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राम मंदिर दान घोटाला: SIT को मिले बड़े सुराग, टिन्नू के पास थीं चाभियां, चंपत राय बेदागपड़ताल
21 जून 2026, 7:08 pm (37 दिन पहले)· 10

राम मंदिर दान घोटाला: SIT को मिले बड़े सुराग, टिन्नू के पास थीं चाभियां, चंपत राय बेदाग

राम मंदिर ट्रस्ट में दान चोरी की जांच कर रही SIT ने 14 लोगों से पूछताछ के बाद प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें गंभीर खामियां और चंपत राय के करीबी टिन्नू के पास दानपात्रों की चाभियां मिलने की बात सामने आई है। महासचिव चंपत राय को क्लीन चिट मिली है, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक होने में अभी और वक्त लगेगा।

राम मंदिर ट्रस्ट में दान चोरी और गबन के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच दल यानी SIT ने अपनी प्रारंभिक ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है। TrendKia को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मंदिर से जुड़े 14 रसूखदार लोगों और सेवादारों के लिखित बयान दर्ज करने के बाद यह रिपोर्ट बनाई गई है। इन बयानों की बारीकी से जांच-पड़ताल अभी जारी है।

रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं होगी, सरकार से मांगा अतिरिक्त वक्त

बावजूद इसके यह रिपोर्ट न तो अभी मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी और न ही सार्वजनिक की जाएगी। SIT ने उत्तर प्रदेश सरकार से और वक्त मांगा है क्योंकि जांच के दौरान कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। जब तक इनकी गहराई से पड़ताल नहीं हो जाती, तब तक अंतिम रिपोर्ट सीएम को सौंपना संभव नहीं है।

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बयानों और आधिकारिक दस्तावेजों में भारी मिसमैच

पूछताछ के दौरान सेवादारों ने जो दावे किए, उनकी तुलना जब मंदिर के आधिकारिक दस्तावेजों से की गई तो दोनों में बड़ा अंतर सामने आया। यह मिसमैच जांच दल की सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है और इसी वजह से विस्तृत जांच जरूरी हो गई है।

गोपाल राव का गैर-आधिकारिक दखल, उठे तीखे सवाल

जांच में एक अहम तथ्य सामने आया है कि गोपाल राव मंदिर ट्रस्ट के आधिकारिक ट्रस्टी नहीं हैं, फिर भी वे मंदिर के आंतरिक प्रबंधन में सीधे तौर पर दखल देते रहे। बिना किसी आधिकारिक पद के इतनी पहुंच रखना जांच के केंद्र में आ गया है।

दानपात्रों की चाभियां 'टिन्नू' के पास, लेखा प्रभारी के नहीं

इस पूरी जांच का सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि दान बक्सों की चाभियां काउंटिंग प्रभारी के पास नहीं रहती थीं। ये चाभियां चंपत राय के बेहद करीबी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास जमा रहती थीं। यह व्यवस्था मंदिर की वित्तीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाती है।

सुरक्षा और पारदर्शिता के मामले में मिले कई बड़े लूपहोल

SIT ने खुद स्वीकार किया है कि राम मंदिर ट्रस्ट की मौजूदा व्यवस्था में सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से कई बड़ी खामियां हैं। ये कमियां केवल दान के पैसों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे आंतरिक प्रबंधन की विश्वसनीयता पर भी असर डालती हैं।

SIT ने की CEO की नियुक्ति और प्रोफेशनल प्रबंधन की सिफारिश

इन खामियों को दूर करने के लिए SIT ने एक बड़ी सिफारिश की है। मंदिर प्रबंधन को कॉर्पोरेट और प्रोफेशनल ढांचे में बदलने की बात कही गई है। साथ ही एक योग्य CEO की नियुक्ति की सिफारिश भी की गई है ताकि आने वाले समय में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

अभी तक कोई सीधा दोषी नहीं, चंपत राय को मिली क्लीन चिट

जांच में इतनी गड़बड़ियों का जिक्र होने के बावजूद शुरुआती चरण में SIT ने किसी एक व्यक्ति को सीधे तौर पर चोरी का दोषी नहीं ठहराया है। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बारे में सूत्रों ने बताया कि उन्हें इस पूरे मामले से दूर पाया गया है और उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है।

सवाल-जवाब

SIT ने राम मंदिर दान मामले में कितने लोगों से पूछताछ की?
SIT ने मंदिर से जुड़े 14 रसूखदार लोगों और सेवादारों के लिखित बयान दर्ज किए हैं।
दानपात्रों की चाभियां किसके पास थीं और यह क्यों अहम है?
चाभियां चंपत राय के करीबी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थीं, जबकि नियमानुसार ये काउंटिंग प्रभारी के पास होनी चाहिए थीं।
गोपाल राव पर जांच में क्या सामने आया?
गोपाल राव मंदिर ट्रस्ट के आधिकारिक ट्रस्टी नहीं हैं, फिर भी वे आंतरिक प्रबंधन में सीधे दखल देते रहे।
क्या SIT ने किसी को सीधे दोषी पाया है?
नहीं, शुरुआती जांच में अभी तक किसी एक व्यक्ति को सीधे तौर पर चोरी का दोषी नहीं ठहराया गया है।
चंपत राय के बारे में जांच में क्या निकला?
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को इस मामले से दूर पाया गया है और उन्हें क्लीन चिट दी गई है।
SIT ने मंदिर प्रबंधन में सुधार के लिए क्या सुझाया?
SIT ने मंदिर में कॉर्पोरेट और प्रोफेशनल प्रबंधन अपनाने और एक योग्य CEO नियुक्त करने की सिफारिश की है।
SIT की अंतिम रिपोर्ट कब आएगी?
अभी तय नहीं है क्योंकि SIT ने विस्तृत जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से और वक्त मांगा है।
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