झारखंड में मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने की दिशा में मंगलवार से एक व्यापक अभियान की शुरुआत हो गई है। राजधानी रांची सहित प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया एक साथ शुरू की गई है। इस महत्वपूर्ण अभियान के तहत राज्य के तमाम मतदान केंद्रों और बूथों पर पहले दिन से ही जबरदस्त प्रशासनिक सक्रियता दिखाई दी। लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने वाले इस अभियान का सबसे बड़ा मकसद यह है कि जो लोग वास्तव में मतदान करने के अधिकारी हैं उनके नाम वोटर लिस्ट में दर्ज हों, और जो फर्जी या गैर-वाजिब तरीके से नाम डलवाए गए हैं वे सूची से हटाए जाएं।
29 जुलाई तक चलेगा अभियान, BLO करेंगे घर-घर दौरा
रांची के हटिया विधानसभा क्षेत्र में बूथ नंबर 105 से लेकर 109 तक तैनात बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO ने बताया कि यह विशेष SIR प्रक्रिया आगामी 29 जुलाई तक लगातार चलती रहेगी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान क्षेत्र के हर मतदाता के लिए एक विशेष सत्यापन फॉर्म भरना अनिवार्य किया गया है। इस काम के लिए मतदाताओं को खुद किसी दफ्तर या बूथ पर जाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि बूथ लेवल अधिकारी खुद उनके घर-द्वार पर पहुंचकर यह फॉर्म भरवाने का काम पूरा करेंगे। सुबह से ही हटिया क्षेत्र समेत राज्यभर के बूथों पर प्रशासनिक अमला पूरी तैयारी और मुस्तैदी के साथ मैदान में उतर गया।
सभी बूथों पर BLO और राजनीतिक एजेंटों की अहम बैठक
अभियान के पहले ही दिन राज्य के लगभग सभी मतदान केंद्रों पर BLO सुपरवाइजरों की निगरानी में एक बड़ी और अहम समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बूथ लेवल अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंट यानी BLA-2 भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह था कि हर राजनीतिक दल पूरी तरह संतुष्ट हो जाए कि उनके विधानसभा क्षेत्र का कोई भी वास्तविक और पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। इन बैठकों के जरिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि SIR की पूरी प्रक्रिया को बारीकी से जांच और समझ रहे हैं ताकि किसी भी स्तर पर कोई चूक न हो।
तकनीक और भौतिक सत्यापन का संयोजन
प्रशासनिक अधिकारियों और BLO सुपरवाइजरों के मुताबिक, इस बार मतदाता सूची के पुनरीक्षण में महज कागजी काम नहीं होगा। तकनीकी साधनों और जमीनी स्तर पर किए जाने वाले कड़े भौतिक सत्यापन को एक साथ मिलाकर काम किया जाएगा। घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने की इस प्रक्रिया के जरिए उन मतदाताओं की आसानी से पहचान हो सकेगी जो या तो अपना क्षेत्र छोड़कर कहीं दूसरी जगह जा बसे हैं या फिर जिनका निधन हो चुका है। ऐसे मामलों में उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे। इस पूरे कड़े भौतिक सत्यापन के बाद जो नई मतदाता सूची अस्तित्व में आएगी, वह आने वाले चुनावों में निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान की सबसे बड़ी गारंटी साबित होगी।













