झारखंड के बोकारो स्थित सेक्टर 4 एलआईसी मैदान में सजे आर्ट एंड क्राफ्ट मेले में कांच की चमकती चूड़ियों का स्टॉल ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस जीवंत स्टॉल का संचालन उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से आए अनिकेत कुमार सिंह कर रहे हैं। अनिकेत की यह यात्रा केवल सामान्य व्यापारिक गतिविधि नहीं है, बल्कि आर्थिक तंगी से निकलकर स्वावलंबन हासिल करने की एक ठोस मिसाल है। कुछ वर्ष पहले तक वे परिवार के भरण-पोषण के लिए रोजाना मजदूरी करते थे, जिससे उन्हें करीब ₹300 प्रतिदिन की मामूली आमदनी होती थी। इस सीमित आय में घर चलाना मुश्किल था, जिसके बाद उन्होंने कांच के पारंपरिक काम को अपना जरिया बनाने का फैसला किया।
मजदूरी की लाचारी से उद्यम की ओर बढ़ाया कदम
शुरुआती दिनों में अनिकेत के पास आजीविका के साधन बेहद सीमित थे और मजबूरी के तहत उन्हें मजदूरी का सहारा लेना पड़ता था। फिरोजाबाद शहर कांच और चूड़ियों के निर्माण के लिए देश भर में विख्यात है। अपने आसपास इस उद्योग को करीब से देखते हुए और अन्य कारीगरों तथा व्यापारियों के काम से प्रेरणा लेकर उन्होंने खुद का कारोबार शुरू करने की योजना बनाई। करीब 5 साल पहले उन्होंने दिहाड़ी मजदूरी पूरी तरह छोड़ दी और सीधे चूड़ियों के व्यापार में कदम रख दिया। शुरुआत में उन्होंने कांच के काम की बारीकियों को समझा, खरीद-बिक्री के गुर सीखे और धीरे-धीरे अपने उत्पाद लेकर दूसरे शहरों के बाजारों और मेलों की ओर रुख करने लगे।
झारखंड और छत्तीसगढ़ के मेलों में लगातार भागीदारी
अनिकेत ने अपने कारोबार को किसी एक शहर तक सीमित रखने के बजाय अंतरराज्यीय मेलों में ले जाने की रणनीति बनाई। पिछले करीब 3 वर्षों से वे नियमित रूप से झारखंड के प्रमुख औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान वे बोकारो, धनबाद, रांची, टाटा और चाईबासा जैसे शहरों में आयोजित होने वाले मुख्य आयोजनों में अपनी दुकानें लगाते हैं। इसके अतिरिक्त वे व्यापार के सिलसिले में छत्तीसगढ़ के मेलों तक भी पहुंचते हैं। अनिकेत के अनुसार, मेलों और सार्वजनिक प्रदर्शनियों में ग्राहकों की भारी आवाजाही रहती है, जिससे स्थानीय स्तर पर सीधे खुदरा बिक्री का बेहतरीन अवसर मिलता है।
सीजनल मांग और डिजाइन का प्रबंधन
कांच की चूड़ियों के इस कारोबार में समय और मांग का संतुलन बेहद अहम होता है। अनिकेत बताते हैं कि शादी-ब्याह, त्योहार और क्षेत्रीय मेले इस व्यापार की रीढ़ हैं। फिलहाल त्योहारों का दौर होने के कारण दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही काफी तेज है। पिछले वर्ष भी बोकारो के मेले में चूड़ियों की भारी बिक्री दर्ज की गई थी और इस बार भी खरीदार नए डिजाइनों को पसंद कर रहे हैं। अनिकेत हर सीजन में बाजार में आने वाले नए रंगों, आकारों और फैंसी वैरायटी को अपनी दुकान में शामिल करते हैं, क्योंकि फैशन और ग्राहकों की पसंद लगातार बदलती रहती है।
ऑफ सीजन की मंदी और आमदनी का गणित
इस उद्योग में साल के हर महीने एक जैसी कमाई नहीं होती है। अनिकेत के मुताबिक अगस्त के बाद करीब 3 महीनों की अवधि ऐसी आती है जब बाजार में ऑफ सीजन रहता है और मांग काफी घट जाती है। इस सुस्त दौर के बीतते ही जैसे ही शादियों का मौसम और प्रमुख पर्व शुरू होते हैं, बिक्री में अचानक बड़ा उछाल आता है। कभी रोजाना ₹300 कमाने वाले अनिकेत अब सीजन के दौरान इस व्यापार से हर महीने करीब ₹30 से ₹40 हजार तक की शुद्ध कमाई कर लेते हैं। इसी नियमित आय से वे अपने बड़े संयुक्त परिवार का पूरा खर्च वहन कर रहे हैं, जिसमें उनके माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी और एक छोटा बच्चा शामिल हैं।
नए कारोबारियों के लिए अनिकेत की सीख
अनिकेत का मानना है कि जो लोग इस क्षेत्र में नया काम शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए संभावनाएं खुली हुई हैं। हालांकि इसके लिए बाजार की नब्ज पहचानना जरूरी है। ग्राहकों की पसंद, आधुनिक डिजाइन के चलन और सीजन के उतार-चढ़ाव की समझ होना इस व्यवसाय में बने रहने की बुनियादी शर्त है। पिछले 5 वर्षों से लगातार विभिन्न शहरों के बाजारों में घूम-घूमकर चूड़ियां बेच रहे अनिकेत आज अपने दम पर न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अपने पूरे परिवार के आर्थिक भविष्य को भी सुरक्षित कर रहे हैं।



















