मानव शरीर की पूरी कार्यप्रणाली का सीधा संबंध हमारी आंतों की सेहत से जुड़ा हुआ है। पाचन क्रिया ठीक रहने, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने, मेटाबॉलिज्म सुचारू रूप से काम करने और मानसिक स्थिति या मूड बेहतर रहने में गट हेल्थ की भूमिका बहुत अहम होती है। आंतों के भीतर पाए जाने वाले गुड बैक्टीरिया इन सभी जरूरी शारीरिक प्रक्रियाओं को संभालकर रखने का काम करते हैं। आयुर्वेदिक हेल्थ कोच डिंपल जांगड़ा ने कुछ ऐसे खास खाद्य पदार्थों और आदतों के बारे में जानकारी दी है जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आंतों के भीतर लाभकारी बैक्टीरिया को बढ़ाने में काफी मदद मिल सकती है और गट हेल्थ को दुरुस्त रखा जा सकता है।
डाइट में शामिल करें ये जरूरी आहार और चीजें
आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए खानपान में विशेष बदलाव करने की सलाह दी जाती है। कुछ खास चीजें प्राकृतिक रूप से माइक्रोबायोम को मजबूत करती हैं।
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प्रीबायोटिक फूड्स: आंतों की सेहत को सुधारने के लिए अपने दैनिक भोजन में प्रीबायोटिक तत्वों से भरपूर आहार जरूर शामिल करें। इसके बेहतरीन विकल्पों में कच्चा केला, पकाकर ठंडा किया हुआ चावल, आटिचोक, शतावरी और लहसुन शामिल हैं। जब उबले हुए चावल को ठंडा किया जाता है तो उसमें रेजिस्टेंट स्टार्च का निर्माण होता है, जो आंतों के गुड बैक्टीरिया के लिए मुख्य रूप से भोजन का काम करता है। इन चीजों को सुबह के नाश्ते या दोपहर के भोजन से पहले आसानी से खाया जा सकता है।
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फर्मेंटेड फूड्स: चावल के पानी में थोड़ा सा घी और नमक मिलाकर इसका सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है। इससे शरीर को लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया प्राप्त होते हैं जो गट हेल्थ के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। इसके अलावा घर पर तैयार किया गया इडली और डोसा का बैटर, अथवा उच्च गुणवत्ता वाले A2 दूध से बनी लस्सी और छाछ भी बेहतरीन विकल्प हैं। डिंपल जांगड़ा का यह भी कहना है कि घर पर पारंपरिक तरीके से बनाई गई फर्मेंटेड चीजें बाजार या फैक्ट्री में मिलने वाले मीठे दही की तुलना में स्वास्थ्य के लिए कई गुना अधिक लाभकारी होती हैं।
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विविध प्लांट बेस्ड फूड्स: आयुर्वेदिक हेल्थ कोच डिंपल जांगड़ा के अनुसार, हर इंसान को अपनी साप्ताहिक डाइट में लगभग 40 अलग-अलग प्रकार के पौधों यानी सब्जियां, फल और अनाज को शामिल करने का प्रयास करना चाहिए। जो लोग एक सप्ताह के भीतर 30 से अधिक किस्म के प्लांट बेस्ड फूड्स का सेवन करते हैं, उनके शरीर में 10 या उससे कम विविधता वाले भोजन करने वालों की तुलना में कहीं अधिक समृद्ध माइक्रोबायोम पाया जाता है। इस श्रेणी में विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियां, मसाले, बीज और नट्स भी पूरी तरह शामिल हैं।
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त्रिफला का सेवन: आंवला, विभीतकी और हरीतकी जैसी तीन औषधीय जड़ी-बूटियों के मेल से त्रिफला तैयार किया जाता है। यह आयुर्वेदिक मिश्रण शरीर के भीतर जमा विषाक्त पदार्थों और गंदगी को बाहर निकालने में सहायता करता है। इसके अलावा यह आंतों में पाए जाने वाले खास 'अकरमेन्सिया म्यूसिनिफिला' (Akkermansia muciniphila) बैक्टीरिया के लिए एक बेहतरीन प्रीबायोटिक के रूप में काम करता है।
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शराब का सेवन बंद करें: आंतों के भीतर गुड बैक्टीरिया की आबादी को बढ़ाने और सुरक्षित रखने के लिए शराब पीने की आदत को पूरी तरह छोड़ना जरूरी है। शराब हमारे माइक्रोबायोम, लिवर के स्वास्थ्य और नींद के चक्र के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक चीजों में गिनी जाती है। कोई भी व्यक्ति लगातार 21 दिनों तक शराब से दूरी बनाकर अपने शरीर में आने वाले सकारात्मक बदलावों को खुद महसूस कर सकता है.



















