भारतीय रसोई में चावल एक बेहद आम और लोकप्रिय आहार है। दाल के साथ हो या राजमा के साथ, ज्यादातर लोगों की थाली में यह नजर आ ही जाता है। हालांकि, जिन लोगों को डायबिटीज या ब्लड शुगर असंतुलन की समस्या होती है, उन्हें अक्सर डॉक्टर चावल का सेवन सीमित करने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चावल को पकाने के बाद फ्रिज में ठंडा करके खाने से उसका असर शरीर पर पूरी तरह बदल सकता है? वैज्ञानिक शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि ठंडे चावल को दोबारा गर्म करके खाने पर, ताजे बने चावल की तुलना में ब्लड शुगर का स्तर कम बढ़ सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे चावल के स्टार्च में होने वाले रासायनिक बदलाव मुख्य भूमिका निभाते हैं।
स्टार्च में बदलाव और ग्लूकोज का स्तर
चावल में कार्बोहाइड्रेट की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। जब चावल को उबाला जाता है, तो पानी और तापमान के प्रभाव से उसमें मौजूद स्टार्च काफी मुलायम हो जाता है। ऐसी स्थिति में हमारे पाचन तंत्र के पाचक एंजाइम इस स्टार्च को आसानी से तोड़कर ग्लूकोज में परिवर्तित कर देते हैं। यह ग्लूकोज बहुत तेजी से खून में घुल जाता है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर अचानक ऊपर चला जाता है। इसके विपरीत, जब पके हुए चावल को ठंडा कर दिया जाता है, तो स्टार्च के अणु अपनी संरचना को फिर से व्यवस्थित करना शुरू कर देते हैं। विज्ञान की भाषा में इस विशेष प्रक्रिया को स्टार्च रेट्रोग्रेडेशन कहा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान चावल के स्टार्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रेजिस्टेंट स्टार्च में तब्दील हो जाता है।
रेजिस्टेंट स्टार्च की कार्यप्रणाली
रेजिस्टेंट स्टार्च एक ऐसा विशेष स्टार्च है जो हमारी छोटी आंत में सामान्य स्टार्च की तरह पूरी तरह से नहीं पच पाता है। यह शरीर में फाइबर की तरह काम करता है और इसका एक हिस्सा पचकर सीधे बड़ी आंत तक पहुंच जाता है। बड़ी आंत में पहले से मौजूद बैक्टीरिया इस हिस्से को फर्मेंट करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के कारण चावल से शरीर को मिलने वाले ग्लूकोज की कुल मात्रा और रक्त में उसके पहुंचने की रफ्तार दोनों धीमी हो जाती हैं। यही वजह है कि ठंडा किया हुआ चावल खाने पर शरीर पर इसका प्रभाव ताजे चावल से अलग होता है।
वैज्ञानिक अध्ययनों के दिलचस्प निष्कर्ष
साल 2015 में Asia Pacific Journal of Clinical Nutrition में एक शोध प्रकाशित हुआ था, जिसमें 15 स्वस्थ वयस्कों पर अध्ययन किया गया था। इस शोध में सामने आया कि 24 घंटे तक 4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर फ्रिज में रखने के बाद दोबारा गर्म किए गए चावल ने ताजे पके चावल की तुलना में काफी कम ग्लाइसेमिक प्रतिक्रिया दिखाई। इसके अलावा, साल 2022 में हुए एक अन्य अध्ययन में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित 32 लोगों पर प्रयोग किया गया। इन मरीजों में भी ठंडे और दोबारा गर्म किए गए चावल का सेवन करने के बाद ब्लड शुगर में कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, ये नतीजे यह दावा नहीं करते कि यह असर हर इंसान पर बिल्कुल एक जैसा ही होगा। चावल की किस्म, उसे पकाने की विधि, खाने की कुल मात्रा और ली जाने वाली दवाइयां भी ब्लड शुगर को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं।
चावल को फ्रिज में सुरक्षित रखने के जरूरी नियम
पके हुए चावल को हमेशा सुरक्षित तरीके से ही स्टोर करना चाहिए। चावल पकने के बाद उसे ज्यादा देर तक सामान्य कमरे के तापमान पर खुला नहीं छोड़ना चाहिए। चावल को जल्दी से जल्दी ठंडा करने के लिए इसे छोटे और उथले कंटेनर में भरकर तुरंत फ्रिज के अंदर रख देना चाहिए। हमेशा यही कोशिश करें कि बचे हुए चावल का इस्तेमाल 24 घंटे के भीतर ही कर लिया जाए और खाने से पहले उसे अच्छी तरह से गर्म किया जाए।
बैक्टीरिया से जुड़ी जरूरी सावधानी
चावल को सही तरीके से ठंडा और स्टोर करने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण बैसिलस सेरियस नाम का बैक्टीरिया है। इस बैक्टीरिया के बीजाणु अक्सर पके हुए चावल में भी जीवित रह जाते हैं। यदि चावल को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ दिया जाए, तो यह बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगता है और ऐसे खतरनाक विषैले पदार्थ बना सकता है जिन्हें दोबारा गर्म करने के बाद भी हमेशा पूरी तरह से नष्ट नहीं किया जा सकता है। इसलिए सही तापमान पर स्टोरेज बेहद आवश्यक है।

















