झारखंड स्थित जमशेदपुर के दलमा वन्यजीव अभयारण्य में हाथियों के कुनबे में एक नया सदस्य जुड़ गया है। कभी जंगल में अपने परिवार से बिछड़कर गंभीर संकट में पड़े नन्हे हाथी शेखर को अब यहां एक सुरक्षित आशियाना मिल गया है। अपनी चंचलता और नटखट हरकतों से यह नन्हा जीव अभयारण्य के कर्मचारियों और आने-जाने वाले लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
गुमला से दलमा तक का सफर और रेस्क्यू की वजह
करीब 7 महीने के शेखर को सोमवार के दिन गुमला वन प्रमंडल से स्थानांतरित कर दलमा लाया गया। असल में यह बच्चा अपने प्राकृतिक झुंड से अलग हो गया था। वन विभाग के कर्मचारियों ने पहले उसे दोबारा हाथियों के झुंड में शामिल कराने का पूरा प्रयास किया, लेकिन कुछ ही समय बाद वह फिर से झुंड से छिटक कर अकेला रह गया। जंगल में अकेले रहने की वजह से उसकी जान को खतरे की आशंका थी। इसी को देखते हुए वन अधिकारियों ने उसकी मुकम्मल सुरक्षा और उचित परवरिश के लिए उसे दलमा अभयारण्य भेजने का फैसला किया।
दलमा के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि सभी जरूरी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शेखर को यहां शिफ्ट किया गया। दलमा की धरती पर कदम रखते ही शेखर ने अपनी जबरदस्त ऊर्जा और चंचलता दिखाई। नए वातावरण में कदम रखते ही वह इतना अधिक सक्रिय हो गया कि उसे संभालते हुए सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में वनकर्मियों को खासी मशक्कत का सामना करना पड़ा।
रजनी और बादल के साथ बना तीन सदस्यों का परिवार
दलमा वन्यजीव अभयारण्य में पहले से ही रजनी नाम की हथिनी और बादल नाम का हाथी निवास कर रहे हैं। नन्हे शेखर के आगमन के साथ ही अब इस अभयारण्य में हाथियों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। दलमा पहुंचने पर हथिनी रजनी की देखभाल का जिम्मा संभालने वाले महावत ने खुद अपने हाथों से शेखर को भोजन कराया।
वन विभाग की पूरी टीम की सीधी निगरानी में नन्हे शेखर के खानपान, स्वास्थ्य और दिनचर्या पर पैनी नजर रखी जा रही है। इस नए बदलाव के बाद अब दलमा आने वाले पर्यटकों को रजनी और बादल के साथ-साथ नन्हे शेखर की नटखट अठखेलियां देखने का भी सुखद अवसर मिलेगा। अपने झुंड से अलग होने के दर्द के बाद शेखर को यहां एक सुरक्षित और स्नेहमयी परिवेश मिलने की पूरी उम्मीद है।


















