झारखंड की राजधानी स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मेसरा के दीक्षांत समारोह में जम्मू के रहने वाले छात्र विपुल परासर ने उल्लेखनीय शैक्षणिक सफलता दर्ज की है। सिविल इंजीनियरिंग संकाय की पढ़ाई पूरी करते हुए उन्होंने अपनी कक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर इस प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान तक पहुंचना और फिर वहां अपनी विधा में सर्वश्रेष्ठ साबित होना उनके लंबे व्यक्तिगत और पारिवारिक समर्पण का परिणाम है। यह उपलब्धि उनके पूरे परिवार के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई है, क्योंकि वह अपने खानदान में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाले पहले सदस्य बन गए हैं।
साधारण पृष्ठभूमि और माता-पिता का बड़ा सपना
विपुल का पारिवारिक परिवेश बेहद साधारण रहा है। उनके माता-पिता जम्मू में निवास करते हैं, जहां उनके पिता केवल 11वीं कक्षा तक ही औपचारिक शिक्षा हासिल कर पाए थे, जबकि उनकी मां पढ़ी-लिखी नहीं हैं और घर-परिवार संभालने की जिम्मेदारी निभाती हैं। सीमित साधनों और औपचारिक उच्च शिक्षा के अभाव के बावजूद इन दोनों अभिभावकों की दिली इच्छा थी कि उनका बेटा उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक पेशेवर इंजीनियर बने। अपने परिवार की आर्थिक तंगियों, संसाधनों की कमी और लगातार संघर्षों को करीब से देखने वाले विपुल ने माता-पिता की इस आकांक्षा को अपना मुख्य जीवन लक्ष्य बना लिया। जम्मू से रांची के बीआईटी मेसरा तक का सफर उन्होंने अपने कुछ मित्रों के परामर्श और संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को देखकर तय किया था।
स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती और प्लेसमेंट का दौर
कॉलेज के वर्षों के दौरान विपुल का सफर चुनौतियों से मुक्त नहीं था। जब कैंपस में बहुप्रतीक्षित प्लेसमेंट प्रक्रिया चल रही थी, ठीक उसी संवेदनशील समय में एक अप्रत्याशित घटना घटी और उन्हें एक बिल्ली ने काट लिया। इस घटना के बाद उचित समय पर वैक्सीन लेने के बावजूद उनकी शारीरिक सेहत काफी बिगड़ गई और वह पूरे एक वर्ष तक लगातार अस्वस्थ रहे। शारीरिक कमजोरी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बीच प्लेसमेंट और शैक्षणिक परीक्षाओं का सामना करना बेहद कठिन था। इस संकट की घड़ी में उनकी वर्षों की नियमित अध्ययन की आदत, मानसिक दृढ़ता और पूर्व की निरंतर मेहनत काम आई। उन्होंने बीमारी के बीच हिम्मत नहीं हारी और न केवल अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि कैंपस चयन प्रक्रिया में भाग लेकर एक कॉर्पोरेट नौकरी का ऑफर भी सफलतापूर्वक हासिल किया।
नौकरी छोड़कर सिविल सर्विसेज का चुना नया रास्ता
कैंपस चयन प्रक्रिया के माध्यम से रोजगार मिलने के कुछ समय बाद ही विपुल के मन में अपने करियर को लेकर एक नया दृष्टिकोण विकसित हुआ। निजी क्षेत्र की इस तकनीकी नौकरी में उनका मन अधिक समय तक नहीं लगा, जिसके चलते उन्होंने कुछ ही समय काम करने के बाद वह पद छोड़ दिया। अब उनका ध्यान पूरी तरह से देश की प्रशासनिक व्यवस्था और सिविल सर्विसेज परीक्षा की ओर मुड़ चुका है। विपुल का लक्ष्य एक स्थिर और जनसेवा से जुड़ी सरकारी सेवा में स्थान बनाना है। अपने खानदान का पहला इंजीनियर बनकर उन्होंने जिस शैक्षणिक आधारशिला को तैयार किया है, उसी के बल पर अब वह पूर्ण समर्पण के साथ प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी में जुटने जा रहे हैं।
विद्यार्थियों के लिए संतुलित जीवन और निरंतरता का मंत्र
अपनी इस शैक्षणिक यात्रा और अनुभवों के आधार पर विपुल युवा पीढ़ी और इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को जीवन में संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण परामर्श देते हैं। उनका मानना है कि विद्यार्थियों को केवल किताबों में कैद होकर तनावग्रस्त नहीं होना चाहिए। जीवन का आनंद लेने के लिए खेलकूद, मित्रों के साथ बाहर जाना और सामाजिक गतिविधियां उतनी ही आवश्यक हैं, जितनी कि पढ़ाई। हालांकि, इन मनोरंजनों के साथ अनुशासन का होना जरूरी है। बाहर से लौटने के बाद रोजाना कम से कम दो से तीन घंटे एकाग्रचित्त होकर नियमित अध्ययन करना चाहिए। परीक्षा के अंतिम दिनों में पढ़ाई का बोझ उठाने के बजाय पूरे साल भर निरंतरता बनाए रखना ही बिना किसी बोरियत के उत्कृष्ट परिणाम दिलाने का सबसे सरल मार्ग है।























