किशाऊ बांध: हिमाचल पर नहीं पड़ेगा वित्तीय बोझ, केंद्र ने 422 मेगावाट परियोजना में राज्य की शर्तें मानींhimachal-pradesh
3 घंटे पहले· 3

किशाऊ बांध: हिमाचल पर नहीं पड़ेगा वित्तीय बोझ, केंद्र ने 422 मेगावाट परियोजना में राज्य की शर्तें मानीं

नई दिल्ली में अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्र ने किशाऊ बांध परियोजना के विद्युत घटक की हिमाचल के हिस्से की लागत लाभान्वित राज्यों से वहन करवाने पर सहमति दी, जिससे आठ साल पुराना वित्तीय गतिरोध खत्म हुआ।

हिमाचल प्रदेश को किशाऊ बांध परियोजना को लेकर बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से अटकी इस परियोजना में अब राज्य सरकार को अपनी जेब से कोई धनराशि नहीं लगानी पड़ेगी। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में केंद्र सरकार ने हिमाचल की रखी शर्तों पर अपनी सहमति जता दी, जिसे राज्य अपनी बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देख रहा है।

दिल्ली की बैठक में सुलझा पेच

यह उच्च स्तरीय बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें हिमाचल के मुख्यमंत्री सुक्खू और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। इसी मंच पर 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हुआ। इस परियोजना की अनुमानित लागत 15,000 करोड़ रुपये आंकी गई है और यह उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टौंस नदी पर प्रस्तावित है।

आठ साल पुराना गतिरोध खत्म

परियोजना की वित्तीय लागत कौन उठाएगा, इसी सवाल पर पिछले आठ वर्षों से मामला उलझा हुआ था। बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के हितों की मजबूती से पैरवी की और इस गतिरोध को तोड़ने में कामयाबी हासिल की। भारत सरकार ने सैद्धांतिक रूप से यह मान लिया है कि परियोजना के जल घटक से लाभ पाने वाले राज्य दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत खुद वहन करेंगे।

मुख्यमंत्री के अनुसार उनके लगातार प्रयासों का नतीजा है कि अब राज्य पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम हो जाएगा, जबकि पूर्ववर्ती सरकार इस दिशा में सफलता नहीं पा सकी थी।

पिछली सरकार बनाम मौजूदा रुख

मुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व जयराम सरकार ने राज्य के हिस्से के तौर पर 800 करोड़ रुपये देने पर हामी भर दी थी, लेकिन प्रदेश के सीमित संसाधनों को देखते हुए वर्तमान सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने तर्क दिया कि जब परियोजना के जल घटक के लिए भारत सरकार 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है, तो विद्युत घटक के लिए वैसी ही मदद न मिलना उचित नहीं था।

विस्थापन का सबसे ज्यादा असर हिमाचल पर

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस परियोजना से होने वाले विस्थापन की सबसे बड़ी मार हिमाचल प्रदेश की आबादी पर ही पड़ेगी और राज्य को इसका सर्वाधिक नुकसान झेलना होगा। ऐसे में प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय भार डालना न्यायसंगत नहीं था। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में हिमाचल प्रदेश के योगदान की उचित भरपाई होनी चाहिए।

राज्य को हर साल मिलेगी 100 करोड़ यूनिट बिजली

मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद राज्य को विद्युत घटक के रूप में हर साल 100 करोड़ यूनिट बिजली की हिस्सेदारी मिलेगी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष बैठती है। इससे प्रदेश के वित्तीय संसाधनों में बड़ा इजाफा होगा।

मुख्यमंत्री ने इसे बिजली परियोजनाओं में राज्य के वैध अधिकार, लंबित बकाया राशि और अन्य हितों की लड़ाई में हिमाचल की बड़ी जीत करार दिया। उन्होंने दोहराया कि वर्तमान सरकार ने हमेशा प्रदेश और प्रदेशवासियों के हितों को सबसे ऊपर रखा है।

बैठक में कौन कौन रहा मौजूद

इस अहम बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, लाभान्वित राज्यों के मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। हिमाचल प्रदेश की ओर से मुख्य सचिव के. के. पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह और ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी उपस्थित रहे।

सवाल-जवाब

किशाऊ बांध परियोजना की लागत और क्षमता कितनी है?
इस परियोजना की अनुमानित लागत 15,000 करोड़ रुपये है और इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 422 मेगावाट होगी।
हिमाचल को इस समझौते से क्या राहत मिली?
अब हिमाचल को परियोजना में अपनी ओर से कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि उसके हिस्से के विद्युत घटक की करीब 2,000 करोड़ रुपये की लागत दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा वहन करेंगे।
परियोजना पूरी होने पर हिमाचल को कितनी बिजली मिलेगी?
राज्य को हर साल 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 600 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष होगी।
किशाऊ बांध कहां बन रहा है?
यह बांध उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टौंस नदी पर प्रस्तावित है।
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