त्योहारों का समय आते ही हर परिवार अपने आशियाने को संवारने और एक नया रूप देने की तैयारियों में जुट जाता है। मौजूदा दौर में घरों के इंटीरियर और बाहरी हिस्सों को सजाने के लिए क्लासिक रीति-रिवाजों और आधुनिक सजावटी शैलियों का एक बेहद खूबसूरत तालमेल देखा जा रहा है। पारंपरिक गेंदे के फूलों की सुगंधित लड़ियों से लेकर सूक्ष्म रोशनी बिखेरने वाली फेयरी लाइट्स तक, सजावट के ये रचनात्मक विकल्प घर के कोने-कोने को रोशन करने के साथ पर्व के उल्लास को कई गुना बढ़ा रहे हैं।
दीवारों पर फूलों और रोशनी का अनोखा संगम
घर की सादी दीवारों को जीवंत बनाने के लिए इन दिनों पीले और नारंगी गेंदे के फूलों की लड़ियों के साथ हल्की सुनहरी चमक वाली फेयरी लाइट्स लगाने का चलन काफी लोकप्रिय हो रहा है। ताजे फूलों के प्राकृतिक रंगों और सुनहरी रोशनी का यह संयोजन घर को एक राजसी और शांत एहसास प्रदान करता है। इस तरीके की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अधिक बजट खर्च किए बिना ही पूरे कमरे का कायाकल्प हो जाता है। कम लागत में मिलने वाला यह शानदार परिणाम ही लोगों को इस शैली की ओर तेजी से आकर्षित कर रहा है।
पूजा स्थल और प्रवेश द्वार की भव्यता
सजावट से जुड़ी उपयोगी ट्रिक्स और सुझाव देने वाली एक्सपर्ट शालू के अनुसार, दीवारों पर आध्यात्मिक चित्रों को स्थापित करके उनके किनारों पर नफासत भरी लाइटिंग की व्यवस्था करने से परिवेश में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से घर के पूजा घर या मंदिर के इर्द-गिर्द इस तरह की गई सजावट त्योहारी गरिमा को और अधिक बढ़ा देती है। इसके अतिरिक्त, मंगल कलश, पवित्र नारियल, मोर पंख और ताजे सुगंधित फूलों का समायोजन करके भी घर को नया निखार दिया जा सकता है। प्रवेश द्वार और पूजा स्थल पर की गई ऐसी सजावट न केवल आने वाले अतिथियों का मन मोह लेती है, बल्कि धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप घर में शुभता और पारंपरिक उल्लास का भी संचार करती है।
प्राकृतिक फूलों की रंगोली और जलते दीयों की छटा
दिवाली जैसे बड़े पर्व पर फर्श को सजाने के लिए रासायनिक रंगों के स्थान पर ताजे फूलों से बनी रंगोली को प्राथमिकता दी जा रही है। फर्श अथवा दीवारों की चौखट के पास लाल और पीले गेंदे के फूलों के साथ ताजी गुलाब की पंखुड़ियों को जोड़कर गोलाकार रंगोली तैयार की जाती है। इस पुष्प रंगोली के बिल्कुल मध्य में एक जलता हुआ पारंपरिक दीया स्थापित करने से उसकी आभा देखते ही बनती है। सिंथेटिक पाउडर के मुकाबले फूलों से तैयार की गई रंगोली न सिर्फ प्राकृतिक और सौम्य दिखती है, बल्कि फूलों की भीनी-भीनी महक पूरे घर के वातावरण को ताजी ऊर्जा से भर देती है। इन सरल और असरदार तरीकों से पूरे घर को भव्य पारंपरिक रूप दिया जा सकता है।
गमलों और हरियाली के बीच फेयरी लाइट्स की चमक
घर के मुख्य द्वार, बालकनी या बरामदे में रखे हरे-भरे इनडोर और आउटडोर पौधों के गमलों को फेयरी लाइट्स के जरिए सजाने का ट्रेंड भी काफी पसंद किया जा रहा है। सघन हरी पत्तियों और शाखाओं के बीच से छनकर आती टिमटिमाती रोशनी घर के पूरे माहौल को प्राकृतिक ताजगी और आधुनिक आकर्षण देती है। शाम ढलते ही जब गमलों में लगी ये लाइट्स जलती हैं, तो यह नजारा बेहद सुकून देने वाला होता है और त्योहार की रातों में घर के बाहरी हिस्से की शोभा को दोगुना कर देता है।
पारंपरिक तोरण, घंटियां और सजावटी लटकन
मुख्य दरवाजों की चौखट और छत के किनारों को सजाने के लिए आम के ताजे पत्तों और गेंदे के फूलों से गूंथे गए तोरण के साथ छोटी घंटियों और खूबसूरत लटकनों का प्रयोग किया जा सकता है। सनातन मान्यताओं में तोरण को घर में सुख, समृद्धि और शुभ ऊर्जा के आगमन का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही, यह प्रवेश द्वार को गरिमामय बनाने और त्योहार के पावन मौके पर घर आने वाले मेहमानों के हार्दिक स्वागत की एक बेहद सुंदर सांस्कृतिक परंपरा भी है।
डेकोर एक्सपर्ट के सुरक्षा और ताजगी से जुड़े सुझाव
गृह सज्जा से जुड़ी विशेषज्ञ शालू तिवारी का स्पष्ट कहना है कि घर सजाते समय रंगों के चयन और रोशनी की तीव्रता के बीच एक सटीक संतुलन बनाए रखना सबसे अहम है। बिजली से चलने वाली लाइट्स और झालर लगाते वक्त तारों की सुरक्षा और वायरिंग का पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के हादसे की गुंजाइश न रहे। इसके साथ ही, फूलों की सजावट करते समय यह ध्यान रखें कि ताजे फूलों को मुख्य कार्यक्रम या पूजा शुरू होने से कुछ देर पहले ही लगाया जाए। ऐसा करने से फूल लंबे समय तक मुरझाते नहीं हैं और उनकी ताजगी व खिला हुआ रूप पूरे उत्सव के दौरान बना रहता है।



















