नीति आयोग की बैठक में CM सुक्खू की पीएम मोदी से बड़ी मांग, बोले- '25,000 करोड़ नहीं, चाहिए 50,000 करोड़'himachal-pradesh
15 घंटे पहले· 0

नीति आयोग की बैठक में CM सुक्खू की पीएम मोदी से बड़ी मांग, बोले- '25,000 करोड़ नहीं, चाहिए 50,000 करोड़'

नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल की वित्तीय दिक्कतें गिनाते हुए उच्चस्तरीय समिति गठित करने और सहायता राशि बढ़ाने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य विषय ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ रखा गया था।

बैठक में पूरे देश में समावेशी प्रगति को सुनिश्चित करने तथा विकसित भारत की परिकल्पना को ठोस और मूर्त नतीजों में बदलने की रणनीतियों पर गहराई से विचार-विमर्श हुआ।

इसी मौके पर मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के सामने खड़ी वित्तीय चुनौतियों को जोरदार ढंग से रखा और प्रधानमंत्री से राज्य के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का आग्रह किया। उनके अनुसार यह समिति राजस्व घाटा अनुदान बंद होने, प्राकृतिक आपदाओं से हुई क्षति, जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली के घटते हिस्से और जीएसटी प्रणाली से हुए राजस्व नुकसान का आकलन कर सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की तरक्की में हिमाचल प्रदेश अहम भूमिका निभा रहा है, फिर भी उपरोक्त हालात के चलते राज्य को आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने अनुरोध किया कि इस उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार राज्य को उसका वाजिब हिस्सा दे।

उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान समाप्त होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। पहाड़ी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मांग पर जो 25,000 करोड़ रुपये की राशि दी गई थी, वह हुए नुकसान की भरपाई के लिए नाकाफी है। विकास कार्यों को बिना रुकावट जारी रखने के लिए उन्होंने इस रकम को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का ‘ग्रीन फ्रंटियर’ है और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए केंद्र को राज्य की खास जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के एक अध्ययन के मुताबिक हिमाचल प्रदेश हर साल देश को करीब 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवाएं देता है, मगर इसके बदले राज्य को कोई पर्याप्त आर्थिक प्रतिपूर्ति नहीं मिल रही।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में करीब 13,000 मेगावाट बिजली पैदा होने के बावजूद राज्य को मुफ्त बिजली का उचित हिस्सा नहीं मिल पा रहा। इसके साथ ही भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से राज्य को लगभग 7,000 करोड़ रुपये की बकाया राशि भी अब तक नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की सबसे ज्यादा मार झेलने के बाद भी प्रदेश केंद्र की घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि का अब तक इंतजार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा जीएसटी व्यवस्था के कारण पिछले आठ साल में राज्य को करीब 25,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान उठाना पड़ा है।

मानव विकास सूचकांकों में प्रदेश की उपलब्धियां

मुख्यमंत्री ने मानव विकास के पैमानों पर प्रदेश की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश वर्ष 2025 में पूर्ण साक्षर घोषित हुआ और वर्ष 2026 में स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक में राज्य ने छठा स्थान हासिल किया। वर्ष 2022 में जब उनकी सरकार ने कामकाज संभाला था, तब राज्य इस सूचकांक में 21वें पायदान पर था। उच्च शिक्षा में प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात 43 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से 28.4 प्रतिशत ज्यादा है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में भी राज्य के बेहतरीन प्रदर्शन का जिक्र किया।

सुक्खू ने कहा कि सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, पंप स्टोरेज और बैटरी स्टोरेज जैसी पहलों के जरिए हिमाचल प्रदेश हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की राह पर बढ़ रहा है। उन्होंने चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना को लागू करते समय राज्य के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया। ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि इसका मकसद राज्य के करीब 1.5 लाख गरीब परिवारों की पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार और विकास का मुद्दा उठाया

मुख्यमंत्री ने पर्यटन को रफ्तार देने के लिए बेहतर हवाई संपर्क की जरूरत पर जोर देते हुए गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार और विकास का मुद्दा उठाया, ताकि हिमाचल प्रदेश को ‘वन स्टेट, वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने बच्चों के पोषण कार्यक्रमों को असरदार ढंग से लागू करने के लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा शिक्षा विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। साथ ही आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच डेटा साझा करने को अहम बताते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित, सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित और साक्ष्य-आधारित निगरानी प्रणाली बनाने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान की भी जानकारी दी और खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने तथा अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए केंद्र से सहयोग मांगा। बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उप-राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, विशेष आमंत्रित सदस्य, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के.के. पंत भी मौजूद रहे।

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