दैनिक भोजन में सफेद चावल की जगह भूरे चावल यानी ब्राउन राइस को शामिल करने को लेकर स्वास्थ्य जगत में लंबी चर्चाएं चलती रही हैं। आम धारणा बन चुकी है कि सफेद चावल सेहत को केवल नुकसान पहुंचाता है और भूरे चावल का इस्तेमाल करने से शरीर हर तरह की बीमारी से दूर रहता है। कई लोग यह भी मान बैठते हैं कि इसके सेवन से ब्लड शुगर का स्तर बिल्कुल नहीं बढ़ता। हालांकि वैज्ञानिक प्रमाण और चिकित्सीय आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि ब्राउन राइस बेशक पोषण के मामले में आगे है, मगर यह किसी भी बीमारी की अचूक दवा नहीं है। अर्काइव्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित एक शोध पत्र में 14 से 22 वर्षों तक करीब 2 लाख अमेरिकी नागरिकों की खान-पान की आदतों का बारीकी से अध्ययन किया गया था। इस लंबी रिसर्च के परिणामों से पता चला कि जिन प्रतिभागियों ने सफेद चावल छोड़कर भूरे चावल को अपनी नियमित डाइट में जगह दी, उनमें टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 16 प्रतिशत तक कम दर्ज किया गया। इसके बावजूद स्वास्थ्य के सभी मानक सिर्फ चावल बदलने से पूरे नहीं होते, क्योंकि किसी भी गंभीर रोग से बचाव केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर नहीं करता।
धान से चावल बनने की पूरी प्रक्रिया और दोनों का बुनियादी अंतर
भूरे और सफेद चावल का अंतर मुख्य रूप से अनाज की प्रोसेसिंग और पॉलिशिंग के तरीके से पैदा होता है। खेत में जब धान तैयार होता है, तो चावल का दाना एक सख्त बाहरी छिलके के भीतर सुरक्षित रहता है। धान जब प्रोसेसिंग मिलों में पहुंचता है, तब सबसे पहले उस पर भाप दी जाती है। इस भाप की वजह से छिलके और अनाज की सबसे बाहरी परत, जिसे ब्रान कहा जाता है, उसके भीतर मौजूद पोषक तत्व अनाज के भीतरी हिस्से में चले जाते हैं। भाप देने के बाद मशीनों की मदद से धान का ऊपरी छिलका यानी भूसा अलग कर दिया जाता है।
इस प्रक्रिया के बाद जो दाना बचता है, वही असली भूरा चावल कहलाता है। इस अवस्था में चावल के दाने पर उसकी प्राकृतिक ब्रान परत और अंकुर यानी जर्म पूरी तरह बरकरार रहते हैं। इसी भूरे रंग की प्राकृतिक सुरक्षात्मक परत के कारण इसका नाम ब्राउन राइस पड़ा है। इस परत में फाइबर, विटामिन बी और कई जरूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं। इसके विपरीत, जब इसी चावल को आगे मशीनों में डालकर पॉलिश किया जाता है, तो इसकी ऊपरी ब्रान परत और जर्म दोनों पूरी तरह छिलकर बाहर निकल जाते हैं। इस घिसाई से चावल एकदम चमकदार और सफेद दिखने लगता है। पॉलिशिंग के बाद दाने में सिर्फ अंदरूनी स्टार्च वाला हिस्सा ही बाकी बचता है, जिसे सामान्य सफेद चावल कहा जाता है।
पोषक तत्वों का मुकाबला: दोनों में कौन कितना ताकतवर
हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, दोनों तरह के चावल हमारे खान-पान का प्रमुख हिस्सा हैं, लेकिन पोषण के मामले में दोनों का स्तर काफी अलग है। भूरे चावल में ब्रान और अंकुर दोनों सुरक्षित बचे रहने के कारण यह सफेद चावल की तुलना में कहीं अधिक पौष्टिक माना जाता है। पोषक तत्वों की बात करें तो ब्राउन राइस में सफेद चावल की तुलना में ज्यादा फाइबर, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन और विटामिन बी1, बी3, बी6 और बी9 पाए जाते हैं। यह शारीरिक पोषण और पाचन तंत्र के लिए बेहद उपयोगी घटक माने जाते हैं।
ऊर्जा और कैलोरी की दृष्टि से देखें तो 1 कप पके हुए भूरे चावल से लगभग 218 कैलोरी ऊर्जा मिलती है, जबकि उतनी ही मात्रा यानी 1 कप पके हुए सफेद चावल से 242 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। सफेद चावल से फाइबर की परत पूरी तरह हट जाने के कारण शरीर के लिए इसे पचाना अपेक्षाकृत काफी आसान और हल्का होता है। यही वजह है कि जिन व्यक्तियों को पेट में सूजन, जलन या पाचन तंत्र से संबंधित कोई गंभीर समस्या होती है, उनके लिए सफेद चावल एक बेहतर विकल्प साबित होता है। दूसरी ओर, सामान्य और स्वस्थ लोगों के लिए फाइबर से भरपूर भूरा चावल ही डाइट में शामिल करना अधिक गुणकारी है। विभिन्न चिकित्सा अध्ययनों में यह भी रेखांकित किया गया है कि ब्राउन राइस के नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और हृदय संबंधी विकारों का जोखिम कम करने में सहायता मिल सकती है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स और डायबिटीज पर इसका प्रभाव
किसी भी खाद्य पदार्थ को खाने के बाद वह खून में शुगर के स्तर को कितनी तेजी से बढ़ाता है, इसे मापने के लिए ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी जीआई के पैमाने का इस्तेमाल किया जाता है। यह पैमाना 0 से लेकर 100 के बीच निर्धारित होता है। किसी भोजन का जीआई स्तर जितना कम होगा, उससे रक्त में शुगर अचानक बढ़ने की संभावना उतनी ही कम मानी जाती है। परीक्षणों में सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 73 ± 4 दर्ज किया गया है, जो काफी उच्च श्रेणी में आता है। इसका मतलब है कि सफेद चावल खाने के बाद ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बहुत तेजी से बढ़ सकता है।
इसके मुकाबले भूरे चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 68 ± 4 मापा गया है। इस प्रकार भूरे चावल का शुगर इंडेक्स सफेद चावल के मुकाबले कम स्तर पर रहता है। इसी वजह से चिकित्सा विशेषज्ञ और आहार विशेषज्ञ डायबिटीज के मरीजों को सफेद चावल के बजाय भूरे चावल के सेवन की सलाह देते हैं, ताकि खून में ग्लूकोज का प्रवाह अचानक अनियंत्रित न हो सके।
क्या ब्राउन राइस खाने से बीमारियां पास नहीं आतीं
यह दावा पूरी तरह गलत और बेबुनियाद है कि केवल भूरा चावल खाने से इंसान को कभी कोई बीमारी नहीं होगी। किसी भी व्यक्ति के बीमार होने या स्वस्थ रहने का संबंध उसके पूरे खान-पान, दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों, आसपास के पर्यावरण और आनुवंशिक कारकों पर टिका होता है। सिर्फ भोजन में एक प्रकार का अनाज शामिल कर लेने से शरीर सभी बीमारियों से मुक्त नहीं हो सकता। वर्ष 2022 के एक अध्ययन में यह भी स्पष्ट तौर पर सामने आया था कि भूरा चावल खाने से ब्लड शुगर बिल्कुल नहीं बढ़ेगी, इस बात की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। इसलिए इसे एक संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर देखना चाहिए, न कि किसी जादुई सुरक्षा कवच के रूप में।



















