राजस्थान में ऐतिहासिक स्थलों को सहेजने और पर्यटन को गति देने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर तैयारी शुरू कर दी है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की ओर से प्रदेश के सातों संभागों से प्राचीन किलों, महलों और ऐतिहासिक बावड़ियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। सरकार की योजना इन धरोहरों को निजी संस्थाओं को गोद सौंपकर उनके संरक्षण और नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी तय करने की है। इसी राज्यव्यापी पहल के तहत डीडवाना कुचामन जिले के कुचामन सिटी में स्थित प्रसिद्ध जाव की बावड़ी को धरोहर संरक्षण योजना में शामिल करने की मांग ने तेजी पकड़ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व में इस बावड़ी के संरक्षण प्रयासों की सराहना किए जाने के बाद स्थानीय लोगों में इसके कायाकल्प को लेकर नई उम्मीद जगी है।
निजी संस्थाओं को धरोहर गोद देने की कार्ययोजना
राज्य सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने प्रदेश भर में बिखरी ऐतिहासिक संपत्तियों की पहचान का काम तेज कर दिया है। सातों संभागों के प्रशासनिक और पुरातात्विक अधिकारियों से उन स्थानों की सूची मांगी गई है जिनका जीर्णोद्धार किया जाना आवश्यक है। योजना के अनुसार, गैर-सरकारी संगठनों, कॉर्पोरेट समूहों और सामाजिक संस्थाओं को इन ऐतिहासिक संरचनाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे न केवल सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। कुचामन क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक और जनप्रतिनिधि चाहते हैं कि जाव की बावड़ी को इस सूची में प्रमुखता से स्थान मिले ताकि इसका स्थायी विकास संभव हो सके।
स्थापत्य और जल संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण
जाव की बावड़ी केवल पत्थर और गारे से बनी एक ऐतिहासिक संरचना मात्र नहीं है, बल्कि यह कुचामन क्षेत्र की समृद्ध स्थापत्य शैली और पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणाली का अनुपम प्रतीक है। पश्चिमी राजस्थान के सूखे और अर्ध-शुष्क वातावरण में सदियों पूर्व बनाई गई यह बावड़ी वर्षा जल को सहेजने का मुख्य जरिया हुआ करती थी। हाल के वर्षों में इसके जीर्णोद्धार के बाद इसे स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण के एक रोल मॉडल के रूप में देखा जाने लगा। बारिश के पानी को बहने से रोककर बावड़ी में जमा करने की व्यवस्था से आसपास के भूजल स्तर में सुधार देखा गया है। यही वजह है कि इसे केवल दर्शनीय स्थल न मानकर जल सुरक्षा के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
जनसहयोग से 200 ट्रॉली कचरा हटाकर रचा गया था इतिहास
एक समय ऐसा भी था जब देखरेख के अभाव में यह ऐतिहासिक बावड़ी उपेक्षा का शिकार होकर कचरे के ढेर में तब्दील हो गई थी। इस स्थिति को बदलने के लिए कुचामन विकास समिति ने बीड़ा उठाया। समिति ने सरकारी बजट का इंतजार करने के बजाय अपने निजी संसाधनों और आम जनता के सहयोग से व्यापक जीर्णोद्धार अभियान शुरू किया। सफाई अभियान के दौरान बावड़ी के विशाल जलकुंड और सीढ़ियों से करीब 200 ट्रॉली कचरा, गाद और प्लास्टिक बाहर निकाला गया। इसके बाद बावड़ी की दीवारों और स्थापत्य संरचना की मरम्मत की गई, रंग-रोगन हुआ और सौंदर्यीकरण का काम पूरा किया गया। समिति के इस भागीरथ प्रयास से ऐतिहासिक धरोहर फिर से अपने पुराने वैभव में लौट आई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना से बढ़ा उत्साह
कुचामन विकास समिति और स्थानीय निवासियों द्वारा जल संरक्षण तथा धरोहर बचाओ अभियान के तहत किए गए इस अनुकरणीय कार्य की गूंज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अनूठी जनभागीदारी की तारीफ की थी। प्रधानमंत्री द्वारा सराहना किए जाने के बाद इस स्थल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। अब जब राजस्थान सरकार प्रदेश की धरोहरों को गोद देने की नीति पर काम कर रही है, तब कुचामन वासियों को उम्मीद है कि जाव की बावड़ी को स्थायी संरक्षण मिलेगा। यदि यह धरोहर गोद योजना में शामिल होती है तो यहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी और जल संरक्षण की प्राचीन तकनीक को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकेगा।





















