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कोटा में मिड-डे-मील घोटाले का खुलासा, एक करोड़ का राशन गोदाम से गायबराजस्थान
26 अक्तू॰ 2026, 10:33 am (16 मिनट पहले)· 0

कोटा में मिड-डे-मील घोटाले का खुलासा, एक करोड़ का राशन गोदाम से गायब

राजस्थान के कोटा में सरकारी स्कूलों के मिड-डे-मील का एक करोड़ रुपये से अधिक का राशन रास्ते से ही गायब हो गया है। शिक्षा विभाग की जांच में हजारों क्विंटल गेहूं और चावल की हेराफेरी सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए आने वाले पोषाहार में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। राजस्थान के कोटा जिले में बच्चों की थाली तक पहुंचने वाला भारी मात्रा में अनाज रास्ते में ही गायब हो गया, जिससे शिक्षा और प्रशासन महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकारी गोदामों से तो खाद्यान्न का पूरा उठाव किया गया था, लेकिन वह निर्धारित स्कूलों तक कभी नहीं पहुंचा। जब जमीनी स्तर से लगातार कम राशन मिलने की शिकायतें मिलने लगीं, तब अधिकारियों ने सरकारी अभिलेखों की पड़ताल शुरू की। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने पूरे वितरण तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

जांच में हुआ अनाज की कमी का बड़ा खुलासा

विभागीय स्तर पर की गई गहन जांच के दौरान भारी मात्रा में खाद्यान्न का हिसाब किताब गायब मिला। रिकॉर्ड के मिलान से पता चला कि सरकारी गोदाम से जितना अनाज निकला था, उसकी तुलना में स्कूलों में काफी कम मात्रा पहुंची। जांच के दायरे में कुल 1844 क्विंटल गेहूं और 1369 क्विंटल चावल की भारी कमी दर्ज की गई। अगर इन दोनों अनाजों के आंकड़ों को जोड़ा जाए तो कुल 3213 क्विंटल खाद्यान्न गायब पाया गया। इस गायब हुए राशन की कीमत का आकलन करने पर सरकारी दरों के मुताबिक यह राशि लगभग 81 लाख रुपये बैठती है, जबकि खुले बाजार के मौजूदा भावों के हिसाब से इसका मूल्य एक करोड़ से एक करोड़ दस लाख रुपये के बीच आंका गया है। इस पूरे घोटाले के केंद्र में गुजरात की एक परिवहन एजेंसी का नाम सामने आ रहा है जिस पर आपूर्ति में गंभीर लापरवाही और गड़बड़ी बरतने का आरोप लगा है। स्थानीय रसद विभाग की औपचारिक शिकायत के आधार पर कोटा के नयापुरा थाने में पुलिस ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली है और अब इस बात की तहकीकात की जा रही है कि बच्चों के हक का यह अनाज आखिर किस रास्ते पर डायवर्ट कर दिया गया।

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गोदाम से उठने के बाद रास्ते में गायब हुआ राशन

यह पूरा मामला राष्ट्रीय पोषाहार सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान आवंटित किए गए खाद्यान्न से जुड़ा हुआ है। कोटा स्थित सेंट्रल वेयर हाउस नंबर-1 से 14 जुलाई से 21 जुलाई के बीच गेहूं और चावल का शत-प्रतिशत उठाव कर लिया गया था। इस अनाज को सुरक्षित तरीके से जिले के तमाम सरकारी स्कूलों तक पहुंचाने का जिम्मा गुजरात के हिम्मतनगर की एक फर्म मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज को सौंपा गया था। इस परिवहन कार्य को पूरा करने के लिए संबंधित फर्म को 32.06 रुपये प्रति क्विंटल की दर से वर्कऑर्डर जारी किया गया था। गोदाम से वाहन रवाना होने के बाद जब स्कूलों में राशन पहुंचना शुरू हुआ, तो शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की ओर से कम मात्रा में खाद्यान्न मिलने की शिकायतें आने लगीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने तुरंत सभी मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों से अपनी-अपनी रिपोर्ट तलब कर ली। अधिकारियों ने ब्लॉकवार रिकॉर्ड का मिलान स्कूलों में वास्तव में पहुंचे अनाज की मात्रा से किया, जिसके बाद हजारों क्विंटल गेहूं और चावल का यह बड़ा अंतर खुलकर सामने आया।

प्रशासनिक कार्रवाई और नोटिस का नहीं मिला जवाब

कोटा के जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय प्रारंभिक रूप सिंह मीणा ने जानकारी दी कि गोदाम से पूरा कोटा निकलने के बावजूद स्कूलों में राशन की लगातार घटती मात्रा चिंता का विषय बन गई थी। स्थिति की सच्चाई जानने के लिए सभी सीबीईओ से रिपोर्ट मंगवाकर खाद्यान्न का भौतिक सत्यापन कराया गया और स्कूलों में पहुंचे अनाज की पर्चियों का मिलान भी किया गया। गड़बड़ी के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने पूरे मामले से रसद विभाग को अवगत कराया। इसके आधार पर रसद विभाग ने फर्म के प्रोपराइटर नारायणलाल शंकर लाल खटीक और उनके अधिकृत सहयोगी शैलेंद्र शर्मा को 14 अक्टूबर को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया। इस नोटिस में दोनों से 15 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे तक अपना जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया था, लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद रसद विभाग ने नयापुरा थाने में लिखित शिकायत दी, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अपनी तफ्तीश आगे बढ़ा दी है।

सवाल-जवाब

कोटा में मिड-डे-मील घोटाले में कुल कितना राशन गायब हुआ है?
जांच के दौरान कुल 3213 क्विंटल खाद्यान्न की कमी पाई गई है, जिसमें 1844 क्विंटल गेहूं और 1369 क्विंटल चावल शामिल है।
गायब हुए राशन की बाजार कीमत कितनी है?
सरकारी दर के अनुसार इसकी कीमत करीब 81 लाख रुपये और बाजार भाव के हिसाब से एक करोड़ से 1.10 करोड़ रुपये के बीच है।
खाद्यान्न पहुंचाने की जिम्मेदारी किस फर्म को दी गई थी?
अनाज पहुंचाने का जिम्मा गुजरात के हिम्मतनगर स्थित मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज को दिया गया था।
यह मामला किस अवधि के खाद्यान्न आवंटन से जुड़ा है?
यह मामला जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही के खाद्यान्न आवंटन से संबंधित है।
इस मामले में पुलिस में शिकायत किसने दर्ज कराई है?
रसद विभाग की शिकायत पर कोटा के नयापुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
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