हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में ट्रेनी महिला चिकित्सक के साथ हुई अभद्रता और छेड़छाड़ के मामले में प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। घटना के करीब एक सप्ताह तक ठोस कार्रवाई न होने से नाराज डॉक्टरों ने जब हड़ताल का रास्ता चुना, तब जाकर प्रशासनिक तंत्र हरकत में आया और आरोपी लैब असिस्टेंट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। हालांकि, पुलिस प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है और पुलिस ने उसे केवल जांच में शामिल होने का नोटिस दिया है।
ब्लड बैंक में आधी रात को हुई थी घटना
यह पूरा विवाद 28 सितंबर की रात को शुरू हुआ था। सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर संगठन के महासचिव डॉ. आर्यन गैलेरिया के अनुसार, प्रसूति विभाग में भर्ती एक गंभीर महिला मरीज के लिए आपातकालीन स्थिति में रक्त की तत्काल जरूरत थी। जब ब्लड बैंक से संपर्क किया गया, तो वहां तैनात कर्मचारी ने रक्त भेजने से साफ इनकार कर दिया और महिला रेजिडेंट डॉक्टर को खुद ब्लड बैंक आने को कहा। मरीज की बिगड़ती हालत और जान बचाने की प्राथमिकता को देखते हुए महिला डॉक्टर खुद ब्लड बैंक पहुंचीं। वहां पहुंचते ही तैनात कर्मचारी ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया और अशोभनीय छेड़छाड़ की।
कार्रवाई में देरी और डॉक्टरों की हड़ताल
इस अप्रिय घटना के सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में तनाव फैल गया। आरोप है कि लगभग एक हफ्ते तक अस्पताल प्रबंधन ने मामले को दबाने की कोशिश की और केवल जांच कमेटी गठित करके बैठकों का दौर चलाता रहा। आरोपी के खिलाफ कोई त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई न होते देख रेजिडेंट डॉक्टरों का धैर्य जवाब दे गया। डॉक्टरों ने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने और आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी। इसी बीच मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया और पीड़िता के बयान अदालत में भी दर्ज कराए गए, लेकिन पुलिस ने गिरफ्तारी की बजाय सिर्फ जांच नोटिस थमाया।
मुख्यमंत्री की वापसी और निलंबन के आदेश
मामले के तूल पकड़ने पर रोहड़ू और रामपुर के दौरे से शिमला लौटने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आरोपी कर्मी को तुरंत सस्पेंड करने के सख्त निर्देश जारी किए। स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंघमार ने लैब तकनीशियन के निलंबन की आधिकारिक पुष्टि की है। इसके साथ ही प्रशासन ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि चिकित्सा संस्थानों में महिला स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा, गरिमा और अनुशासन के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा।



















