मूलांक 4 दैनिक अंकज्योतिष 2 नवंबर 2026: जल्दबाजी में बड़े फैसले करने से बचें, अधूरी सूचना बन सकती है उलझन की वजहरोजाना तीन अंडे खाने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं, विशेषज्ञ ने बताए बड़े फायदेजमशेदपुर की 85 वर्षीय सुमित्रा त्रिपाठी की अनुशासित दिनचर्या, भोर में 3 बजे जगने और सादे खानपान से पाई निरोगी कायाहोशियारपुर में केंद्रीय एजेंसी की बड़ी कार्रवाई, तड़के सुंदर शाम अरोड़ा के आवास पर पहुंची टीमकच्चे तेल में गिरावट से संभले सोने-चांदी के भाव, अक्टूबर की बड़ी गिरावट के बाद कीमती धातुओं में लौटी तेजीशिलांग में 2 नवंबर को बैंकों का अवकाश, जानिए अपने शहर में शाखाएं खुली हैं या बंदओमान से भारत लाया गया महादेव ऐप का कर्ताधर्ता, भिलाई के मामूली विक्रेता से अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट तक का सफरलुधियाना में विदेश से लौटी कमलदीप कौर की बेडरूम में चाकू घोंपकर हत्या, पति रविंदर सिंह पकड़ा गयाराजस्थान में 500 से अधिक मेहमानों की दावत पर खाद्य सुरक्षा जांच अनिवार्य, बिना लाइसेंस कैटरिंग पर होगी सीधी कानूनी कार्रवाईव्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर 17 रुपये तक महंगा, कई शहरों में सीएनजी की कीमतों में 4.45 रुपये तक उछाल
बाराबंकी से बहराइच के बीच तैयार होगा नया हाईवे, लखनऊ से सफर में लगेंगे महज डेढ़ घंटेउत्तर प्रदेश
2 नव॰ 2026, 9:01 am (10 मिनट पहले)· 0

बाराबंकी से बहराइच के बीच तैयार होगा नया हाईवे, लखनऊ से सफर में लगेंगे महज डेढ़ घंटे

केंद्रीय कैबिनेट ने बाराबंकी से बहराइच तक 101 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे को मंजूरी दी है, जिससे लखनऊ से बहराइच की यात्रा का समय घटकर मात्र एक से डेढ़ घंटा रह जाएगा।

उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को विस्तार देते हुए बाराबंकी से बहराइच के बीच एक अत्याधुनिक एक्सेस कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे-927 के निर्माण की योजना आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस परियोजना पर काम की रूपरेखा तय कर ली गई है। करीब 101 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित मार्ग का निर्माण शुरुआती चरण में 4 लेन के रूप में किया जाएगा, जिसके डिजाइन में भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे 6 लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान शामिल है। इस पूरे बुनियादी ढांचे को धरातल पर उतारने में 6,969.04 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद राजधानी लखनऊ से बहराइच के बीच आने-जाने वाले यात्रियों का सफर सिमटकर महज 1 से डेढ़ घंटे का रह जाएगा।

वर्तमान जाम और हादसों से राहत दिलाएगा नया कॉरिडोर

यह नया कॉरिडोर वास्तव में लखनऊ-रुपईडीह मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस क्षेत्र में मौजूद मौजूदा सड़क नेटवर्क काफी संकरा है, जहां तीखे घुमावों और घनी आबादी के बीच से गुजरने के चलते दिन-रात जाम की स्थिति बनी रहती है। संकरी सड़कों के कारण इस पूरे रूट पर सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी लगातार बना रहता है। नई सड़क को इन सभी समस्याओं के स्थायी समाधान के तौर पर तैयार किया जा रहा है। परियोजना के तहत मुख्य मार्ग को भीड़भाड़ वाले रिहायशी इलाकों से बाहर निकाला जाएगा। इसके साथ ही हाईवे को पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड रखा जाएगा, जिसका मतलब है कि मुख्य कैरिजवे पर कोई भी अनियंत्रित क्रॉसिंग या रुकावट नहीं होगी। इससे वाहनों की गति निर्बाध रहेगी और यात्रा के समय में भारी कटौती दर्ज की जाएगी।

ये भी पढ़ें

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल और 48.28 किमी लंबा बाईपास

लखनऊ प्राधिकरण के अनुसार इस महत्वपूर्ण परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित किया जाएगा। इस वित्तीय प्रारूप के तहत कुल निर्माण लागत का बड़ा हिस्सा निजी डेवलपर या भागीदार की ओर से लगाया जाएगा, जबकि सरकार निर्धारित समय अंतराल पर किस्तों के रूप में एन्युटी राशि जारी करेगी। स्थानीय निवासियों और कस्बों की सुविधा के लिए इस परियोजना में 48.28 किलोमीटर लंबा बाईपास शामिल किया गया है। इसके अलावा स्थानीय वाहनों की सुगम आवाजाही और मुख्य सड़क पर अनावश्यक दबाव रोकने के उद्देश्य से किनारे-किनारे अलग सर्विस लेन का निर्माण भी किया जाएगा।

तराई और पूर्वांचल के कई जिलों को सीधा जुड़ाव

यह सड़क सिर्फ बाराबंकी या बहराइच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके बनने से पूरे क्षेत्र का आवागमन सुधर जाएगा। इस रूट के तैयार होने से बाराबंकी, रामनगर, जरवल, कैसरगंज, कुंडासर, फखरपुर और बहराइच जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों को सीधी और तेज कनेक्टिविटी हासिल होगी। इसके अतिरिक्त पड़ोस के गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती जिलों के निवासियों को भी आने-जाने के लिए एक सुगम विकल्प मिल सकेगा। यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को राज्य के तराई और पूर्वांचल क्षेत्रों से सीधे जोड़ेगा, जिससे इन दूरदराज के अंचलों में विकास की रफ्तार तेज हो सकेगी।

नेपाल सीमा व्यापार और अन्य हाईवे से इंटरकनेक्शन

नए एक्सप्रेसवे के बनने से सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा। यह मार्ग नेपाल सीमा तक सीधे संपर्क को आसान बनाएगा, जिससे क्रॉस बॉर्डर व्यापार, पर्यटन और मालवाहक ट्रांजिट में भारी उछाल आने की उम्मीद है। कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने के लिए इसे राष्ट्रीय राजमार्ग 27, 330एन, 730 के साथ-साथ स्टेट हाईवे 13 और 30बी से भी जोड़ा जाएगा। इन सभी मार्गों के आपस में जुड़ने से वाहनों के ईंधन की भारी बचत होगी, सफर सुरक्षित बनेगा और कीमती समय बचेगा।

रोजगार, कृषि और रियल एस्टेट को बड़ा सहारा

इन्फ्रास्ट्रक्चर के इस बड़े प्रोजेक्ट से आर्थिक मोर्चे पर भी व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। अनुमान के मुताबिक परियोजना से रोजाना 36 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और 43 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे। कॉरिडोर के आसपास की जमीनों के मूल्यांकन में बढ़ोतरी होगी, जिसका सीधा फायदा स्थानीय किसानों और जमीन मालिकों को मिलेगा। इसके अलावा तराई के कृषि प्रधान इलाकों से ताजी सब्जियां और फल बिना किसी देरी के लखनऊ जैसे बड़े शहरों की थोक मंडियों तक पहुंच सकेंगे। समय पर ढुलाई होने से लखनऊ के उपभोक्ताओं को कम कीमत पर ताजे फल और सब्जियां उपलब्ध हो सकेंगी।

भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण संरक्षण की योजना

हाईवे निर्माण के लिए जमीन जुटाने का काम तेजी से चल रहा है। परियोजना के कुल बजट में से लगभग 1,574 करोड़ रुपये का आवंटन सिर्फ भूमि अधिग्रहण के लिए किया गया है। एनएचएआई के अनुसार प्रस्तावित संरेखण के दायरे में वन विभाग की 70 हेक्टेयर भूमि भी आ रही है, जहां मौजूद पेड़ों को हटाने की आवश्यकता होगी। हालांकि पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए सख्त नियमों का पालन किया जाएगा और जितने पेड़ काटे जाएंगे, उसके 10 गुना नए पौधे रोपे जाएंगे। इसके साथ ही प्रभावित 70 हेक्टेयर भूमि के बदले वन विभाग को करीब 900 करोड़ रुपये का मुआवजा अदा किया जाएगा।

सवाल-जवाब

बाराबंकी-बहराइच नेशनल हाईवे की कुल लंबाई कितनी होगी?
इस प्रस्तावित एक्सेस कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे की कुल लंबाई लगभग 101 किलोमीटर होगी।
इस हाईवे के निर्माण पर कुल कितना खर्च आएगा?
परियोजना के निर्माण पर कुल 6,969.04 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद लखनऊ से बहराइच जाने में कितना समय लगेगा?
नया हाईवे तैयार होने के बाद लखनऊ से बहराइच का सफर केवल 1 से डेढ़ घंटे में पूरा हो सकेगा।
सड़क शुरुआत में कितने लेन की बनेगी?
शुरुआती चरण में इसे 4 लेन का बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 6 लेन किया जा सकेगा।
भूमि अधिग्रहण पर कितनी धनराशि खर्च की जाएगी?
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर कुल 1,574 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है।
वन विभाग की जमीन के लिए कितना मुआवजा तय किया गया है?
हाईवे के रास्ते में आ रही 70 हेक्टेयर वन भूमि के लिए वन विभाग को लगभग 900 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा।
इस परियोजना को किस विकास मॉडल पर बनाया जा रहा है?
इस परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp