राज्य भर में हाल के दिनों में दर्ज की गई वर्षा ने मौसमी गतिविधियों की दिशा पूरी तरह बदल दी है। आसमान में छाई घटाओं, बूंदाबांदी और पछुआ हवाओं के मेल से वायुमंडल में अचानक ठंडक घुल गई है, जिसके चलते लंबे समय से जारी उमस भरी गर्मी का असर लगभग खत्म हो गया। सुबह की शुरुआत और सूरज ढलने के बाद अब सिहरन भरी ठंड महसूस होने लगी है। राजधानी रांची समेत कई इलाकों में पारे में आई भारी गिरावट के चलते घरों में एयर कंडीशनर और कूलर जैसे उपकरणों का चलना बंद होने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 1 नवंबर से लेकर 5 नवंबर तक राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम का मिजाज स्थिर नहीं रहेगा, जहां कुछ स्थानों पर बादल छाए रहेंगे और बौछारें गिरेंगी, वहीं अन्य हिस्सों में मौसम सूखा बना रह सकता है।
राज्य के सभी जिलों में वर्षा की संभावना और बादलों का रुख
मौसम विज्ञान केंद्र रांची की ओर से 31 अक्टूबर को जारी किए गए आकलन के अनुसार, 1 नवंबर की सुबह 8:30 बजे तक राज्य के समूचे 24 जिलों के भीतर हल्की वर्षा अथवा छीटें पड़ने की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई थीं। इस दायरे में राजधानी रांची के साथ-साथ खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, चतरा और गिरिडीह जैसे मध्य व उत्तरी जिले शामिल रहे। इसके अलावा कोल्हान और संताल परगना के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, देवघर, दुमका, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज के विस्तृत भूभाग को भी इस परिधि में दर्ज किया गया था। यद्यपि यह संभावना सुबह 8:30 बजे की समयावधि तक के लिए ही थी, जिसका तात्पर्य यह कतई नहीं है कि पूरे दिन भर लगातार झड़ी लगी रहेगी। दिन के दूसरे पहर में कई कस्बों और बस्तियों में बादलों के छंटने और तीखी धूप खिलने की भी पूरी गुंजाइश बनी हुई है।
गरज-चमक के बीच बचाव और सुरक्षा के जरूरी निर्देश
आसमान में बादलों के जमावड़े के साथ मेघ गर्जन और आकाशीय बिजली कड़कने की आशंका को देखते हुए नागरिकों को सुरक्षा के एहतियाती उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। जब भी मौसम अचानक बदले, उस दौरान खुले मैदानों, खेतों, ऊंचे वृक्षों तथा विद्युत खंभों व तारों के समीप खड़ा होना जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए ऐसे स्थानों से फौरन दूरी बना लेनी चाहिए। राहत की बात यह है कि 1 नवंबर के दिन के लिए किसी भी विशिष्ट जनपद के वास्ते आंधी-तूफान अथवा भीषण वज्रपात की अलग से कोई चेतावनी या विशेष अलर्ट लागू नहीं किया गया है, फिर भी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के प्राथमिक नियम अमल में लाना आवश्यक है।
तापमान का विश्लेषण: रांची से लेकर जमशेदपुर तक भारी गिरावट
हालिया वर्षा का सबसे सीधा और प्रत्यक्ष असर वातावरण के तापमान पर देखने को मिला है। राजधानी रांची में 30 अक्टूबर के दिन अधिकतम पारा लुढ़ककर 21.8 डिग्री सेल्सियस के स्तर पर आ गया था, जो इस मौसम के सामान्य मानक स्तर की तुलना में लगभग 6 डिग्री कम दर्ज किया गया। पिछले 48 घंटों के अंतराल पर नजर डालें तो अधिकतम पारे में 7 डिग्री से अधिक की तीव्र गिरावट आंकी गई है। हालांकि 31 अक्टूबर के आधिकारिक अभिलेखों के मुताबिक रांची का अधिकतम तापमान 28.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस मापा गया। उधर डालटनगंज के इलाके में अधिकतम पारा 28.6 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में अधिकतम 31.2 डिग्री तथा न्यूनतम 22.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
प्रमुख नगरों में अधिकतम और न्यूनतम पारे का हाल
मौसमी फेरबदल के इस दौर में राज्य के प्रमुख केंद्रों पर दर्ज किया गया तापमान इस बात की पुष्टि करता है कि अब दिन और रात दोनों वक्त मौसम सुहाना होने लगा है
- रांची: अधिकतम तापमान 28.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
- पलामू: यहां का अधिकतम पारा 28.6 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस रहा।
- बोकारो: औद्योगिक क्षेत्र में अधिकतम 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम स्तर 22 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।
- हजारीबाग: पठारी क्षेत्र होने के नाते यहां अधिकतम 26.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 19.9 डिग्री सेल्सियस मापा गया।
- जमशेदपुर: शहर में अधिकतम पारा 31.2 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस रहा।
- रामगढ़: अधिकतम स्तर 29 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज हुआ।
1 से 5 नवंबर के बीच मौसमी बदलावों का संपूर्ण चक्र
आने वाले पांच दिनों के दौरान राज्य का मौसमी चक्र कई चरणों से होकर गुजरेगा। 1 और 2 नवंबर को आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी तथा इक्का-दुक्का स्थानों पर हल्की फुहारें गिरने की प्रबल संभावना है। 3 नवंबर की तारीख को भी वायुमंडलीय परिस्थितियों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वहीं 4 नवंबर के दिन विशेष रूप से बादलों की गड़गड़ाहट और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका व्यक्त की गई है। इसके पश्चात 5 नवंबर की भोर में हल्का कुहासा छाए रहने और दिन चढ़ने पर मुख्य रूप से मौसम के साफ व धूपदार हो जाने का अनुमान जताया गया है। जमशेदपुर क्षेत्र में 1 से 4 नवंबर तक दिन का अधिकतम तापमान 30 से 31 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 22 से 23 डिग्री सेल्सियस के इर्द-गिर्द सिमटे रहने के आसार हैं।
शीत ऋतु की दस्तक और छठ महापर्व के घाटों पर मौसम का असर
पारे में आई गिरावट के बाद आम जनजीवन को चिपचिपी गर्मी से मुक्ति मिल गई है। विशेष रूप से रांची, हजारीबाग, रामगढ़ और पलामू जैसे इलाकों में सुबह-शाम ठंडी हवाएं चलने लगी हैं, जिसके चलते घरों में वातानुकूलित यंत्रों और कूलरों की उपयोगिता स्वतः समाप्त हो रही है। हालांकि संताल परगना और जमशेदपुर के भूभाग में दोपहर के वक्त तापमान 30 डिग्री सेल्सियस या उससे थोड़ा ऊपर बना रह सकता है, जिससे वहां दोपहर में मामूली तपन बनी रहेगी। दूसरी ओर, आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियों में जुटे श्रद्धालुओं के बीच मौसम की स्थिति को लेकर कौतूहल और चिंता का माहौल है। इस वर्ष जलाशयों और नदी घाटों पर प्रातःकालीन अर्घ्य अर्पण के समय व्रतियों और श्रद्धालुओं को सिहरन भरी ठंडक और घने कुहासे का सामना करना पड़ सकता है। यद्यपि छठ महापर्व की वास्तविक तिथियों के लिए वर्षा, बादलों के घनत्व, कुहासे और सटीक तापमान का विस्तृत आंकड़ा अभी जारी नहीं किया गया है।



















