉ. नेहा रस्तोगी से जानिए रिकवरी के दौरान बच्चों की सही देखभाल और जरूरी सावधानियां।

मानसून के मौसम में मच्छर जनित बीमारियों में डेंगू बुखार सबसे प्रमुख और खतरनाक माना जाता है। इस मौसम में बड़ी संख्या में छोटे बच्चे इसकी चपेट में आते हैं। डेंगू के इलाज के दौरान अक्सर देखा जाता है कि जब बच्चे का तेज बुखार कम होने या उतरने लगता है, तो माता-पिता काफी राहत महसूस करते हैं और यह समझ लेते हैं कि बच्चा अब खतरे से बाहर है और तेजी से ठीक हो रहा है। हालांकि, संक्रामक रोग विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है। डेंगू बीमारी का असली और सबसे संवेदनशील जोखिम बुखार के दौरान नहीं, बल्कि बुखार खत्म होने के ठीक बाद के 24 से 48 घंटों में शुरू होता है। यही वह नाजुक चरण होता है जब बच्चे के शरीर में अंदरूनी बदलाव आते हैं, इसलिए इस समय सतर्कता कम करने के बजाय निगरानी और भी अधिक बढ़ा देनी चाहिए। इस संदर्भ में फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम के संक्रामक रोग विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नेहा रस्तोगी ने विस्तृत जानकारी दी है कि बुखार उतरने के बाद जोखिम क्यों बढ़ जाता है और माता-पिता को किन मुख्य बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

बुखार उतरने के बाद का नाजुक समय और शरीर पर प्रभाव

डेंगू के प्राथमिक चरण में बच्चे को अचानक तेज बुखार आना, सिर में तेज दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में ऐंठन, उल्टी महसूस होना या बहुत अधिक शारीरिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। आमतौर पर कुछ दिनों के बाद जब बुखार कम होने लगता है, तो अभिभावक निश्चिंत हो जाते हैं। डॉ. नेहा रस्तोगी स्पष्ट करती हैं कि केवल तापमान का सामान्य होना पूर्ण स्वास्थ्य सुधार की गारंटी नहीं है। डेंगू में बुखार उतरने के दौरान रक्त वाहिकाओं की पारगम्यता बढ़ सकती है, जिससे शरीर में मौजूद तरल पदार्थ वाहिकाओं से बाहर रिसने लगता है। इस प्लाज्मा लीकेज के कारण बच्चे के शरीर में ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है और अंगों तक रक्त का संचार प्रभावित हो सकता है। यदि इस स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता न मिले तो यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है।

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रिकवरी के दौरान दिखने वाले गंभीर चेतावनी संकेत

बुखार उतरने के 24 से 48 घंटों की अवधि में बच्चे के व्यवहार, खान-पान और शारीरिक गतिविधि पर निरंतर ध्यान देना अनिवार्य है। माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चा पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ ले रहा है या नहीं और उसकी पेशाब की आवृत्ति सामान्य है या नहीं। यदि बच्चा अत्यधिक सुस्त दिख रहा हो, बार-बार उल्टी कर रहा हो या उसे पेट में लगातार तेज दर्द की शिकायत हो, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त मसूड़ों या नाक से हल्का खून आना, सांस लेने में तकलीफ या तेजी से सांस लेना, त्वचा का अत्यधिक ठंडा या पीला पड़ना, चक्कर आना, बेहोशी जैसी स्थिति बनना या अचानक बहुत अधिक कमजोरी आ जाना डेंगू के गंभीर खतरे के संकेत हैं। ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए तुरंत निकटतम अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

प्लेटलेट्स की गिनती से जुड़े भ्रम और जांच की सही प्रक्रिया

हमारे समाज में डेंगू के दौरान केवल प्लेटलेट्स की संख्या पर अत्यधिक ध्यान देने की प्रवृत्ति पाई जाती है, जो कि सही दृष्टिकोण नहीं है। डॉक्टर केवल प्लेटलेट्स रिपोर्ट के आधार पर किसी मरीज की स्थिति का अंतिम आकलन नहीं करते हैं। विशेषज्ञ बच्चे के समग्र लक्षणों, ब्लड प्रेशर के स्तर, हेमाटोक्रिट मान, पेशाब की मात्रा और अन्य आवश्यक पैथोलॉजिकल टेस्टों के आंकड़ों को मिलाकर ही स्थिति की गंभीरता तय करते हैं। कई बार प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य होने के बावजूद मरीज में प्लाज्मा लीकेज या डिहाइड्रेशन के कारण स्थिति जटिल हो सकती है। इसके अलावा डॉक्टरों की सख्त हिदायत है कि बिना डॉक्टरी परामर्श के बच्चे को प्लेटलेट्स बढ़ाने का दावा करने वाली दवाएं, घरेलू काढ़े या किसी भी प्रकार के दर्द निवारक न दें, क्योंकि ये पेट में रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

सुरक्षित स्वास्थ्य सुधार के लिए जरूरी देखभाल व टिप्स

डेंगू से पूरी तरह उबरने के लिए सही देखभाल और पर्याप्त आराम सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। रिकवरी फेज के दौरान बच्चे को पूर्ण विश्राम करने दें और उसे शारीरिक रूप से थकाने वाली गतिविधियों से दूर रखें। चिकित्सक द्वारा बताए गए निर्देशों के अनुसार बच्चे को ओआरएस, नारियल पानी, पतली छाछ, सूप और पौष्टिक आहार पर्याप्त मात्रा में देते रहें ताकि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहे। बुखार उतरने के बाद भी बच्चे को धीरे-धीरे सामान्य दिनचर्या में लौटने दें और डॉक्टर द्वारा बताए गए फॉलो-अप चेकअप को कभी न छोड़ें। डेंगू में पूर्ण सावधानी केवल बुखार रहने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बुखार उतरने के बाद के शुरुआती दो दिन बच्चों के सुरक्षित रिकवरी के लिए सबसे ज्यादा निर्णायक होते हैं।

सवाल-जवाब

क्या बच्चों का डेंगू बुखार उतरना पूरी तरह ठीक होने का संकेत है?
नहीं, बुखार उतरने के बाद के 24 से 48 घंटे सबसे संवेदनशील होते हैं जब प्लाज्मा लीकेज और ब्लड प्रेशर गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
डेंगू रिकवरी के दौरान किन लक्षणों को खतरे की घंटी मानना चाहिए?
अत्यधिक सुस्ती, लगातार उल्टी, पेट दर्द, नाक या मसूड़ों से खून आना, सांस लेने में तकलीफ और त्वचा का ठंडा पड़ना गंभीर लक्षण हैं।
क्या केवल प्लेटलेट्स काउंट देखकर बच्चे की स्थिति समझी जा सकती है?
नहीं, डॉक्टर प्लेटलेट्स के साथ-साथ ब्लड प्रेशर, हेमाटोक्रिट, पेशाब की मात्रा और शारीरिक लक्षणों का मिलाकर मूल्यांकन करते हैं।
क्या रिकवरी के समय बच्चे को दर्द निवारक दवाएं दी जा सकती हैं?
बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दर्द निवारक या प्लेटलेट्स बढ़ाने की दवा न दें, क्योंकि इससे पेट में ब्लीडिंग का जोखिम हो सकता है।
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