झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर की सड़कों पर इन दिनों एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है, जहां बिना किसी पक्की दुकान और बिना किसी भारी पूंजी के एक शख्स अपनी अनूठी कला से अच्छी कमाई कर रहा है. पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के रहने वाले राधेश्याम ने आजीविका कमाने के लिए एक बेहद सरल लेकिन असरदार तरीका खोज निकाला है. वह भीड़भाड़ वाले चौराहों पर खड़े होकर महिलाओं के बालों को संवारने वाली एक खास किस्म की डिजाइनर कंघी बेचते हैं. उनकी इस छोटी सी तरकीब और लाइव प्रदर्शन के दम पर वे हर दिन 1500 रुपये से लेकर 1800 रुपये तक की शुद्ध आमदनी जुटा लेते हैं.
बिना पार्लर जाए मिनटों में तैयार होती हैं 8 तरह की हेयरस्टाइल
राधेश्याम जिस उत्पाद को बेच रहे हैं, वह बंगाल का एक पारंपरिक और खास हेयर स्टाइलिंग टूल है. इस कॉम्पैक्ट उपकरण की कीमत उन्होंने महज 30 रुपये प्रति पीस रखी है. महिलाओं के लिए यह कंघी इसलिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है क्योंकि इसकी सहायता से जूड़ा, चोटी और बंगाली शैली का पारंपरिक कोपा जैसे कई खूबसूरत हेयरडू आसानी से घर पर ही बनाए जा सकते हैं. महिलाओं को इन डिजाइनों के लिए न तो ब्यूटी पार्लर जाकर पैसे खर्च करने पड़ते हैं और न ही घंटों समय बर्बाद करना पड़ता है. साधारण तरीके से बालों को सुलझाने के बाद इस कंघी को सही कोण पर घुमाकर मिनटों में मनचाहा लुक तैयार किया जा सकता है. इस सिंगल टूल से करीब 7 से 8 अलग-अलग तरह के हेयर स्टाइल बनते हैं, जिससे कामकाजी महिलाएं सप्ताह के हर दिन एक नया हेयरडू बना सकती हैं.
सड़क पर डमी सिर और विग लगाकर देते हैं लाइव डेमो
ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए राधेश्याम का मार्केटिंग अंदाज भी बेहद दिलचस्प है. उन्होंने अपने पास एक लोहे का स्टैंड रखा हुआ है, जिस पर एक कृत्रिम डमी सिर और विग फिट की गई है. शहर के प्रमुख चौराहों और बाजारों में खड़े होकर वे राहगीरों के सामने उसी विग पर कंघी घुमाकर लाइव डेमो पेश करते हैं. वे देखते ही देखते विग पर जूड़ा, चोटी और कोपा जैसी कई जटिल शैलियां बनाकर दिखाते हैं. जब महिलाएं और युवतियां अपनी आंखों के सामने 30 रुपये के छोटे से गैजेट से जादू जैसा बदलाव देखती हैं, तो वे तुरंत इसे खरीदने के लिए आकर्षित हो जाती हैं. राधेश्याम के अनुसार, महज सामान सजाकर रखने के बजाय उसका इस्तेमाल करके दिखाने से लोग उसकी उपयोगिता तुरंत समझ जाते हैं.
त्योहारों और मेलों में बढ़ जाती है बिक्री
अपनी दैनिक आय के बारे में जानकारी देते हुए राधेश्याम बताते हैं कि आम दिनों में वे आसानी से करीब 1500 रुपये तक कमा लेते हैं, जबकि कई सामान्य दिनों में यह आंकड़ा 1800 रुपये तक भी पहुंच जाता है. जब शहर में कोई बड़ा मेला, दुर्गा पूजा या अन्य त्योहारों का सीजन आता है, तब महिलाओं के साज-सज्जा से जुड़े सामानों की मांग अचानक तेज हो जाती है. ऐसे मौकों पर उनकी बिक्री और मुनाफे में भारी उछाल दर्ज किया जाता है. हालांकि हर दिन की कमाई बाजार की भीड़ और मौसम पर निर्भर करती है, लेकिन उनका औसत रोजगार बेहद संतोषजनक रहता है.
कम लागत और अनूठे विचार से स्वरोजगार का बेहतरीन मॉडल
राधेश्याम की यह जमीनी कहानी दर्शाती है कि आत्मनिर्भर बनने और अच्छी कमाई करने के लिए हमेशा लाखों रुपये के निवेश, फैंसी शोरूम या बड़ी डिग्री की दरकार नहीं होती. अगर आपके पास ग्राहकों की जरूरत को समझने की दृष्टि, उत्पाद की सही उपयोगिता साबित करने का हुनर और मेहनत का जज्बा हो, तो एक छोटी सी 30 रुपये की वस्तु भी परिवार चलाने का मजबूत जरिया बन सकती है. वर्धमान से जमशेदपुर आकर राधेश्याम ने अपनी इसी लगन और प्रेजेंटेशन स्किल के बल पर खुद को एक सफल स्ट्रीट वेंडर के रूप में स्थापित किया है.























