आयुर्वेद में कई ऐसे पौधे मौजूद हैं जो अपनी चमत्कारी औषधीय खूबियों के लिए जाने जाते हैं। ऐसा ही एक पौधा शतावर है जो दिखने में भले ही साधारण प्रतीत होता हो लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से इसके अनगिनत फायदे हैं। पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में इसका उपयोग सदियों से विभिन्न प्रकार की शारीरिक जटिलताओं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता रहा है।
स्वास्थ्य और प्रजनन प्रणाली के लिए है लाभकारी
शतावर का यह पौधा पुरुष और महिला दोनों वर्गों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में काफी उपयोगी माना जाता है। इसकी जड़ों का मुख्य रूप से आयुर्वेदिक दवाइयां और चूर्ण तैयार करने में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर, बलिया में अपनी सेवाएं दे रहीं चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उनके अनुसार वह पिछले पांच वर्षों से इस चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और इस दौरान उन्होंने इसके कई सकारात्मक परिणाम देखे हैं। उनके मुताबिक शतावर एक झाड़ीनुमा वनस्पति है जो औषधीय गुणों का एक बेहतरीन भंडार है और आयुर्वेद में इसे संपूर्ण स्वास्थ्य तथा प्रजनन प्रणाली को मजबूत करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में असरदार
डॉ. वंदना तिवारी ने यह स्पष्ट किया है कि शतावर का उपयोग खासतौर पर महिलाओं की विभिन्न आंतरिक स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण में किया जाता है। आधुनिक जीवनशैली और अन्य कारणों से होने वाले हार्मोनल असंतुलन, मासिक धर्म से जुड़ी अनियमितताओं और इस दौरान होने वाले असहनीय दर्द जैसी दिक्कतों में इसे बेहद उपयोगी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, जो महिलाएं अपने नवजात शिशुओं को स्तनपान कराती हैं, उनके लिए भी इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ ने यह भी चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या में इसका सेवन शुरू करने से पहले किसी योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श करना अति आवश्यक है।
इम्यूनिटी बढ़ाने और तनाव दूर करने में मददगार
इस पौधे में प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट्स और शक्तिशाली बायोएक्टिव यौगिक भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। डॉ. तिवारी के अनुसार इन खास तत्वों की मौजूदगी के कारण यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ाने में काफी सहायक साबित होता है। इसके पारंपरिक उपयोग की बात करें तो मानसिक तनाव, एंग्जायटी यानी चिंता और अनिद्रा जैसी नींद से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। शरीर में बनी रहने वाली कमजोरी और थकान को दूर कर ऊर्जा के स्तर को उठाने के लिए भी इसे कारगर माना जाता है। कई लोग दुबलेपन की समस्या से छुटकारा पाने और वजन बढ़ाने के उद्देश्य से भी इसका सेवन करते हैं, हालांकि इसके परिणाम हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।
जड़ों के चूर्ण का होता है मुख्य रूप से इस्तेमाल
चिकित्साधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पौधे के मूल यानी इसकी जड़ों वाले हिस्से को सुखाकर उसका चूर्ण तैयार किया जाता है जो मुख्य रूप से उपयोग में लाया जाता है। यह बाजार में एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में आसानी से उपलब्ध होता है। इस औषधि की खुराक और मात्रा पूरी तरह से मरीज की उम्र, उसकी शारीरिक क्षमता और उसकी मौजूदा स्वास्थ्य समस्या की गंभीरता पर निर्भर करती है। बिना चिकित्सक की देखरेख के इसकी मात्रा का निर्धारण खुद से नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञ की सलाह के बिना सेवन से बचें
डॉ. वंदना तिवारी ने अपनी सलाह में आम लोगों से यह आग्रह किया है कि किसी भी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी या औषधि का सेवन बिना किसी पेशेवर विशेषज्ञ की सलाह के बिल्कुल नहीं करना चाहिए। कुछ विशेष शारीरिक परिस्थितियों में इसका गलत तरीके से सेवन करना शरीर के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। इसलिए अपनी दैनिक दिनचर्या में शतावर को शामिल करने या इसका काढ़ा अथवा चूर्ण लेने से पहले किसी प्रामाणिक आयुर्वेद चिकित्सक से पूरी जानकारी और मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करें।



















