अक्सर लोग होंठों का रंग गहरा पड़ने पर सामान्य लिप बाम, स्क्रब या रसोई के देसी नुस्खों का सहारा लेते हैं। जब होंठों पर जिद्दी पिगमेंटेशन जम जाता है या यह समस्या काफी वक्त से बनी रहती है, तब साधारण घरेलू देखभाल से कोई खास फर्क नजर नहीं आता। ऐसी स्थिति में त्वचा विशेषज्ञ समस्या की असल वजह पहचानकर सही मेडिकल थेरेपी का सुझाव देते हैं। इन क्लिनिकल विकल्पों में खास लेजर तकनीक, हल्की प्रक्रियाएं और एलर्जी के कारणों को दूर करने वाले इलाज शामिल हैं, हालांकि हर प्रक्रिया हर व्यक्ति की त्वचा के अनुकूल नहीं होती।
क्यू-स्विच्ड एनडी लेजर तकनीक की भूमिका
होंठों के गहरे रंग को हल्का करने के लिए त्वचा विशेषज्ञ जरूरत पड़ने पर क्यू-स्विच्ड एनडी लेजर (Q-Switched Nd Laser) की मदद ले सकते हैं। यह आधुनिक लेजर बीम त्वचा के भीतर मौजूद अतिरिक्त पिगमेंट को सीधा निशाना बनाती है। डॉक्टर मरीज के होंठों की मौजूदा रंगत, स्किन टोन और पिगमेंटेशन की गहराई का बारीकी से परीक्षण करने के बाद ही यह फैसला करते हैं कि यह प्रक्रिया सुरक्षित रहेगी या नहीं। इस प्रक्रिया में मनचाहा सुधार देखने के लिए एक से ज्यादा सिटिंग्स या सेशन लेने पड़ सकते हैं। इसके परिणाम भी हर इंसान की त्वचा की प्रकृति के हिसाब से अलग-अलग आते हैं। अगर लेजर की सेटिंग में चूक हो या गलत हाथों से इलाज कराया जाए, तो होंठों पर जलन, स्थायी निशान या कालापन और ज्यादा गहरा होने का जोखिम बना रहता है।
केमिकल पील से जुड़े एहतियात
कुछ चुनिंदा और जरूरी मामलों में डर्मेटोलॉजिस्ट हल्की केमिकल पील कराने का विकल्प भी चुन सकते हैं। इस थेरेपी में खास तरह के रसायनों की मदद से होंठों की सबसे ऊपरी परत पर बहुत ही नियंत्रित प्रभाव डाला जाता है। होंठों की त्वचा चेहरे की बाकी त्वचा की तुलना में कहीं ज्यादा पतली और संवेदनशील होती है, जिसके चलते पील का प्रयोग अत्यधिक सावधानी से किया जाता है। बाजार में उपलब्ध हर तरह की केमिकल पील होंठों पर लगाने योग्य नहीं होती। अगर कोई बहुत तेज पील लगाई जाए या उसका तरीका गलत हो, तो होंठों में सूजन, तेज जलन और पिगमेंटेशन पहले से भी ज्यादा गहरा हो सकता है। इसी वजह से केमिकल पील जैसी चीजें घर पर खुद आजमाने के बजाय किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की निगरानी में ही करानी चाहिए।
एलर्जी पहचानना और दवाओं में सावधानी
यदि होंठों का कालापन किसी खास लिपस्टिक, लिप बाम या कॉस्मेटिक प्रोडक्ट से होने वाले एलर्जिक रिएक्शन और जलन की वजह से हुआ है, तो डॉक्टर सबसे पहले उस उत्तेजक कारण की पहचान कर उसे बंद करवाते हैं। इसके बाद जरूरत के आधार पर शांत करने वाली दवाएं या विशेष देखभाल की सलाह दी जाती है। बहुत से लोग चेहरे के दाग-धब्बे मिटाने वाली क्रीम होंठों पर लगाने की भूल कर बैठते हैं, जो बिल्कुल गलत है। हाइड्रोक्विनोन (Hydroquinone), ट्रेटिनॉइन (tretinoin) या स्टेरॉयड वाली ताकतवर क्रीम्स बिना डॉक्टर के पर्चे और परामर्श के होंठों पर कभी नहीं लगानी चाहिए।
दैनिक हिफाजत और धूप से बचाव
किसी भी मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ-साथ होंठों की नियमित और कोमल देखभाल जारी रखना बेहद आवश्यक है। होंठों को लगातार मॉइस्चराइज रखना चाहिए और जब भी बाहर निकलें, तो कम से कम SPF 30 या उससे अधिक क्षमता वाला सनस्क्रीन युक्त लिप बाम जरूर लगाएं। तेज खुशबू, आर्टिफिशियल फ्लेवर या जलन पैदा करने वाले रसायनों से बने लिप प्रोडक्ट्स से दूरी बनाए रखें। इसके साथ ही नींबू, बेकिंग सोडा और कठोर स्क्रब जैसे घरेलू नुस्खे होंठों की नाजुक त्वचा को छीलकर नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए इनसे पूरी तरह बचना चाहिए।



















